
क्रशर में मजदूर की मौत के बाद फूटा गुस्सा! न सुरक्षा, न बीमा… आखिर कब तक यूं ही मरते
रहेंगे मजदूर

बाबा वैद्यनाथ मिनरल्स क्रशर उद्योग में एक श्रमिक की मौत, कलेक्टर से हुई शिकायत
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
साल्हेओना तहसील सरिया स्थित बाबा वैद्यनाथ मिनरल्स क्रेशर उद्योग में एक श्रमिक की मौत नेऔद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत उजागर कर दी है। तेंदूपत्ता संग्राहक और मजदूर रवि विशाल की ड्यूटी के दौरान हुई मौत को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि जिस उद्योग में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी प्रबंधन की थी, वहां न तो पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे और न ही श्रमिकों का दुर्घटना बीमा कराया गया था। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मजदूरों की जिंदगी की कीमत किसके लिए मायने रखती है? मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब यह आरोप सामने आया कि हादसे के बाद वास्तविक तथ्यों को छिपाने का प्रयास किया गया। मंगलवार दोपहर को जनपद सदस्य पूजा संतोष चौहान ने कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में कहा है कि मृतक की मौत कार्य के दौरान क्रेशर की बेल्ट में फंसने या करंट लगने से हुई ? लेकिन प्रबंधन द्वारा परिजनों को गुमराह कर मौत को बीमारी से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यदि यह आरोप सही है तो मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि सच को दबाने का भी बनता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्रेशर उद्योगों में सुरक्षा मानकों की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। श्रमिक घंटों तक जोखिम भरे माहौल में काम करते हैं, लेकिन सुरक्षा उपकरण, आपातकालीनसहायता और दुर्घटना बीमा जैसी बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जातीं। श्रम कानूनों के तहत
श्रमिकों की सुरक्षा और बीमा सुनिश्चित करना अनिवार्य है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नियमों का कितना पालन हो रहा है, यह घटना उसी की एक कड़वी तस्वीर पेश करती है। मजदूर का बीमा तक नहीं कराया सबसे बड़ा सवाल श्रम विभाग की भूमिका पर भी खड़ा हो रहा है। यदि उद्योग में कार्यरत मजदूरों का बीमा नहीं कराया गया था तो निरीक्षण और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले विभाग अब तक क्या कर रहे थे? क्या श्रम कानून केवल फाइलों और सरकारी दस्तावेजों तक सीमित होकर रह गए हैं? एक गरीब0श्रमिक की मौत के बाद उसके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

परिवार ने अपना कमाने वाला सदस्य खो दिया, जबकि उद्योग प्रबंधन और जिम्मेदार विभागों की जवाबदेही अब जांच के घेरे में है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, मृतक परिवार को उचित मुआवजा देने और श्रमिक सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि क्या प्रदेश में श्रमिकों की सुरक्षा3केवल कागजों पर है, या उनकी जिंदगी बचाने के लिए भी कोई जवाबदेह व्यवस्था मौजूद है? यदि समय रहते जवाबदेही तय नहीं हुई, तो ऐसे हादसे भविष्य में भी मजदूर परिवारों की खुशियां छीनते रहेंगे।
मृत श्रमिक की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल
घटना के बाद मृत श्रमिक की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे पूरे मामले को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं। वायरल फोटो में श्रमिक का पूरा शरीर धूल और डस्ट से सना हुआ
खाई दे रहा है। तस्वीरों में उसके मुंह और नाक के पास खून जैसे निशान भी नजर आ रहे हैं। प्रत्यक्ष रूप से ऐसा प्रतीत होता है कि हादसे के दौरान वह सिर के बल डस्ट के ढेर में गिरा और उसका आधा शरीर धूल के भीतर दब गया था। वहीं शरीर के कई हिस्सों पर लाल रंग के चकत्ते और चोट जैसे निशान भी दिखाई दे
रहे हैं। हालांकि इन निशानों और मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि केवल पोस्टमार्टम रिपोर्ट और आधिकारिक जांच के बाद ही हो सकेगी। फिलहाल तस्वीरों के वायरल होने से मामले की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज हो गई है।



