सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला : आज चार बरस पूर्ण कर पांचवे बरस में कर रहा है प्रवेश,
जिस उम्मीद से जिला बना उस उम्मीद से विकास नही?
3 सितंबर 2022 को हुआ था सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का शुभारंभ
भले ही वो हक नही मिला जिसका हकदार है सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला,
वर्षो से उपेक्षित रहा सारंगढ़ अंचल को जिला बनने के बाद भी रखा जा रहा है विकास से दूर,
दर्जन भर से अधिक सरकारी विभाग आज भी नही खुल पाये सारंगढ़ में,
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़ को जिला बनाये जाने की वर्षो पुरानी मांग को 3 सितंबर 2022 को पूरा किया गया जब तात्कालिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का शुभारंभ किया था। वर्षो पुराने सपने के साकार होते देख सारंगढ़वासी खुशी से फूले नही समा रहे थे किन्तु जिला बनने के चार बरस के बाद भी सारंगढ़ जिला अधूरा जिला बना हुआ है। दर्जन भर से अधिक सरकारी कार्यालय आज भी अस्तित्व में नही आये है। जिसके कारण से रायगढ़ और बलौदाबाजार पर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला निर्भर है। बड़े जोर-शोर से 3 सिंतबर 2022 को सारंगढ़-बिलाईगढ़
जिला का शुभारंभ हुआ था किन्तु चार बरस के सफर में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला आज भी अधूरा जिला है। यहा पर 75 फीसदी से अधिक सरकारी कार्यालय खुल गये है किन्तु बिना सेटअप के नाम मात्र के प्रभारी अधिकारियो के सिर्फ नाम के सरकारी कार्यालय यहा पर संचालित है। 4 बरस के इस सफर में सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला ने उस उम्मीदो का
प्राप्त नही किया जिसकी अपेक्षा जिला बनने के पहले किया गया था। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला सिर्फ नाम मात्र का जिला बनकर रह गया है।
3 सितंबर 2022 को सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का शुभारंभ तात्कालिक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया था। आज सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला ने चार बरस का सफर पूरा कर पांचवे बरस मे प्रवेश कर लिया किन्तु इस
चार बरस के कार्यकाल में क्या सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला जनता की कसौटी पर खरा उतरा है? क्या जिला के 7 लाख से अधिक निवासियो को जिला बनने का वह लाभ मिला है जिसके कारण से सारंगढ़-बिलाईगढ़ को जिला बनाया गया है? ऐसे तमाम प्रश्न है जिसका जवाब फिलहाल नही के रूप में सामने आ रहा है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला के मांग को पूर्ण कराने के लिये जिन लोगो ने आंदोलन किया, जिन लोगो ने प्रयास किया उसमे से अधिकांश इस बात को लेकर दुखी है कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला सिर्फ एक कागजी जिला बना है। यहा पर मूलभूत विकास और आम जनता से जुड़ी समस्याओ के निराकरण और उनकी मांगो को पूर्ण करने के लिये कोई हैंड नही है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला बनाये जाने का उद्देश्य प्रशासन का जनता के पास पहुंचना था किन्तु इन चार बरस मे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला अधूरा जिला के रूप मे ही जाना जा रहा है। आज भी सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला के सारंगढ़ और बरमकेला
ब्लाक के अधिकांश फाईल अपने मातृजिला रायगढ़ के जिला कार्यालयो मे रखाया हुआ है तो बिलाईगढ ब्लाक के सरकारी फाईल बलौदाबाजार जिला मे रखा हुआ है। कई सरकारी कार्यालयो का सेटअप आज भी यहा पर स्वीकृत नही हुआ है। यहा पर बजट के नाम पर सरकार की ओर से कुछ विशेष पैकेज भी नही मिल रहा है। अनुविभागीय स्तर या अन्य विभाग के कामचलाऊ भवनो मे जिला स्तर के सरकारी कार्यालय चल रहे है। जिला स्तरीय विभागो मे आज भी पुराने जिले से ना तो बजट आबंटन हो पाया है और ना ही पूर्ण रूप सेटअप का बंटवारा किया गया है।
स्थिति यह है कि ढ़ाई बरस के बाद यहा पर जिला चिकित्सालय खोला गया किन्तु वह मात्र 30 बिस्तर के सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र को जिला चिकित्सालय का नाम देकर खोला गया। खुदे कलेक्टोरेट कार्यालय आज भी मंगल भवन मे अस्थाई रूप से संचालित है। जबकि एस.पी आफिस शिक्षा विभाग के छात्रावास मे संचालित है। जिला शिक्षा कार्यालय सहित कई जिला स्तरीय सरकारी कार्यालय ब्लाक स्तरीय या अनुविभाग स्तरीय सरकारी कार्यालयो मे सिर्फ नाम मात्र का संचालित है। जिला स्तरीय सरकारी विभागो के लिये ना तो सेटअप दिया गया है और ना ही
बजट का मजबूत आबंटन किया गया है जिसके कारण से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला सिर्फ चल रहा है इसे कोई चला नही रहा है।
अफसरशाही शबाब पऱ
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में सबसे बड़ी कमी लीडरशिप की कमी है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मे विकास का रोड़ मैप बनाने वाले बड़े स्तर के लीडर यहा पर नही है। भाजपा और कांग्रेस दोनो ही दल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला को रिर्जव जिला में रखते है। वर्तमान में पदस्थ प्रशासनीक अधिकारियो की मनमानी से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला के निवासियो को जिला से वह उपलब्धी नही मिला है जिसकी सोच जिला बनने के पहले थी। आज भी पुराने घाघ अधिकारियो और पुराने सरकारी कर्मचारियो से ही सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला चल रहा है। जो अधिकारी-कर्मचारी पहले अनुविभाग या ब्लाक स्तर के बड़े अधिकारी के रूप मे जाने जाते थे वही अब जिला बनने के बाद जिला अधिकारी के
रूप मे जाने जा रहे है। ऐसे मे नये अधिकारियो की पदस्थापना नही होने तथा बरसो पुराने अधिकारी-कर्मचारियो का अंगद के पांव की तरह सारंगढ़ में ही चिपके रहने से सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का वह लाभ जिलेवासियो को नही मिला जिसकी सोच और कल्पना जिला बनने के पहले किया गया था।
सड़के बदहाल, बिजली व्यवस्था बदहाल?
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला बनने के चार बरस पूरा होने के बाद भी जिले के अधिकांश सड़को की हालत बद से बदत्तर है।आवागमन का एक मात्र साधन सड़क मार्ग होने के बाद भी यहा पर आवागमन करना कठिन काम है। वही रेल परियोजना की मांग आज तक अधूरी है। रायगढ़-सारंगढ़-सरायपाली नेशनल हाईवे बद से बदत्तर स्थिति में है।
सरसींवा-भटगांव अंचल की सड़को की भी हालत किसी से छिपी नही है। बिजली व्यवस्था से लोग परेशान है। भ्रष्टाचार पर किसी भी प्रकार का अंकुश नही है। पहले रायगढ़ से अधिकारियो के फटकार से छोटे अधिकारी-कर्मचारी सहमे डरे रहते थे किन्तु जिला बनने के बाद चढ़ावा पद्धति मे और भी बढ़ोत्तरी हो गया है। बिजली व्यवस्था ठप्प है।
सड़क बद से बदत्तर है। जल-जीवन मिशन ने पूरे जिले के सड़को को बदहाल करके रख दिया है। ओव्हरलोड़ वाहनो का सड़को पर हो रहा परिवहन से जिलावासी परेशान है।
अभी भी पूर्ण जिला का स्वरूप नही!
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला आज भी अधूरा जिला के रूप मे विराजमान है। आधा दर्जन से अधिक कार्यालय खुले ही नही है और जो कार्यालय खुले है वह आधा-अधूरा है। बिना सेटअप के सिर्फ कार्यालय खोल दिया गया है। रिकार्ड आज भी पुराने जिला मुख्यालय में है। सरकारी भवन की कमी बनी हुई है कलेक्टोरेट और जिला चिकित्सालय का भवन निमार्णाधीन है। शेष विभागो के भवन निमार्ण के लिये बजट का अभाव है। ऐसे मे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला अपने चार बरस के सफर मे शैशवकाल से उबर नही पाया है। अभी भी उपेक्षा के शिकार है तथा विकास से कोसो दूर
है।
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