
नगर पंचायत के बिना एनओसी के चल रहा “विश्वास क्लीनिक” को तहसीलदार ने किया सील!

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
बिलाईगढ़ मुख्यालय स्थित बंगलाभाटा के पास संचालित विश्वास क्लीनिक को प्रशासनिक टीम ने सील कर दिया है। जांच में क्लीनिक नगर पंचायत की
अनापत्ति प्रमाण पत्र के बिना संचालित पाया गया। एसडीएम प्रफुल्ल रजक ने बताया कि विश्वास क्लीनिक के खिलाफ लंबे समय से शिकायतें मिल रही
थीं। शिकायतों में गलत इलाज जैसे गंभीर आरोप भी शामिल थे। इन शिकायतों के बाद तहसीलदार कमलेश सिदार के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस विभाग की संयुक्त टीम बनाकर जांच की गई।
जांच के दौरान यह सामने आया कि क्लीनिक नगर पंचायत की एनओसी के बिना संचालित किया जा रहा था। इसके अलावा यह भी जानकारी सामने आई कि
क्लीनिक संचालक डॉ. सौरभविश्वास अक्सर बाहर रहते हैं और उनके पिता क्लीनिक संचालन संभालते हैं। इन अनियमितताओ के कारण से प्रशासन ने
क्लिनिक सील करने की कार्यवाही किया। एसडीएम ने बताया कि बिलाईगढ़ से सटे देवरबोड गांव में एक युवती की कथित तौर पर गलत इलाज से मौत की सूचना मिली है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई लिखित शिकायत कॉपी प्राप्त नहीं हुई है और न ही प्रशासन ने इसकी पुष्टि की है। प्रारंभिक जानकारी के
अनुसार, मृतक युवती ने इलाज के लिए विश्वास क्लीनिक में संपर्क किया था। इस मामले की भी जांच की जा रही है।
वही विश्वास क्लीनिक के संचालक डॉ. सौरभविश्वास ने सभी आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा कि मृतक युवती इलाज के लिए क्लीनिक आई थी। उस समय वे घर पर थे और क्लीनिक में उनके पिता मौजूद थे। उनके पिता ने फोन पर उनसे चर्चा की थी। इसके बाद युवती को गैस की दवा और इंजेक्शन दिया गया था। डॉ. विश्वास ने बताया कि युवती की हालत देखकर हार्ट की समस्या की आशंका हुई थी, इसलिए उसे ईसीजी कराने के लिए बाहर दिखाने की सलाह दी गई थी, क्योंकि उनके क्लीनिक में ईसीजी की सुविधा नहीं है। उन्होंने कहा कि गलत इलाज का आरोप पूरी तरह से निराधार है। डॉ. सौरभ विश्वास ने क्लीनिक सील करने की कार्रवाई पर भी विरोध जताया है।
उन्होंने बताया कि जब क्लीनिक को सील किया गया, तब वे जगदलपुर में थे। उनका कहना है कि कार्रवाई के दौरान उनसे मोबाइल पर कोई चर्चा नहीं की गई और न ही कोई आदेश दिखाया गया। डॉ. सौरभ विश्वास ने कहा कि उनकी अनुपस्थिति में क्लीनिक को सील किया गया। उन्होंने दावा किया कि क्लीनिक बंद था, लेकिन उनके पिता को बुलाकर क्लीनिक खुलवाया गया और फिर सील किया गया। एनओसी को लेकर उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों से आवेदन किया जा रहा है, लेकिन अब तक एनओसी क्यों नहीं मिल रही है, इसकी जानकारी उन्हें नहीं दी जा रही।



