
भाजपा नेताओ की आपसी खींचतान में जनपद “अध्यक्ष- उपाध्यक्ष” की कुर्सी खतरें में? जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल और अजेश अग्रवाल के बीच खुला जंग?
एक भाजपा नेता 2 जनपद सदस्य को अपने पास रखा?
जिलाध्यक्ष और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच खुला जंग?
11 जनपद सदस्य एक साथ तो 2 सदस्य अलग हुए?
सलवा-जुडुम की राजनिति में कांग्रेस को मिल सकता है फायदा?
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
राजनिति में कोई स्थायी दुश्मन और स्थायी दोस्त नही होता है यह बात सारंगढ़ जनपद पंचायत की राजनिति को करीब से जानने वाले अच्छी तरह से जानते है और यही कारण है कि बहुमत का आंकड़ा होने के बाद भी जनपद पंचायत सारंगढ़ में अध्यक्ष और उपाध्क्ष पद पर भाजपा जीतकर भी हार की ओर अग्रसर है। वित्त मंत्री ओ.पी.चौधरी के मेहनत पर पानी फेरने के लिये भाजपा जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल आमने- सामने हो गये है तथा 11 जनपद सदस्य एक स्थान पर तो 2 जनपद सदस्य एक स्थान पर रखे गये है जिससे लग रहा है कि भाजपा जीती हुई बाजी हार सकती है।
दरअसल सारंगढ़ मे भाजपा की राजनिति मे विपक्षी दल कांग्रेस के साथ सलवा- जुडुम बड़ा मायने रखती है इस कारण से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले ही जनपद पंचायत पर कब्जे को लेकर कांग्रेस नेता आश्वस्त थे कि यहा पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को लेकर मतदान के पहले ही नाम तय हो गया है और अध्यक्ष कांग्रेस तथा उपाध्यक्ष भाजपा का होना तय हो गया था। किन्तु मतदाताओ ने ऐसा मतदान किया अध्यक्ष पद के प्रस्तावित कांग्रेसी उम्मीदवार और उपाध्यक्ष पद के प्रस्तावित भाजपाई उम्मीदवार के चारो खाने चित्त हो गये और दोनो ही चुनाव हार गये। किन्तु शह और मात का खेल यही पर खत्म नही हुआ बल्कि पूरे शबाब पर अभी भी चल रहा है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार सारंगढ़ जनपद पंचायत में भाजपा अपने खेमें में 14 सदस्यो के होने का दावा तो जरूर कर रही है किन्तु उनके पास 11 सदस्य ही मौजूद है। बताया जा रहा है कि 2 जनपद सदस्य को जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष अजेश अग्रवाल अपने कब्जे मे रखे हुए है। सूत्रो का दावा है कि अज्ञातवास में रह रहे सभी जनपद सदस्यो के साथ 2 जनपद सदस्य साथ नही है। भले ही सूत्र दावा कर रहे है कि दोनो सदस्य भाजपा के ही उम्मीदवार को मतदान करेगें तथा भाजपा कार्यकर्ता ही जनपद सदस्य बने हुए है किन्तु यहा पर लड़ाई वर्चस्व की हो रही है।
सूत्रो की माने तो जनपद पंचायत में कांग्रेस को अध्यक्ष देने और भाजपा को उपाध्यक्ष देने के तय समझौता के विरूद्ध जनादेश आने तथा प्रस्तावित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का जनपद पंचायत सदस्य का चुनाव में हार जाने के कारण से
जमा-जमाया समीकरण तहस-नहस हो गया। अन्यथा यहा पर तय हो गया था कि अध्यक्ष और उपाध्यक्ष कौन बनेगा? सत्ताधारी दल भाजपा के जीते हुए जनपद सदस्यो को कांग्रेस को गिफ्ट देने का भी षडयंत्र यहा पर रच लिया गया था किन्तु जनपद सदस्यो के कई चेहरे के करारी हार ने इस समझौते का अमलीजामा पहनाने के पहले की बीरबल की खिचड़ी के रूप में तब्दील कर दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गये और भाजपा समर्थित जनपद पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चयन के पहले की खुलकर गुटबाजी देखने को मिल रही है। सूत्रो की माने तो भाजपा नेताओ ने जनपद पंचायत में कब्जे को लेकर जनपद सदस्यो को अपने साथ अज्ञातवास की ओर ले गये है जिसमे 14 सदस्य होने का दावा कर रहे है किन्तु वास्तव मे 14 सदस्य के स्थान पर 13 सदस्य होने का संकेत सूत्र प्रदान कर रहे है और उसमे भी 2 सदस्य पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल के पास होने का भी जानकारी सूत्र बता रहे है। इस कारण से भाजपा नेताओ मे दोनो बड़े नेताओ के खीचतान को लेकर आक्रोश है। सूत्रो की माने तो पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष इस बात का दावा कर रहे है कि दोनो सदस्य भाजपा के द्वारा चयनित किये जाने वोल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के उम्मीदवार का नि:शर्त सर्मथन कर मतदान करेगें किन्तु सूत्र बताते है कि जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल के द्वारा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद के लिये चयन में अपने वीटो का उपयोग कर मनमानी उम्मीदवार का नाम तय कराने की दशा में दोनो सदस्यो को मतदान से ही वंचित रखने की धमकी भी दिया जा रहा है। ऐसे में भाजपा जनपद पंचायत सारंगढ़ में बहुमत पाने के बाद भी अपना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को गवां भी
सकती है।
जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल और अजेश अग्रवाल के बीच
खीचतान?
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले मे भाजपा के जिलाध्यक्ष के रूप में ज्योति पटेल की ताजपोशी होने के बाद से ही पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल और ज्योति पटेल के बीच जंग शुरू हो गया है। दरअसल लगभग 20 माह पहले एक मामले मे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल के खिलाफ वर्तमान जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल के भाई मोती पटेल ने मोर्चा खोल दिया और कांग्रेस सरकार के समय अपराधिक प्रकरण दर्ज करवाने मे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। जिसके कारण से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इसी बात को लेकर दोनो के बीच खीचातानी की खबरे छनकर सामने आती थी। वही पंचायत चुनाव मे जिलाध्यक्ष का भाई मोती पटेल जनपद सदस्य का चुनाव हार गये जिसका दोष वे पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश को दे रहे है और यही कारण है कि जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल जनपद पंचायत के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद पर अपने
पसंद के जनपद सदस्य को बिठाना चाहते है और इसी कड़ी में उठाये जा रहे जनपद सदस्यो मे से दो सदस्य आज भी भाजपा खेमे से दूर है।
प्रदेश के नेताओ तक पहुंची शिकवा-शिकायत? बताया जा रहा है कि जनपद पंचायत मे बहुमत के आंकड़ा वाले जनपद सदस्य अपने साथ रखने के बाद भी भाजपा को काफी जदोजहद करने पड़ रही है। इस कारण से अध्यक्ष पद के दावेदारो और उपाध्यक्ष पद के दावेदार अभी इंतजार करो की नीति पर चल रहे है। भाजपा के कई नेता दोनो बड़े नेता को चर्चा कर आपसी समन्वय बनाने के लिये प्रयास कर रहे है। वही सूत्र बताते है कि पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल ने कांग्रेस नेताओ के साथ मिलकर गौण खनिज की राशी का रिलीज कराने के लिये जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल के भाई मोती पटेल के द्वारा आंदोलन करने वाला मुद्दा को बड़े नेताओ के सामने शिकायत के तौर पर रखा है। वही जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल ने प्रदेश के नेताओ को पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल के दो जनपद सदस्य को अपने साथ रखने का कारनामा की शिकायत किया है। जिसके कारण से पूरा मामला अभी काफी गर्म हो गया है।
बहरहाल अब देखना यह है कि सारंगढ़ जनपद पंचायत के अध्यक्ष पद पर भाजपा समर्थित जनपद सदस्य का कब्जा हो पायेगा या नही? तथा जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अजेश अग्रवाल के बीच खुला जंग क्या परिणाम लायेगा।