
रायपुर।
राहुल गांधी की मोदी को चुनौती के बीच विजय शर्मा का पलटवार, नक्सलवाद पर बहस के लिए ललकारा, बोले- किसी भी मंच पर आ जाइए
रायपुर। देश और प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बीच खुली बहस और एक-दूसरे को चुनौती देने का सिलसिला तेज होता नजर आ रहा है। राजनीतिक बयानबाजी अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि नेता सार्वजनिक मंच पर आमने-सामने बैठकर मुद्दों पर चर्चा करने की चुनौती भी देने लगे हैं। इसी कड़ी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के बीच राजनीतिक बहस का नया मुद्दा सामने आया है।
दरअसल, राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी ताकतों से कथित संबंधों और विपक्ष पर लगाए जा रहे देशद्रोह के आरोपों को लेकर सार्वजनिक बहस की चुनौती दी थी। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री विपक्ष को देशद्रोही बताते हैं, इसलिए उन्हें सामने आकर स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर देशद्रोही कौन है और विदेशी ताकतों से संबंध किसके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री को किसी भी मंच और किसी भी स्थान पर बहस के लिए आमंत्रित किया। राहुल गांधी ने यहां तक कहा कि बहस में मीडिया और देश के युवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि देश के सामने सभी सवालों पर खुलकर चर्चा हो सके।
राहुल गांधी ने 3 नवंबर को एक बार फिर वीडियो संदेश जारी कर अपनी चुनौती दोहराई। उन्होंने कहा कि चुनौती दिए हुए 24 घंटे हो चुके हैं और प्रधानमंत्री को बहस के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने बहस के निर्णायक के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम भी सुझाया।
राहुल की चुनौती के बीच विजय शर्मा ने नक्सलवाद पर छेड़ी बहस
राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री को चुनौती दिए जाने के बीच छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नक्सलवाद के मुद्दे पर राहुल गांधी को ही सार्वजनिक बहस की चुनौती दी है। शर्मा ने कहा कि वह नक्सलवाद जैसे गंभीर विषय पर राहुल गांधी के साथ किसी भी जगह, किसी भी प्लेटफॉर्म और किसी भी समय बहस करने के लिए तैयार हैं।
विजय शर्मा ने कांग्रेस की नक्सलवाद को लेकर भूमिका और उसके नेताओं के बयानों पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के कुछ नेता नक्सलियों को अपना हीरो बताते हैं। उन्होंने इस संदर्भ में झीरम घाटी की घटना का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जिस नक्सली हिंसा में कांग्रेस के ही कई वरिष्ठ नेताओं की जान चली गई थी, उस हिंसक विचारधारा से जुड़े लोगों को महिमामंडित करने वाले बयानों पर राहुल गांधी का क्या रुख है?
उन्होंने राहुल गांधी से सवाल किया कि क्या वे नक्सलवाद के मुद्दे पर सार्वजनिक मंच पर बहस करने का साहस दिखाएंगे? शर्मा की चुनौती का मूल सवाल यह है कि कांग्रेस की नक्सलवाद को लेकर वास्तविक नीति क्या रही है और हिंसा के खिलाफ उसकी राजनीतिक तथा वैचारिक स्थिति क्या है?
झीरम घाटी से लेकर नक्सलवाद की नीति तक उठे सवाल
छत्तीसगढ़ की राजनीति में नक्सलवाद का मुद्दा लंबे समय से बेहद संवेदनशील रहा है। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं सहित अनेक लोगों की जान गई थी। इस घटना ने पूरे प्रदेश की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को गहरे स्तर पर प्रभावित किया था।
ऐसे में विजय शर्मा द्वारा झीरम घाटी की घटना का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी से सवाल करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उनका सवाल कांग्रेस की नक्सलवाद संबंधी नीति, नक्सली हिंसा के प्रति राजनीतिक दृष्टिकोण और पार्टी के कुछ नेताओं के कथित बयानों को लेकर है।
गौरतलब है कि विजय शर्मा प्रदेश के गृह विभाग की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई, सुरक्षा बलों की भूमिका, प्रभावित क्षेत्रों में विकास और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास जैसे विषय उनके विभाग से सीधे जुड़े हुए हैं। वे पहले भी नक्सलवाद को लेकर कांग्रेस की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
अब राहुल गांधी के सामने दो राजनीतिक सवाल
राहुल गांधी की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदेशी संबंधों और देशद्रोह के आरोपों पर बहस की चुनौती दी गई है, वहीं विजय शर्मा ने नक्सलवाद के मुद्दे पर राहुल गांधी को सामने आने का आमंत्रण दिया है। इस तरह राजनीतिक बहस के केंद्र में दो अलग-अलग लेकिन राष्ट्रीय महत्व के विषय आ गए हैं।
एक ओर राहुल गांधी प्रधानमंत्री से विदेशी ताकतों से कथित संबंधों और विपक्ष को देशद्रोही कहे जाने के आरोपों पर जवाब चाहते हैं, तो दूसरी ओर विजय शर्मा कांग्रेस नेतृत्व से नक्सलवाद पर उसकी नीति और झीरम घाटी जैसी घटनाओं के संदर्भ में राजनीतिक जवाब मांग रहे हैं।
फिलहाल इन चुनौतियों को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। अब देखना होगा कि सार्वजनिक बहस की चुनौती देने वाले नेता वास्तव में आमने-सामने बैठकर इन गंभीर मुद्दों पर चर्चा के लिए आगे आते हैं या फिर यह मामला भी राजनीतिक बयानबाजी तक ही सीमित रह जाता है।



