
बेटी जिंदा है… फिर भी पिता ने किया उसका पिंडदान, मुस्लिम युवक से विवाह के बाद परिवार ने तोड़ा रिश्ता…..

जगदलपुर। सोचिए… जिस बेटी को एक पिता ने जन्म दिया, पाला-पोसा और बड़ा किया, उसकी मौत के बाद नहीं, बल्कि उसके जिंदा रहते हुए पिंडदान कर दे। जगदलपुर में सामने आई यह घटना इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि पिंडदान करने वाले पिता के मुताबिक उनकी बेटी ने ऐसा फैसला लिया, जिसके बाद उन्होंने उसे अपने जीवन से पूरी तरह से अलग करने का फैसला कर लिया।
कहानी शुरू होती है जगदलपुर के धरमपुरा क्रमांक-3 से। यहां रहने वाले सुजान दत्ता की बेटी सिमरन दत्ता ने कुछ दिन पहले एक मुस्लिम युवक से प्रेमविवाह किया, इसके बाद उसने धर्म परिवर्तन भी कर लिया। परिवार की ओर से बताया गया कि सिमरन को इस फैसले से रोकने और समझाने की कोशिश की गई। न केवल परिवार, बल्कि समाज के लोगों ने भी उसे समझाया, लेकिन सिमरन अपने फैसले पर अडिग रही।

इसके बाद घर का माहौल ऐसा बदला कि जिस घर में बेटी की खुशियों और भविष्य की बातें होनी थीं, उसी घर में पिता ने अपनी जीवित बेटी के लिए पिंडदान की रस्म पूरी करने का फैसला कर लिया। सुजान दत्ता ने पहले अपना सिर मुंडवाया, फिर घर पर पंडितों को बुलाया गया। मंत्रोच्चार के बीच पूरे विधि-विधान से पिंडदान की रस्म पूरी की गई। पिता ने इसके साथ ही सार्वजनिक तौर पर ऐलान किया कि अब उनका अपनी बेटी से आजीवन कोई संबंध नहीं रहेगा। इस फैसले से जुड़ा उन्होंने एक घोषणा पत्र भी सार्वजनिक किया है, जिसमें बेटी से संबंध विच्छेद करने की बात कही गई है। परिवार की ओर से इस पूरे मामले को ‘लव जिहाद’ से जोड़कर भी आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, यह परिवार का आरोप है और उपलब्ध जानकारी में इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सामाजिक सदस्यों ने दी सांत्वना
घटना सामने आने के बाद निखिल भारत बंगाली समन्वय समिति, बस्तर संभाग के अध्यक्ष जीवानंद हालदार समेत समिति के अन्य पदाधिकारी सुजान दत्ता के घर पहुंचे। उन्होंने परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी। जगदलपुर की यह घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि प्रेमविवाह, धर्म परिवर्तन और परिवार की सामाजिक मान्यताओं के बीच पैदा हुए उस टकराव को भी सामने रखती है, जिस पर अब इलाके में चर्चा हो रही है।



