
सेंगोल का नेहरू की छडी कहकर दुष्प्रचार हुआ- प्रियदर्शिनी दिव्य
बिलाईगढ़। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य एवं बेटी बचाओ बेटी पढाओ जिला सह संयोजक श्रीमती प्रियदर्शिनी दिव्य ने प्रेस के माध्यम से कहा कि अंग्रेजों ने सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के तौर पर 1947 में जवाहरलाल नेहरू को सॅगोल या राजदंड दिया था। कार्यक्रम खत्म होने के बाद तमिलनाडु में बने इस सेंगोल को प्रयागराज के इलाहाबाद संग्रहालय की नेहरू गैलरी में रखवा दिया गया और ज्यादातर लोग समय के साथ इसे भूल भी गए। लेकिन इसे अब फिर से संसद में लोकसभा स्पीकर के आसन के पास स्थापित किया गया है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को लिखी गई एक चिट्ठी के बाद इस. सेंगोल की जानकारी ईकट्टी की गई। 15 अगस्त, 1947 की आधी रात को नेहरू द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने और उनके प्रसिद्ध ट्रिस्ट विद डेस्टिनी भाषण देने से कुछ मिनट पहले सेंगोल समारोह हुआ था। इस सेंगोल को अब तक नेहरू के प्रयागराज निवास स्थित निवास में रखा गया जो अब संग्रहालय बन गया है। उस समय टाइम मैग़जीन सहित कई भारत और विदेश के बड़े-बड़े अखबारों ने सेंगोल के बारे में काफी – कुछ छापा था। आईजीएनसीए के सेक्रेटरी सच्चिदानंद जोशी ने कहा, देश विभाजन और हिंसा से तबाह था। इसलिए समारोह जल्दी में आयोजित किया जाना था और चूंकि ये कोई कानूनी या औपचारिक मामला नहीं था, इसलिए इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रखा गया। लेकिन इस मामले के तह में जाने से पता चलेगा कि सेंगॉल के बारे में दुष्प्रचार ज्यादा किया गया। उसे नेहरू की छडी भी कहा गया। कहीं ना कहीं इस दुष्प्रचार के पीछे वामपंथी सोंच का ही हांथ था। बहरहाल मोदी जी के स्वर्णिम दौर में भारत अपने मुल अस्तित्व में आते जा रहा है। आने वाले दिनो में और भी ऐसी ऐसी ऐतिहासिक विरासतों से आम जनता का आमना सामना होगा जिसे देश विरोधी ताकतों के षडयंत्रपुर्ण कृत्यों की वजह से देश ने उन विरासतों को भुला दिया है। उक्त बातें बिलाईगढ़ भाजपा की सक्रिय नेत्री प्रियदर्शिनी दिव्य ने प्रेस के माध्यम से कही।








