
किसान राईस मिल के पास स्थित शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की जमीन का मामला विधानसभा में गूंजा,

विधायक श्रीमती उत्तरी जांगड़े ने ध्यानाकर्षण में उठाया मुद्दा,
लीपापोती वाली जानकारी देकर मामले में बचने का प्रयास कर
रही है प्रशासन?
सारंगढ़ को रायपुर जिला का हिस्सा बताकर फर्जी प्रतिवेदन से
कर दिया गया रिकार्ड संशोधन?
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़ के किसान राईस मिल के सामने स्थित शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद के भूमि का मामला विधानसभा में ध्यानाकर्षण में गूंजा। विधायक श्रीमती उत्तरी जांगड़े ने इस मामले का उठाकर शासन का ध्यान को आकृष्ठ किया। ध्यानाकर्षण में मामला सामने आने के बाद आनन- फानन में प्रशासन मामले की लीपापोती करने में जुट गया है। 1923-24 से लेकर 2018 तक राजस्व रिकार्ड में शासकीय छोटे झाड़ के जंगल के मद में दर्ज भूमि को आखिर एसडीएम ने रिकार्ड संशोधित कर नजूल भूमि में परिर्वतित करने का आदेश कैसे दे दिया? यह विषय अपने –आप में बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आने वाले दिनो मे करोड़ो रूपये के मूल्य के इस शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि का मामला गंभीर हो सकती है और कई अधिकारियो पर गाज गिर सकती है।
दरसअल सारंगढ़ तहसील का अधिकार अभिलेख 1954-55 में तैयार हुआ था
पटवारी हल्का नंबर 28 (पुराना 20) में खसरा नंबर 224/1 क क्षेत्रफल 4.24 एकड़ आबादी मद में दर्ज किया गया था तथा 224/1 ख क्षेत्रफल 4.23 एकड़ को शासकीय छोटे झाड़ का जंगल और घास भूमि के रूप में दर्ज किया गया था। ग्राम सारंगढ़ में नजूल मेंटनेंस खसरा नं.13/2क्षेत्रफल 6.90 एकड़ डोंगाजी चावल मिल के नाम पर दर्शाया गया है। 1980-81 में सारंगढ़ का खसरा रोस्टर तैयार किया गया जिसमें खसरा नंबर 224/1 क क्षेत्रफल 4.24 एकड़ आबादी मद में दर्ज किया गया था तथा 224/1 ख क्षेत्रफल 4.23 एकड़ को शासकीय छोटे झाड़ का जंगल
और घास भूमि के रूप में दर्ज किया गया था जो कि 2018 तक राजस्व रिकार्ड में इसी नाम से दर्ज था। 2018 में तात्कालिन अनुविभागीय अधिकारी सारंगढ़ के द्वारा रा.प्र.क्र.42/अ-6/2017- 18 द्वारा दिनांक 27 अप्रैल 2018 को खसरा नंबर 224/1 ख क्षेत्रफल 4.23 एकड़ जो कि शासकीय छोटे झाड़ का जंगल और घास भूमि के रूप में दर्ज था उसे विलोपित करने का आदेश पारित किया गया है। जिससे साफ प्रतीत हो रहा है कि अनुविभागीय अधिकारी सारंगढ़ के द्वारा 27 अप्रैल 2018 को पटवारी हल्का नंबर 28 के खसरा नंबर खसरा नंबर 224/1 ख क्षेत्रफल 4.23 एकड़ जो कि शासकीय छोटे झाड़ का जंगल और घास भूमि के रूप में दर्ज था उसे
राजस्व रिकार्ड में विलोपित करने का आदेश दिया है। वही इस मामले को जब विधानसभा में ध्यानाकर्षण के माध्यम से विधायक श्रीमती उत्तरी जांगड़े ने सरकार के संज्ञान मे लाया तथा शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि को नजूल भूमि दर्शाकर राजस्व रिकार्ड से विलोपित करने की बात सरकार के संज्ञान मे लाई तो राजस्व विभाग मे हड़कंप मच गया। किन्तु ध्यानाकर्षण का जवाब देने में नजूल तहसीलदार के द्वारा जमकर लीपापोती किया गया है। उन्होने इस ध्यानाकर्षण के मामले में दिया गया जानकारी में बताया है

कि नगर पालिका परिषद सारंगढ़ प.ह.न. 28 भूमि ख0नं0 224/1/क रकबा 1.716 हे0 आबादी तथा ख0न0 224/1/ख रकबा 1.712 हे० छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि को वर्ष 1954-55 के पूर्व नजूल भूमि घोषित किया गया है। ख0न0 224/1/क एवं 224/1/ख नजूल भूमि है किन्तु पटवारी अभिलेख से अन्य भूमि को मिलान करना एवं चिन्हांकन करने की आवश्यकता होती है अतएव पटवारी अभिलेख से विलोपन नही किया गया है। उक्त खसरा नंबरों से वर्ष 1954-55 में ख०न० 13/2 (नजूल) बना है। वर्ष 1954-55 में ख0न0 13/2 रकबा 6.90 एकड़ डोंगा जी चांवल मिल के नाम पर दर्ज रहा है। (मेंटॅनेस खसरा वर्ष 1954-55 की प्रति अवलोकनार्थ संलग्न है) डोंगा जी द्वारा अपने नाम पर दर्ज ख०न० 13/2 रकबा 6.90 एकड़ मे से रकबा 4.24 एकड़ भूमि को किसान राईस मिल सारंगढ़ के नाम से दिनांक 03.09.1966 को विक्रय किया गया एवं 13/2 (नजूल) मे से रकबा 0.35 एकड़ रूद्र शरण पुजारी को विक्रय किया गया। अनुविभागीय अधिकारी (रा.) सारंगढ़ के रा०प्र०क्र० 42/अ-6/2017-18 पारित आदेश दिनांक 27.04.2018 अनुसार ख0न0 13/4 रकबा 1.50 एकड़ भूमि यशवंत पिता रामकुमार शर्मा के नाम वसीयत से दर्ज पाया गया।

यशवंत पिता रामकुमार शर्मा के नाम पर दर्ज भूमि को ख0न0 13/5 रकबा 784
वर्गफूट उमेश कुमार पिता राम जी वगै., 13/6 रकबा 728 वर्गफूट उमेश कुमार पिता रामजी वगै, 13/7 रकबा 2400 वर्गफूट दिनेश कुमार पिता सावरमल अग्रवाल, 13/9 रकबा 2400 वर्गफूट आशीष कुमार पिता नंदकिशोर अग्रवाल, 13/10 रकबा 1080 वर्गफूट महेन्द्र कुमार पिता सीताराम अग्रवाल, 13/11 रकबा 8480 वर्गफूट विमला देवी पति नंदकिशोर अग्रवाल, 13/12 रकबा 2400 वर्गफूट अमरजीत सिंह अहूजा पिता नरेन्द्र सिंह अहूजा, 13/13 रकबा 2400 वर्गफूट मदन अग्रवाल पिता गुलाबचंद, 13/14 रकबा 2400 वर्गफूट सुभाष नंदे पिता गिरजाशंकर, 13/15 रकबा 8000 वर्गफूट सरिता देवी नंदकिशोर अग्रवाल, 13/16 रकबा 4800 वर्गफूट राजकुमार पित सावरमल अग्रवाल, 13/17 रकबा 1760 वर्गफूट दिनेश पिता जुगतीराम वगै., 13/18 रकबा 1598 वर्गफूट संजय थवाईत पि० हरिप्रसाद थवाईत, 13/19 रकबा 1120 वर्गफूट संजय पिता हरि प्रसाद के नाम पर दर्ज है। (मेंटेनेस खसरा की प्रति संलग्न है।) छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि को वर्ष 2018 में अनुविभागीय अधिकारी (रा०) द्वारा नजूल भूमि
में परिवर्तित नही किया गया है।
ध्यानाकर्षण के इस मामले में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा नजूल तहसीलदार के द्वारा दिया गया इसी जवाब को कलेक्टर सारंगढ़-बिलाईगढ़ को प्रेषित कर मामले में लीपापोती कर दिया गया। जबकि जो सवाल उठे है और जो जवाब बनाया गया है उसमें दोनो में काफी असमनाताएं है। सबसे पहले सारंगढ़ का मिसल बंदोबस्त 1923-24 से संधारित है जिसमें सारंगढ़ तहसील के पटवारी हल्का नंबर 28 (पुराना 20) में खसरा नंबर 224/1 ख 1923-24 से लेकर 2018 तक शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि के रूप में दर्ज था। जब यह भूमि छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि के रूप दर्ज है तो एकाएक 2018 मे यह नजूल भूमि में 20 लोगो के नाम पर कैसे आ गया? नजूल तहसीलदार के बताये अनुसार 13/2 के रूप में नौसरवान डोंगा जी के नाम से 6.90 एकड़ भूमि बताया जा रहा है। यहा पर सवाल खसरा नंबर 224/1 ख के 4.23 एकड़ की शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि का है और यह भूमि कहा गई? अगर यह भूमि नजूल में परिर्वतित होकर 13/2 के रूप मे दर्ज हो गई तो 4.23 एकड़ की शासकीय छोटे झाड़ के जंगद मद की भूमि कैसे 6.90 एकड़ हो गई? वास्तव में तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी इस बिन्दु को समझना ही नही चाहते है

कि खसरा नंबर 224/1 क रकबा 4.23 एकड़ तथा 224/1 ख रकबा 4.23 एकड़ की भूमि राजस्व रिकार्ड मे दर्ज थी जिसमें से 224/1 क रकबा 4.23 एकड़ को आबादी भूमि घोषित किया गया था किन्तु 224/1 ख रकबा 4.23 एकड़ को आबादी भूमि घोषित ही नही किया गया था। यह 2018 तक राजस्व अभिलेख में शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज था। किन्तु इसको 2018 मे आदेश जारी कर राजस्व रिकार्ड से विलोपित कर दिया गया। अब मामला विधानसभा मे ध्यानाकर्षण में उठने के बाद अनुविभागीय अधिकारी तथा तहसीलदार नजूल के द्वारा भ्रामक जानकारी दिया जा रहा है कि शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की शासकीय भूमि का रिकार्ड को संशोधित नही किया गया है जबकि नजूल के खसरा नंबर 13/2 को कई टुकड़ो में बांटकर बेचा गया है वही भूमि ही मूल खसरा नंबर 224/1 ख रकबा 4.23 एकड़ है जो कि नजूल बताकर कई लोगो को बेच दिया गया और मामला प्रकाश मे आने पर इसे राजस्व रिकार्ड से ही विलोपित कर मामले मे लीपापोती करने का प्रयास तात्कालिक अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा किया गया।
विधानसभा में गलत जानकारी भेजने का प्रयास?
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार छत्तीसगढ़ विधानसभा ध्यानाकर्षण सूचना क्रमांक 562 द्वारा विधायक श्रीमती उत्तरी गनपत जांगडे विधानसभा सदस्य के द्वारा उठाये गये विषय वस्तु का मूल तत्व सारंगढ़ तहसील के पटवारी हल्का नंबर 28 (पुराना 20) के खसरा नंबर 224/1 ख रकबा 4.23 एकड़ से संबंधित है जो कि राजस्व रिकार्ड में शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि के रूप में दर्ज था उसको एसडीएम के आदेश से विलोपित कर दिया गया। किन्तु अनुविभागीय अधिकारी और तहसीलदार नजूल का जवाब यह आया कि यह भूमि 1954-55 के
पूर्व ही नजूल घोषित कर दिये गये है। यदि उसी समय नजूल घोषित कर दिया गया है तो 2018 तक यह खसरा नंबर 224/1 ख रकबा 4.23 एकड़ कैसे शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि के रूप में दर्ज था? यह भूमि कई वर्षो तक आस-सिवाय के मद में खेती करने के लिये रेक पर दिया जाता रहा है। जिसका पंजी भी संधारण है। इसी शासकीय भूमि पर ही कई लोगो को लीज पर पट्टा भी दिया गया है। ऐसे मे अब अचानक से यह भूमि निजी कैसे हो गई? अनुविभागीय अधिकारी तथा तहसीलदार नजूल के द्वारा भेजे गये जानकारी से साफ प्रतीत हो रहा है कि इस शासकीय छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि को नजूल बताकर 20 लोगो के
नाम पर दर्ज कराकर बड़ा घोटाला पर पर्दा डालने का काम किया जा रहा है।



