
छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 26 साल बाद भी सारंगढ़
अंचल अपनी पहचान बनाने के लिये तरस रहा?
छत्तीसगढ़ बनने के बाद सारंगढ़ लोकसभा खत्म?
सरिया विधानसभा का हो गया खात्मा?
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला बना लेकिन सुविधा शून्य,
पर्यटन क्षेत्र में उपलब्धी जीरो फीसदी,
सड़को की हालत बद से बदत्तर,
सिंचाई के क्षेत्र में अंचल आज भी उपेक्षित,
उच्च शिक्षा और तकनिकी शिक्षा से क्षेत्र महरूम?
ब्लाक स्तर के महकमे से चल रहा है जिला स्तर के कार्यालय,
1998 को रेल लाईन का प्रस्ताव आज भी कागजो पर,
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
छत्तीसगढ़ राज्य का गठन हुए 26 बरस पूरा हो गया किन्तु राज्य के निमार्ण के समय सारंगढ़ अंचल को विकास का जो सपना दिखाया गया था वह आज भी सपना के रूप मे ही दर्ज है। 2022 में सारंगढ़ को जिला बना दिया गया है किन्तु स्थिति आज भी ब्लाक स्तर की है। नाम मात्र का जिला बना हुआ है। भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, दलाली प्रथा,
मनमानी निर्णय से सारंगढ़ अंचल आज भी दलालो के चुंगल में फंसा हुआ है। विकास कार्यो के नाम पर कमीशनखोरी के कारण से सार्वभौमिक विकास के स्थान पर भ्रष्टाचारी विकास को प्राथमिकता दिया जा रहा है। जिसके कारण से क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओ को लेकर कोई आवाज उठाने वाला नही है। 1998 में रेल बजट में शामिल रायपुर-
सारंगढ़-झारसुगड़ा रेल लाईन की फाईल बंद होने के कागार पर है, सिंचाई के नये परियोजनाओ मे सारंगढ़ का नाम नही है, तकनिकी और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धी शून्य है, सड़को ही हालत बद से बदत्तर है तो नये राज्य छत्तीसगढ़ के स्थापना दिवस पर यह सवाल तो जरूर पूछा जाना चाहिये कि नये राज्य का गठन क्या सिर्फ रायपुर,बिलासपुर, दुर्ग आदि शहरो के लिये ही है? आखिर क्यों सारंगढ़ को उपेक्षित रखा गया है? अगर ऐसा ही रखना था तो मध्यप्रदेश क्या बुरा था?
1 नवंबर 2000 को जब छत्तीसगढ़ राज्य का गठन किया गया तब सांरगढ़ अंचल को सपना दिखाया गया था कि नये राज्य का गठन होने के बाद सारंगढ अंचल भी विकास की दौड़ में रहेगा और सांरगढ़ अंचल को भी पर्याप्त विकास किया जायेगा, किन्तु निमार्ण के 26 बरस पूरा होने के बाद एक समीक्षा तो बनती है कि सारंगढ़ अंचल क्या सचमुच विकास किया? प्रारंभिक रूप से ही इसका जवाब आयेगा नही!! सारंगढ़ को छत्तीसगढ़ बनने के बाद नुकसान ही हुआ है फायदा कुछ भी नही हुआ है। छत्तीसगढ़ बनने के बाद 1977 से अस्तित्व में आया सारंगढ़ लोकसभा को
परिसीमन मे खत्म कर दिया गया, सारंगढ़ क्षेत्र का पावरफुल विधानसभा क्षेत्र सरिया को विलोपित कर दिया गया,2005 के परिसीमन समिति के निर्णय के खिलाफ कोई आवाज उठा? जवाब आयेगा नही? 1998 में रायपुर- बलौदाबाजार-सारंगढ़ रेल लाईन रेल बजट में शामिल किया गया था और 28 बरस बाद भी फाईलो से बाहर नही आ पाया? इसको लेकर कोई आवाज उठा जवाब आयेगा नही? आखिर बड़े-बड़े परियोजनाओ में सारंगढ़ को शामिल क्यो नही किया जाता है और जिसमे शामिल किया जाता है वह परियोजना अटक क्यो जाती है? यह परियोजना
धरातल पर क्यो नही आ पाती है। 2016 में रायगढ़-सारंगढ़-सराईपाली के लिये 498 करोड़ रूपये की नेशनल हाईवे 216 योजना लाई गई। आज 11 वर्ष के बाद भी पचास फीसदी काम पूरा नही हो पाया है। सरायपाली रोड़ बन ही नही पाया है और रायगढ़ रोड़ पूरी तरह से उखड़ना शुरू हो गया है। सारंगढ़-बिलासपुर रोड़ बद से बदहाल है, अन्य रोड़ की स्थिति में बहुत अच्छी नही है। सड़को के मामले में सारंगढ़ पूरे प्रदेश मे सर्वाधिक बदहाल है। वही तकनिकी शिक्षा, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सारंगढ़ अंचल को क्या मिला? 1983 से संचालित शासकीय महाविद्यालय आज भी
स्नातक महाविद्यालय तक सिमित है यह आज भी स्नाकोत्तर महाविद्यालय नही बन पाया है। बरमकेला और सरिया में शासकीय महाविद्यालय खुला है तथा सारंगढ़ में महिला कालेज खुला है किन्तु तकनिकी शिक्षा के क्षेत्र में सारंगढ़ अंचल शून्य बटा सन्नाटा है। 2022 में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का गठन छत्तीसगढ़ के स्थापना का सबसे बड़ा उपलब्धी है इसके अलावा बाकि सेक्टर शून्य है। सारंगढ़ नगर पालिका को डिमोशन करके मध्यप्रदेश के समय नगर पंचायत कर दिया गया था उसे फिर से उन्नय कर 2016 में नगर पालिका बना दिया गया। सरसीवां ग्राम पंचायत,
पवनी ग्राम पंचायत को नगर पंचायत बनाया गया किन्तु कोसीर आज भी ग्राम पंचायत तक समिति है। नये ब्लाको को गठन पूरे प्रदेश मे आज तक नही हो पाया है जिसके कारण से सरिया और कोसीर-उलखर ब्लाक को गठन लंबित ही पड़ा हुआ है। पर्यटन के क्षेत्र में प्राकृतिक सौदर्य के मंत्रमुग्ध करने वाला स्थान सारंगढ़ में भरा पड़ा है गोमर्डा अभ्यारण्य, केड़ार बांध, किंकारी बांध, आमाकोनी बांध, माडोसिल्ली झरना, खपान, मकरी झरना, टमटोरा का प्राकृतिक वातावरण सहित ऐसे-ऐसे स्थान यहा पर उपलब्ध है कि पूरे प्रदेश में सारंगढ़ को अलग नाम फैल सकता था
किन्तु उपेक्षा का ऐसा शिकार सारंगढ़ को किया गया कि सारंगढ़ के ऐतिहासिक पर्यटन स्थल लोकल पिकनिक पार्टी तक ही समिति है। बांधो मे स्पोर्टस एक्टिविटी शुरू किया जा सकता था किन्तु उस दिशा में प्रयास शून्य है। धार्मिक आस्था का केन्द्र के रूप में सम्लेश्वरी मंदिर, काली मंदिर, नाथलदाई मंदिर, कौश्लेश्वरी मंदिर स्थित है किन्तु धार्मिक
केन्द्रो को भी विकसित नही किया गया। श्रद्धालुओऔर पर्यटको की सुविधाओ को लेकर कोई प्रयास नही किया गया। जिले मे महानदी पर 4 बैराज बन गये है इन बैराजो से किसानो के लिये लिफ्ट एरिगेशन से पानी आपूर्ति करके सिंचाई की सुविधा बढ़ाई जानी थी किन्तु ऐसा कोई भी कार्य नही किया गया जिसके कारण से बैराज बनने के बाद भी सिंचाई सुविधा का लाभ सारंगढ़ अंचल को नही मिल रहा है। यहा पर भी स्पोर्टस एक्टिविटी को बढ़ावा दिया जा सकता था किन्तु प्रारंभ ही नही किया गया है।
सारंगढ़-बिलाईगढ जिला ही एक बड़ी उपलब्धी?
छत्तीसगढ़ बनने के बाद सारंगढ़ लोकसभा और सरिया विधानसभा का विलोपन क्षेत्र के आवाज के लिये एक बड़ी झटका के रूप मे सामने आया और क्षेत्र की आवाज दिल्ली में और राजधानी में काफी कमजोर पड़ गया। जिसका परिणामस्वरूप प्रदेश में बनने वाले नये जिले में सारंगढ़ अपना नाम को लेकर तरसता रहा और 2022 को वह शुभ
मूहर्त आया जब सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला अस्तित्व में आ गया। किन्तु जिला बनने के 4 बरस बाद भी नाम मात्र का जिला और ब्लाक स्तर के महकमें से जिला का संचालन होने से सारंगढ़वासियो को आज तक जिला का वह लाभ नही मिला जिसका इंतजार क्षेत्रवासी कर रहे है। स्वास्थ के क्षेत्र में जिला अस्पताल अस्तित्व में आ गया है तथा नये डाक्टरो की पदस्थापना हो रही है किन्तु नये भवन और विशाल सेटअप का इंतजार आज भी क्षेत्रवासी कर रहे है।



