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सारंगढ़ रेल लाइन : आखिर कब दिखेगी राजनीतिक इच्छाशक्ति?

सारंगढ़ रेल लाइन : आखिर कब दिखेगी राजनीतिक इच्छाशक्ति?

सारंगढ़ रेल लाइन : आखिर कब दिखेगी राजनीतिक इच्छाशक्ति?

जनता की वर्षों पुरानी मांग पर कब जागेंगे जिम्मेदार जनप्रतिनिधि

सारंगढ़-बिलाईगढ़ — झारसुगड़ा (उड़ीसा) से सारंगढ़ होते हुए रायपुर तक प्रस्तावित लगभग 310 किलोमीटर लंबी रेल लाइन आज केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि पूरे सारंगढ़-बिलाईगढ़ अंचल की उम्मीद, विकास और भविष्य से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा बन चुकी है। लगभग 30 वर्षों से क्षेत्र की जनता रेल मार्ग की मांग उठाती आ रही है, लेकिन हर बार आश्वासन और ज्ञापन के बाद मामला ठंडे बस्ते में जाता दिखाई देता है।
अब सवाल यह उठने लगा है कि आखिर सत्ता में मजबूत पकड़ होने के बावजूद जिले के भाजपा नेता इस महत्वपूर्ण विषय पर ठोस और निर्णायक पहल क्यों नहीं कर पा रहे हैं?
प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, केंद्र में भाजपा की सरकार है और पड़ोसी राज्य उड़ीसा में भी भाजपा सत्तारूढ़ है। ऐसे में सारंगढ़ की जनता यह पूछने लगी है कि आखिर जिले के भाजपा नेता और किसका इंतजार कर रहे हैं?
क्या केवल आवेदन देकर पूरी हो जाएगी जिम्मेदारी?
क्षेत्रवासियों का कहना है कि केवल ज्ञापन सौंप देने और आवेदन भेज देने से इतनी बड़ी परियोजना साकार नहीं होने वाली। रेल लाइन जैसी बहुप्रतीक्षित मांग के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति, निरंतर फॉलोअप और दिल्ली स्तर पर प्रभावी पैरवी की आवश्यकता है। लोगों का आरोप है कि जिले के कई भाजपा नेता केवल औपचारिकता निभाकर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेते हैं, जबकि जनता अब ठोस परिणाम देखना चाहती है। यही कारण है कि क्षेत्र में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आगामी चुनाव में आखिर जनता से किस आधार पर वोट मांगा जाएगा?

सांसद राधेश्याम राठिया से बड़ी उम्मीदें
राधे श्याम राठिया के सांसद बनने के बाद क्षेत्र की उम्मीदें और बढ़ गई थीं। लोगों को विश्वास था कि युवा नेतृत्व के रूप में वे सारंगढ़ रेल लाइन के मुद्दे को मजबूती से संसद और रेल मंत्रालय तक पहुंचाएंगे। लेकिन राधेश्याम राठिया जी के कार्यकाल के 2 वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक इस दिशा में कोई बड़ी राजनीतिक पहल या प्रभावी प्रतिनिधिमंडल सामने नहीं आ पाया है। यही वजह है कि आम जनता के साथ-साथ भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच भी निराशा का माहौल दिखाई देने लगा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सांसद कुछ सीमित लोगों से घिरे रहते हैं, जिसके कारण जमीनी स्तर की गंभीर समस्याएं उन तक पूरी मजबूती से नहीं पहुंच पा रही हैं।

भाजपा जिलाध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल
ज्योति लाल पटेल से भी क्षेत्रवासियों को काफी उम्मीदें हैं। लोगों का मानना है कि यदि जिला भाजपा नेतृत्व ठान ले, तो रेल लाइन के मुद्दे पर बड़ा जनआंदोलन और प्रभावी राजनीतिक दबाव बनाया जा सकता है। जनता यह भी पूछ रही है कि आखिर रेल मंत्री से मुलाकात के लिए पिछले दो वर्षों में बड़ा प्रतिनिधिमंडल अब तक क्यों नहीं गया? क्या सारंगढ़ की भावनाओं और विकास की मांग को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जा रहा, जितनी अपेक्षा की जा रही थी?

रेल लाइन बदल सकती है पूरे जिले की तस्वीर
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रस्तावित रेल लाइन केवल यातायात का साधन नहीं होगी, बल्कि यह पूरे क्षेत्र की आर्थिक धुरी साबित हो सकती है। इससे व्यापार, उद्योग, रोजगार, कृषि परिवहन और शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधाओं को अभूतपूर्व गति मिलेगी। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के दोनों विधानसभा क्षेत्र इस रेल परियोजना से सीधे प्रभावित होंगे। ऐसे में यह मुद्दा केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि जनजीवन और भविष्य से जुड़ा हुआ विषय बन चुका है।

पहले भी उठता रहा मुद्दा, लेकिन समाधान अब तक दूर
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जब सांसद थे, तब भी सारंगढ़ रेल लाइन का मुद्दा प्रमुखता से उठता रहा। इसके बाद पूर्व सांसद गोमती साय के कार्यकाल में भी यह मांग लगातार चर्चा में रही।
अब जब राधेश्याम राठिया सांसद हैं, तब क्षेत्र की जनता को उम्मीद है कि वे इस बहुप्रतीक्षित परियोजना को लेकर केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि धरातल पर ठोस पहल करते हुए सारंगढ़ की वर्षों पुरानी मांग को नई दिशा देंगे। जनता अब परिणाम चाहती है, गोमती साय के कार्यकाल के अंतिम समय में भाजपा के प्रतिनिधि मंडल ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विन वैष्णव से मुलाकात जरूर की थी उसके बाद आगे की कार्यवाही का कुछ पता नहीं चला.सारंगढ़ की जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि कार्यवाही चाहती है। लोगों का साफ कहना है कि यदि समय रहते रेल लाइन को लेकर मजबूत पहल नहीं हुई, तो यह मुद्दा आने वाले चुनावों में बड़ा जनभावनात्मक विषय बन सकता है। अब देखना यह होगा कि जिले के भाजपा नेता जनता की इस वर्षों पुरानी मांग को गंभीरता से लेते हैं या फिर रेल लाइन का सपना एक बार फिर राजनीतिक भाषणों और कागजी प्रस्तावों तक ही सीमित रह जाता है।

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