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शराब पीकर ओवरब्रिज पर काट रहे थे केक, युवती समेत चार गिरफ्तार, कार भी जब्त….

शराब पीकर ओवरब्रिज पर काट रहे थे केक, युवती समेत चार गिरफ्तार, कार भी जब्त....

शराब पीकर ओवरब्रिज पर काट रहे थे केक, युवती समेत चार गिरफ्तार, कार भी जब्त….

बिलासपुर। संबलपुर ओवरब्रिज पर राजकिशोर क्षेत्र में रहने वाली युवती अपने दोस्तों के साथ शराब पीकर केक काट रही थी। इसकी सूचना मिलते ही सकरी पुलिस की टीम ने मौके पर पहुंचकर युवती और तीन युवकों को हिरासत में लिया। जांच में चारों शराब के नशे में पाए गए। पुलिस ने युवती और युवकों को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई की है। मौके पर मौजूद कार को भी जब्त किया गया। पूरा मामला बिलासपुर जिले के सकरी थाना क्षेत्र का है।

सकरी थाना प्रभारी विजय चौधरी ने बताया कि रविवार की रात करीब 12 बजे सूचना मिली कि कुछ लोग संबलपुर ओवरब्रिज के उपर कार में रखकर केक काट रहे हैं। इस पर पुलिस की टीम ने मौके पर दबिश दी। ओवरब्रिज के उपर काले कलर की कार को सड़क पर खड़ी कर तीन युवक और एक युवती केक काट रहे थे। पुलिस ने मौके से कोरबा के गोकुल नगर में रहने वाले निहाल सांडिल्य(22), अतुल वर्मा(21) कोरबा के नेहरू नगर निवास प्रियांशु चौरासिया(19) को पकड़ लिया। उनके साथ राजकिशोर नगर में रहने वाली 19 वर्षीय युवती भी मौजूद थी।

पूछताछ में युवकों ने बताया कि निहाल का बर्थ डे होने पर सभी केक काटने के लिए आए थे। जांच में युवती और युवक शराब के नशे में मिले। पुलिस ने आरोपित के खिलाफ बीएनएस की धारा 285, 3(5) और मोटर व्हीकल एक्ट 185 के तहत कार्रवाई की है। आरोपित की कार को पुलिस ने जब्त किया।

सड़क पर बर्थ डे मनाने वालों पर सख्ती

हाईकोर्ट ने सड़क पर अवरोध उत्पन्न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। कुछ एक मामलों में कोर्ट ने राज्य शासन को दिशा निर्देश दिए हैं। इसके बाद से पुलिस की ओर से इस तरह की शिकायत मिलते ही कड़ी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही लगातार जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। सीएसपी निमितेष सिंह ने बताया कि सड़क पर अवरोध उत्पन्न करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बिलासपुर. हाईकोर्ट में पीएम-जनमन योजना के तहत मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) खरीद में कथित गड़बड़ी को लेकर दायर जनहित याचिका खारिज कर दी गई है. मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सुनवाई के बाद याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही निरस्त कर दिया. हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका ठोस सबूतों के बजाय मीडिया रिपोर्ट और सामान्य आरोपों पर आधारित है, इसलिए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई योग्य नहीं है. साथ ही, याचिकाकर्ता की मंशा और पात्रता पर भी सवाल उठाते हुए कोर्ट ने इसे जनहित में वास्तविक नहीं माना.

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पास अन्य वैकल्पिक उपाय उपलब्ध हैं. याचिका खारिज होने के साथ ही सुरक्षा राशि लौटाने से भी अदालत ने इंकार कर दिया. बता दें कि 57 मोबाइल मेडिकल यूनिट के लिए 108 करोड़ रुपये की खरीदी से जुड़ा यह मामला है.

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