
सारंगढ़ जनपद पंचायत चुनाव में बड़ा उलटफेर : भाजपा से बगावत कर कांग्रेस के सहयोग से ममता सिंह ठाकुर बनी जनपद अध्यक्ष,
भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी रजनी चोखलाल पटेल को हराया
ममता सिंह को 15 और रजनी को 10 व्होट मिले,
जनपद चुनाव में भाजपा के कई चेहरो ने पार्टी के साथ भीतरघात,
भाजपा के पदाधिकारी बनकर पार्टी की नैया डूबाई,
राजकुमारी चंद्रकुमार नेताम बने जनपद उपाध्यक्ष,
हेमा विश्वनाथ बसंत को हराया
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़ जनपद पंचायत चुनाव में भाजपा नेताओ के आपसी गुटबाजी और भाजपा के ही नेताओ के भीतरघात और खुलेघात का परिणाम यह आया कि 14 सदस्य होने के बाद भी अपना जनपद अध्यक्ष बनाने मे भाजपा असफल रही है। भाजपा से बगावत करके अध्यक्ष का फार्म भरने वाली ममता राजीव सिंह ठाकुर ने कांग्रेस के सहयोग से भाजपा के अधिकृत उम्मीदवार रजनी चोखलाल पटेल को 5 व्होटो
से हराया। भाजपा कैंप में पार्टी पदाधिकारियो और बडे नेताओ के द्वारा किया जा गुटबाजी और मनमानी को लेकर “सारंगढ़ टाईम्स” ने सप्ताहभर पहले की खबर प्रकाशित किया था जो कि आज प्रत्यक्ष रूप से सामने आ गया। भाजपा कार्यालय से एक बड़े नेता के द्वारा दो जनपद सदस्यो को अलग से अपने साथ ले जाने के बाद से ही स्थिति साफ नजर आ रही थी कि गुटबाजी के भंवरजाल में भाजपा फंस चुकी है और बहुमत होने के बाद भी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी गवां बैठी।
सारंगढ़ जनपद पंचायत के अध्यक्ष चुनाव को लेकर बीत 48 घंटे में स्थिति साफ होते नजर आ रही थी कि भाजपा में अध्यक्ष पद के उम्मीदवारी को लेकर गुटबाजी और गतिरोध बढ़ गया है और जिसके नाम पर मुहर नही लगी वह बगावत कर सकता है। किन्तु भाजपा के कर्ताधर्ता और पार्टी की लुटिया डूबोने वाले नेताओ ने इस बात को गंभीरता से ही नही लिया और अंत तक आश्वस्त रहे कि
ऐसा कुछ भी नही होगा। बीती रात को राजधानी में अध्यक्ष पद के लिये श्रीमती रजनी पटेल का नाम फायनल होने के बाद से ही ममता सिंह ठाकुर के तेवर बदलते दिख रहे थे और भाजपा के मैनेजरो ने इसको रोकने के बजाये साथ दिया जिसका परिणाम आज भाजपा की करारी परायज के रूप मे सामने आया है। आज सुबह 11 बजे सरायपाली से सारंगढ़ आये जनपद सदस्यो मे से श्रीमती रजनी पटेल के
साथ प्रस्तावक और सर्मथक जनपद पंचायत सारंगढ़ पहुंचकर अध्यक्ष का फार्म लिये उसी समय भाजपा कैंप मे बगावत करके ममता सिंह ठाकुर जनपद कार्यालय पहुंची और कांग्रेस के सहयोग से अध्यक्ष पद का फार्म भरा। ममता सिंह के जनपद पंचायत पहुंचने और उनको कांग्रेस के नेताओ द्वारा संरक्षण देने की घटना एका-एक नही हुई है बल्कि सुनियोजित तरीके से दो दिन पूर्व से तैयार पटकथा के अनुसार जनपद पंचायत पर कांग्रेस के सहयोग से कब्जा करने की रणनिति के तहत हुई।
बताया जा रहा है कि अध्यक्ष पद के लिये कुल तीन फार्म भरे गये जिसमें रजनी पटेल, ममता ठाकुर और राजकुमारी नेताम का नाम था। बाद में राजकुमारी नेताम ने अपना नाम वापस ले लिया। वही मतदान में भाजपा से बगावत कर कांग्रेस कैंप में शामिल होने वाली ममता सिंह ठाकुर ने श्रीमती रजनी चोखलाल पटेल को 15-10 के अंतर से पराजित कर जनपद पंचायत सारंगढ़ के अध्यक्ष पद पर कब्जा करने मे सफलता प्राप्त किया। वही उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस से राजकुमारी चंद्रकुमार नेताम ने भाजपा के हेमा विश्वानाथ बसंत को 14-11 के अंतर से हराकर उपाध्यक्ष पद पर भी कब्जा किया। इस प्रकार से बहुमत का आंकड़ा रखने के बाद भी भाजपा को सिर्फ 10 व्होट मिले और भाजपा से बगावत करके अध्यक्ष का चुनाव लड़ने वाली श्रीमती ममता सिंह ठाकुर कांग्रेस के सहयोग से जनपद पंचायत के अध्यक्ष बनी।
मनोज की पर्दे के पीछे मुख्य भूमिका?
सारंगढ़ जनपद पंचायत के चुनाव मे पर्दे के पीछे रणनिति बनाने और भाजपा की टीम को बगावत कराकर कांग्रेस के सहयोग से जनपद पंचायत पर अध्यक्ष बनाने मे मनोज की भूमिका शानदार रही। मनोज ने ही फायनेंस का काम सम्हाल रखा था और भाजपा के द्वारा अधिकृत नही करने पर कांग्रेस से डील कर लिया था कि उनके सहयोग से भाजपा का बागी को अध्यक्ष बनाया जाये। पर्दे के पीछे बड़े रोल मे रहने वाले मनोज ने ही पूरे स्क्रीप्ट को लिखकर अंजाम तक पहुंचाया और भाजपा के एक बड़े नेता के संरक्षण और आर्शीवाद से भाजपा में बगावत कराकर कांग्रेस को आज खुशी मनाने का अवसर दे दिया। मनोज के कुशल रणनिति के सामने भाजपा फेल दिखी। मनोज के साथ भाजपा के ही कई पदाधिकारियो ने खुलकर दिया जिससे साफ पता चल रहा है कि भाजपा में बगावत की आग और किसी ने नही बल्कि भाजपा के पदाधिकारी और नेताओ ने ही लगाई है।
तीन जनपद सदस्यो ने किया क्रास वोटिंग?
सारंगढ़ जनपद पंचायत के अध्यक्ष पद के लिये ममता सिंह के बगावत करने के बाद भी भाजपा के रणनितिकार निश्चिंत थे कि उनका अध्यक्ष बनेगा। ममता सिंह के जाने से शेष बचे 13 सदस्यो को लेकर भाजपाई आश्वस्त थे। किन्तु उनको इस बात का अंदाजा नही था कि उनके कैंप में सेंधमारी हो चुका है और ममता सिंह के साथ एक-दो नही बल्कि पूरे तीन जनपद सदस्य कांग्रेस के साथ मिलकर
जनपद अध्यक्ष के पद के लिये साथ दे रहे है। जब परिणाम सामने आया तब भाजपा नेताओ को सांप सूंघ गया। भाजपा मे बगावत करने के लिये भाजपा के लिये चार बड़े पदाधिकारियो और चेहरे के नाम सामने आ रहे है जो कि भाजपा के साथ मे रहकर भाजपा के लिये गड्ढ़ा खोद दिये। 15 साल बाद जनपद पर कब्जा के भाजपा की उम्मीद पर पानी फिरा? सारंगढ़ जनपद पंचायत में सदैव सांठगांठ की राजनिति चलती है। यहा पर भाजपा और कांग्रेस के बीच होने वाली समझौते से ही जनपद पंचायत मे बड़ा बदलाव होता है। जनपद पंचायत के राजनिति को करीब से जानने वाले पहले से बता चुके थे कि कुछ वर्षो पूर्व की भांति कांग्रेस कम सदस्य होने के बाद
भी इंतजार करेगें कि भाजपा मे बगावत हो और बगावत करने वाले को सर्मथन देकर कांग्रेस अपने सर्मथन से अध्यक्ष बनाकर अपनी साख को बचा सकती है। किन्तु भाजपा के जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल और पार्टी पदाधिकारी पूरी तरह से फेलवर साबित हुए और जनपद पंचायत सदस्य के बहुमत होने के बाद भी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष की कुर्सी गवां बैठे।
खुलकर गुड़ागर्दी-खुलकर हंगामा.. मूकदर्शक पुलिस और प्रशासन?
सारंगढ़ जनपद पंचायत के चुनाव में जमकर हाथापाई और हंगामा हुआ। पुलिस की लचर व्यवस्था होने के कारण से गाली-गुप्तार और मारपीट की घटना आम बात थी। भाजपा के जनपद सदस्यो को लेकर आ रहे काफिला को रोककर गाड़ी मे तोड़फोड़ करने और मारपीट करने के मामले में आधा दर्जन लोगो के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हुई है। जनपद पंचायत पर कब्जे के लिये जिस प्रकार से गुड़ागर्दी और हंगामा हो रहा था उससे किसी को भी जान से मारा जा सकता था। पुलिस की अत्यंत लचर व्यवस्था के कारण से माहौल बेहद खतरनाक हो गया था और कभी भी अप्रिय घटना घट सकती थी। जिला मुख्यालय में जिस प्रकार से हंगामा और मारपीट के साथ गाड़ियो मे तोड़फोड़ किया गया उससे पुलिस के व्यवस्था पर सवालियो निशान खड़ा हो रहा है। सलवा जुडूम की राजनिति में भाजपा की फिर करारी पराजय जनपद पंचायत सारंगढ़ के चुनाव में भाजपा के साथ खेला हो गया है और भाजपा के कार्यकर्ता अपने नेतृत्व से ठगा महसूस कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव की तर्ज पर एक बार फिर सलवा जुडूम और सेटिंग की राजनीति के सामने पूरे जिले में जादू चलाने वाले ओपी चौधरी और जिला भाजपा नेतृत्व को भी नतमस्तक कर दिया है। प्रदेश और पूरे जिले में सारंगढ़ जनपद चुनाव में बीजेपी पूरी तरह से धराशाही नजर आई है। प्राप्त सूत्रों के अनुसार कांग्रेस के पास जहां मात्र 11 जनपद सदस्य थे वहीं बीजेपी जादुई आंकड़े 14 के साथ सैर में निकली बीजेपी जनपद सरकार बनाने का दो अध्यक्ष दावेदार के टॉप के पर्ची के साथ मंदिर में संकल्प ले चुकी थी। एकाएक भाजपा के बागी उम्मीदवार के "यू टर्न" ने बीजेपी का पूरा समीकरण बिगाड़ कर रख दिया और बीजेपी को अंतिम समय में बाय-बाय कहते हुए फिल्मी स्टाइल में श्रीमती ममता राजू सिंह ठाकुर अपने तीन जनपद सदस्यों के साथ जनपद पहुंचकर अध्यक्ष का फॉर्म भर सब को चौंका दिया और कांग्रेस के 11 वोटो के साथ कांग्रेस से 15 मत पाकर अध्यक्ष निर्वाचित हुई और भाजपा समर्थित प्रत्याशी श्रीमती रजनी चोखलाल पटेल को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी।
संजय और अजेश की मनमानी रही हार का कारण?
सारंगढ़ जनपद पंचायत के चुनाव में भाजपा में हुई बगावत और करारी हार के पीछे संजय औश्र अजेश की मनमानी को बताया जा रहा है। सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार 25 फरवरी को भाजपा के जिला कार्यालय से दो जनपद सदस्य को अपने साथ रखकर अध्यक्ष पद के लिये उनक अनुसार चलने की सलाह के बाद से ही भाजपाई जनपद सदस्यो मे अनुशासन खत्म हो गया और सभी मनमानी पर उतारू हो गये। हालांकि प्रभारी मंत्री से मिले डांट के बाद दोनो जनपद सदस्य को संजय और अजेश ने भाजपा कैंप मे वापस भेज दिया लेकिन उनके अनुसार नही तो भाजपा की नही बनने देगें कि धमकी का असर अन्य सदस्यो पर साफ देखने को मिला और अन्य सदस्य भी वैसा अनुसरण करने लगे। ऐसे मे भाजपा को डूबाने में संजय और अजेश का हाथ मुख्य रूप से दिख रहा है। निकला जुलूस, मनाया जश्न, जमकर थिरके कांग्रेसी सारंगढ जनपद पंचायत पर कब्जा करने के बाद कांग्रेस नेताओ ने जमकर जश्न मनाया और विजयी रैली
निकालकर शहर में जमकर आतिशबाजी किया। जनपद पंचायत के नवनिर्वाचित अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के साथ विधायक उत्तरी जांगड़े और कांग्रेस नेत्री खुली जीप मे सवार होकर आभार प्रकट कर रहे थे। जगह- जगह पर विजय रैली का अभिनंदन किया जा रहा था। गुलाल और आतिशबाजी से पूरा शहर गुंजमान हो गया था। डीजे के धुन पर थिरकते कांग्रेसी नेताओ ने जीत का शानदार जश्न मनाया।