जिला- सारंगढ़ बिलाईगढ़

उड़ीसा के निवासी का बोंदा में कोटवार पद पर नियुक्ति? सरिया तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने दिया आदेश,

उड़ीसा के निवासी का बोंदा में कोटवार पद पर नियुक्ति? सरिया तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने दिया आदेश,

उड़ीसा के निवासी का बोंदा में कोटवार पद पर नियुक्ति? सरिया तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने दिया आदेश,

बोंदा में ना तो घर, ना तो जमीन और ना ही मतदाता सूची में नाम,
आधार कार्ड उड़ीसा के बरगढ़ जिले के खरसाल गांव का?
उनको बना दिया गया ग्राम कोटवार,

ग्राम पंचायत बोंदा ने ग्रामसभा में जानकारी दिया था कि डाक्टर बाघ ग्राम पंचायत बोंदा का निवासी नही
है?

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला के सरिया तहसील में ग्राम पंचायत बोंदा में कोटवार नियुक्ति में छत्तीसगढ़ के निवासियो को छोड़कर उड़ीसा के निवासी डाक्टर बाघ को नियुक्ति देने का मामला प्रकाश में आया है। जिसे गांव का कोटवार बनाया गया है उसका नाम ग्राम पंचायत के मतदाता सूची में नही है और ना ही उसके नाम पर जमीन-मकान आदि है और ना ही उसका आधार कार्ड छत्तीसगढ़ का है। ऐसे में उड़ीसा के बरगढ़ जिला के खरसल ग्राम के निवासी डाक्टर बाघ को ग्राम बोंदा में कोटवार नियुक्त कर सरिया तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू ने नियमो की धज्जियां उड़ा दिया है।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार ग्राम बोंदा में बिलाल कुर्रे कोटवार पद पर कार्यरत था जिसे शासकीय भूमि खसरा नंबर 114, रकबा 0.202 हेक्टेयर में 30-40 फीट गडढ़ा पाये जाने पर अवैध खनन कराये जाने के आरोप में कोटवार बिलाल कुर्रे को 19 मार्च 2025 को पहले निलंबित किया गया फिर 7 नवंबर 2025 को सेवा से पदमुक्त कर दिया गया तथा बोंदा के कोटवार पद को रिक्त घोषित
कर दिया गया। इस रिक्त पद पर कोटवार नियुक्त करने के लिये आवेदन आमंत्रित किया गया जिसमे लगभग 15 लोगो ने आवेदन प्रस्तुत किया था जिसमे ग्राम पंचायत बोंदा ने ग्रामसभा आयोजित करते हुए कोटवार के आवेदनो की जानकारी के साथ एक नाम को प्रस्तावित किया तथा सरिया तहसीलदार के पास प्रस्ताव भी प्रेषित किया इसी प्रस्ताव में जानकारी दिया था कि आवेदक डाक्टर बाघ ग्राम पंचायत का निवासी नही है उनके द्वारा भी आवेदन दिया गया है। किन्तु सरिया तहसीलदार के द्वारा जब कोटवार की
नियुक्ति किया गया तो उसी डाक्टर बाघ को ग्राम बोंदा का कोटवार नियुक्ति किया गया है जो कि ग्राम पंचायत का निवासी ही नही है।

वही ग्राम बोंदा के कई ग्रामीणो ने बताया कि उक्त कोटवार डाक्टर बाघ उड़ीसा के बरगढ़ जिला के खरसाल गांव का रहने वाला है तथा ग्राम पंचायत बोंदा मे उनके नाम पर एक डिसमिल भूमि तक नही है, मकान भी नही है, मतदाता सूची मे नाम भी नही है और आधार कार्ड उड़ीसा का बना हुआ है। ऐसे मे आखिर डाक्टर बाघ की नियुक्ति बतौर कोटवार कैसे किया गया? बताया जा रहा है कि जो आवेदक छत्तीसगढ़ का निवासी नही है और संबंधित ग्राम पंचायत बोंदा ने बकायदा प्रस्ताव में इस बात का जिक्र किया है कि आवेदक डाक्टर बाघ इस ग्राम पंचायत का निवासी नही है। तब भी उसकी नियुक्ति सरिया तहसीलदार कोमल प्रसाद साहू के मनमानी को दर्शा रहा है। ग्राम पंचायत बोंदा के आपत्ति के बाद कम से कम आवेदक डाक्टर बाघ के निवास प्रमाण पत्र, मतदाता सूची, आधार कार्ड आदि का जांच करने के उपरांत ही कोटवार के पद पर नियुक्ति दिया जाना था किन्तु ऐसा नही किया गया और नियुक्ति पत्र में भी डाक्टर बाघ के निवास संबंधी कोई जानकारी नही लिखा गया है। ऐसे मे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में कोटवार की नियुक्ति उड़ीसा के निवासी का होने पर साख पर बट्‌टा लग रहा है।

माफिया हावी है सरिया तहसील कार्यालय में?

इस संबंध में सूत्रा ने बताया कि जिस भूमि पर अवैध खनन का आरोप लगाकर कोटवार बिलाल कुर्रे को पद से हटाया गया उस भूमि पर फ्लाईएश का भराव करने के लिये अड़ानी पावर कंपनी छोटे भंड़ार के कुछ ट्रांसपोर्टरो की नजर थी। तथा उन्होने कोटवार बिलाल कुर्रे को फ्लाईएश के लिये एनओसी की मांग की थी। शासकीय भूमि होने तथा उसके अधिपत्य मे आने के पूर्व ही खनन होने संबंधी बाते रखते हुए एनओसी के लिये मना करना कोटवार बिलाल कुर्रे को भारी पड़ गया तथा सरिया तहसील मे अपनी ऊंची पहुंच दिखा
कर कोटवार बिलाल कुर्रे को अवैध खनन के नाम पर कोटवार पद से ट्रांसपोर्टरो ने पहले पद से निलंबित करा दिया फिर पद से बर्खास्त करा दिया। सूत्रो का दावा है कि कोटवार बिलाल कुर्रे के पद से बर्खास्त होने के बाद उड़ीसा के निवासी को ट्रांसपोर्टरो ने कोटवार नियुक्त कराया और फिर जोतपुर के शासकीय भूमि खसरा नंबर 114, रकबा-0.202 हेक्टेयर के लिये 30 हजार मिट्रिक टन फ्लाईएश भराव की विधिवत अनुमति लेकर धड़ल्ले से सरकारी भूमि पर फ्लाईएश भरकर अपना विकास कर लिया। अब नियमो और
कानून की लगातार सरिया क्षेत्र मे धज्जियां उड़ रही है फिर भी तहसीलदार के कानो मे जूं तक नही रेंग रही है। ग्राम पंचायत बोंदा के कोटवार नियुक्ति संबंधी प्रकि्या का सूक्ष्म जांच होने पर सारी बाते खुलकर सामने आ जायेगी और उड़ीसा निवासी डाक्टर बाघ की नियुक्ति का भी भांड़ाफोड़ हो जायेगा।

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