
सारंगढ़ जनपद पंचायत में सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति पर उठने लगे सवाल, भाजपा कार्यकर्ताओं में बढ़ रही नाराजगी
“आखिर कब होगी सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति?”

सारंगढ़। सारंगढ़ जनपद पंचायत में सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति को लेकर भाजपा समर्थित जनपद सदस्यों और कार्यकर्ताओं के बीच लगातार असंतोष का माहौल बनता जा रहा है। रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र के सांसद राधेश्याम राठिया से इस संबंध में कई बार निवेदन किए जाने के बावजूद अब तक नियुक्ति नहीं होने से संगठन के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि जनपद पंचायत जैसे महत्वपूर्ण निकाय में भाजपा समर्थित 16 सदस्य होने के बावजूद पार्टी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद गंवा चुकी है। ऐसे में कार्यकर्ताओं का मानना है कि मजबूत नेतृत्व और समन्वय की कमी के कारण संगठन को लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है।
“सारंगढ़ के मुद्दों पर कौन कर रहा गुमराह?”
भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच यह चर्चा भी जोरों पर है कि सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी सांसद राधेश्याम राठिया तक आखिर सारंगढ़ की वास्तविक राजनीतिक स्थिति क्यों नहीं पहुंच पा रही है। सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं कुछ स्थानीय चेहरे सांसद को गुमराह तो नहीं कर रहे, जिसके चलते संगठनात्मक निर्णयों में देरी हो रही है. कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते जनपद पंचायत में सक्रिय और प्रभावी सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति कर दी जाती तो संगठन को मजबूती मिल सकती थी और भाजपा समर्थित सदस्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होता।
नगर पालिका चुनाव नजदीक, फिर भी संगठनात्मक सुस्ती
राजनीतिक जानकारों की मानें तो आगामी छह महीनों में नगर पालिका चुनाव भी प्रस्तावित हैं, लेकिन वहां भी अब तक किसी प्रतिनिधि की नियुक्ति नहीं की गई है। ऐसे में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक माना जा रहा है कि आखिर संगठन स्तर पर इतनी निष्क्रियता क्यों दिखाई दे रही है।
कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जिले में नेतृत्व कर रहे कुछ चेहरे संगठन को मजबूत करने के बजाय आंतरिक राजनीति में उलझे हुए हैं। यही कारण है कि विपक्ष लगातार मजबूत होता जा रहा है जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है।
“कांग्रेस लगातार बना रही प्रतिनिधि, भाजपा पीछे क्यों?”
स्थानीय राजनीति में इस बात की भी तुलना की जा रही है कि जहां सारंगढ़ विधायक उत्तरी गणपत जांगड़े द्वारा लगातार विभिन्न विभागों और निकायों में विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति की जा रही है, वहीं भाजपा की ओर से ऐसी सक्रियता नजर नहीं आ रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रतिनिधियों की नियुक्ति से संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलती है और जनता से सीधा संवाद भी बना रहता है। कांग्रेस इस रणनीति पर तेजी से काम कर रही है, जबकि भाजपा इस मामले में पिछड़ती दिखाई दे रही है।
सिर्फ जिला पंचायत में हुई नियुक्ति
अब तक सांसद राधेश्याम राठिया द्वारा सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पंचायत में वरिष्ठ भाजपा नेता अरुण गुड्डू को सांसद प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है। लेकिन इसके बाद लोकसभा क्षेत्र के अन्य निकायों और विभागों में किसी भी प्रतिनिधि की नियुक्ति नहीं होना कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा और असंतोष का विषय बना हुआ है. भाजपा समर्थित जनपद सदस्यों का कहना है कि जनपद पंचायत में सभी सदस्य लगभग एकमत हैं और वे चाहते हैं कि जल्द से जल्द एक सक्षम सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति हो, ताकि संगठनात्मक समन्वय बेहतर हो सके।
रकम उगाही की चर्चाओं से बढ़ा विवाद
मामले को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं भी चल रही हैं। सूत्रों के हवाले से यह बात भी सामने आ रही है कि सांसद प्रतिनिधि बनाए जाने के नाम पर रकम उगाही की चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस तरह की चर्चाओं ने संगठन के भीतर असहज स्थिति जरूर पैदा कर दी है। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि इन चर्चाओं में कोई सच्चाई नहीं है तो आखिर नियुक्ति में इतनी देरी क्यों हो रही है। वहीं यदि पार्टी के भीतर सबकुछ सामान्य है तो फिर संगठनात्मक निर्णयों में यह ठहराव किस कारण बना हुआ है।
“दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली नजर आ रही”
भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह भी चर्चा है कि जिस जनपद पंचायत में भाजपा समर्थित 16 सदस्य मौजूद हों और उसके बावजूद अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष दोनों पद पार्टी के हाथ से निकल जाएं, वह अपने आप में संगठनात्मक कमजोरी को दर्शाता है। ऐसे में एक वर्ष बीत जाने के बाद भी सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति नहीं होना कई सवाल खड़े कर रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक ढांचे को मजबूत नहीं किया गया तो आने वाले चुनावों में इसका सीधा लाभ कांग्रेस को मिल सकता है। फिलहाल सारंगढ़ की राजनीति में सांसद प्रतिनिधि की नियुक्ति का मुद्दा तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है और अब सभी की नजरें सांसद राधेश्याम राठिया एवं भाजपा संगठन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।



