
व्यापारी पर जानलेवा हमले के विरोध में सारंगढ़ रहा अभूतपूर्व बंद, व्यापारियों में भारी आक्रोश

सारंगढ़। कपड़ा व्यवसायी शम्मी केसरवानी पर हुए कथित जानलेवा हमले के विरोध में सोमवार 26 मई को सारंगढ़ नगर अभूतपूर्व रूप से बंद रहा। सुबह 6 बजे से ही नगर के युवा व्यापारी बंद के समर्थन में बाजारों और चौक-चौराहों पर लोगों से सहयोग की अपील करते नजर आए। आम जनता ने भी बंद को खुलकर समर्थन दिया, जिसके चलते शहर के अधिकांश प्रतिष्ठान बंद रहे।
रानी लक्ष्मी बाई कॉम्प्लेक्स स्थित एक कपड़ा दुकान में घुसकर व्यापारी शम्मी केसरवानी के साथ मारपीट और जानलेवा हमला किया गया था। घटना के बाद से ही व्यापारियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। व्यापारियों का आरोप है कि लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाएं कमजोर पुलिसिंग को दर्शाती हैं और अपराधियों के हौसले बुलंद हो चुके हैं। व्यापारी वर्ग का कहना है कि दुकान में घुसकर मारपीट की घटनाएं अब नई परिपाटी बनती जा रही हैं। वहीं कुछ लोगों पर आरोप लगाया जा रहा है कि वे पूरे मामले में दोषियों को बचाने के लिए लगातार सक्रिय हैं। नगर में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है, लेकिन राजनीतिक और व्यक्तिगत संबंधों के कारण पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में कठिनाई आने की बात भी सामने आ रही है।
चैंबर की भूमिका पर उठने सवाल
बंद को लेकर व्यापारियों में जबरदस्त एकजुटता दिखाई दी। विशेष रूप से युवा व्यवसायियों ने पूरे आंदोलन का मोर्चा संभाले रखा। व्यापारियों ने पुलिस की अब तक की कार्रवाई को अपर्याप्त बताते हुए प्रशासन से सख्त कार्रवाई और व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की। सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक दौर में बंद को समर्थन देने वाले चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा बाद में रुख बदलने की चर्चाएं भी नगर में होती रहीं। ऐन मौके पर समर्थन वापस लेने जैसी बातें सामने आने के बाद व्यापारिक संगठन की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। हालांकि इस विषय में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है। पीड़ित व्यापारी शम्मी केसरवानी ने बंद को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी व्यापारी बंधुओं, युवा व्यवसायियों और आम नागरिकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि व्यापारियों की एकजुटता ने कठिन समय में उनका मनोबल बढ़ाया है।
राजनीतिक दलों की भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक दलों की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी रही। बंद के दौरान कुछ चेहरे व्यक्तिगत रिश्तों के आधार पर समर्थन में दिखाई दिए, लेकिन किसी भी बड़े राजनीतिक दल द्वारा आधिकारिक रूप से खुलकर समर्थन नहीं दिया गया। व्यापारियों के बीच इस बात को लेकर नाराजगी देखी गई कि कठिन समय में राजनीतिक दलों द्वारा एक औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति तक जारी नहीं की गई।
नगर के व्यापारियों का कहना है कि यदि युवा व्यवसायी आगे आकर बंद का नेतृत्व नहीं करते, तो कुछ तथाकथित व्यापारी चेहरे अंतिम समय में अपना रुख बदल देते। फिलहाल पूरा मामला नगर में चर्चा का विषय बना हुआ है और व्यापारी वर्ग प्रशासन से निष्पक्ष एवं कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है।
सारंगढ़ बंद को लेकर आधी रात तक चला तमाशा….
सारंगढ़ में व्यापारी के साथ दुकान घुसकर किया गया मारपीट और जान से मारने के प्रयास में व्यापारियों ने सारंगढ़ बंद का आव्हान किया था किंतु बीती रात को इस मामले में जमकर तमाशा चला। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां के चंद व्यापारी नेताओं ने देर शाम थाना पहुंचकर बंद को वापस लेने संबंधी आवेदन पुलिस के आला अधिकारियों के सामने रखकर अपनी चापलूसी को सामने प्रकट कर दिया। अपुष्ट सूत्र बताते है कि चंद बड़े व्यापारियों को सारंगढ़ बंद के मामले में जब पुलिस के आला अधिकारियों ने तलब किया तो उन्होंने बंद वापस लेने का आश्वासन ही नहीं दिया बल्कि लिखित में प्रशासन को पत्र से दिया।

वही देर रात जब मामला गरमाने लगा तो बंद को समर्थन देने संबंधी मैसेज व्हाटसअप ग्रुपों में पोस्ट करवाया। लेकिन आज के बंद के दौरान ऐसे बड़े चेहरे गायब रहे। बड़े व्यापारी जो कि व्यापारी संगठन के मुखिया बनकर प्रशासन की चापलूसी करने में लगे रहते है आज व्यापारी पर हमला के विरोध में हो रहे सारंगढ़ बंद से अपने आपको दूर कर लिए। इससे साफ प्रतीत हो रहा है कि बड़े व्यापारी सिर्फ उसी समय एक्टिव होते है जब उनके बीच के किसी व्यापारी के साथ कुछ हो, अन्यथा बाकी के लिए जयश्री राम बोलकर बड़े मुंडी गायब हो जाते है। वो तो युवा व्यापारियों की टोली पूरी तरह से एक्टिव रही जिसके कारण से बंद न सिर्फ सफल रहा बल्कि ऐतिहासिक रहा।
अन्यथा आधी रात को हुए तमाशा में फिर से चापलूसी की चासनी नजर आ रही थी। जिस प्रकार से आज के बंद के दौरान बड़े व्यापारियों ने आंदोलन से दूरी बनाया उससे साफ है कि व्यापारी नेता के नाम पर सिर्फ अपनी दुकानदारी चमकाने और अवैध धंधे को सरंक्षण देने में कई चेहरे सक्रिय रहते है इनको व्यापारी हित से दूर दूर तक कोई मतलब नहीं रहता है। पीड़ित व्यापारी शम्मी केसरवानी के लिए हुए सारंगढ़ बंद में कई चेहरे बेनकाब हुए, व्यापारी हित की बड़ी बड़ी बात करने वाले चेहरे पूरी तरह से गायब रहे.




