जिला- सारंगढ़ बिलाईगढ़

बरमकेला ब्लाक में जलजीवन मिशन के कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता? पेटी कॉन्ट्रैक्टर्स की मनमानी का मुद्दा विधानसभा में गूंजेगा?

बरमकेला ब्लाक में जलजीवन मिशन के कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता? पेटी कॉन्ट्रैक्टर्स की मनमानी का मुद्दा विधानसभा में गूंजेगा?

बरमकेला ब्लाक में जलजीवन मिशन के कार्यों में भारी भ्रष्टाचार और अनियमितता? पेटी कॉन्ट्रैक्टर्स की मनमानी का मुद्दा विधानसभा में गूंजेगा?

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/बरमकेला,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में जल-जीवन मिशन के तहत हो रहे निमार्ण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार का सवाल की गूंज विधानसभा में भी सुनाई देने वाली है। आने वाले दिनो मे जल-जीवन मिशन के मामले मे बड़ी हलचल हो सकती है। ठेकेदारो की मनमानी से सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिला में जल-जीवन मिशन का कार्य सतही तौर पर लक्ष्य की ओर अग्रसर है जबकि वास्तविकता इससे कोसो दूर है। नवनिर्मित जिले सारंगढ़ में जलजीवन मिशन कागजों में टॉप 5 में दिखाया जा रहा है लेकिन धरातल में स्थिति अत्यंत गंभीर है। सारंगढ़ विधायक उत्तरी गनपत जांगड़े ने बरमकेला ब्लाक एवं बिलाईगढ़ ब्लॉक के कार्यों में हुए भ्रष्टाचार को ध्यान मे रखकर विधानसभा में प्रश्न लगाया है

जिसमें आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं सुनील कुमार अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी के द्वारा पेटी ठेकेदार सौरभ गर्ग शक्ति को बरमकेला ब्लाक एवं बिलाईगढ़ ब्लॉक के लगभग आधा सैकड़ा गांव का कार्य किस आधार पर दिया गया है। विधायक के पास क्षेत्र के जनप्रतिनिधि, जनता व पार्टी कार्यकर्ता लगातार कार्यों में अनियमितता, भ्रष्टाचार व लापरवाही की शिकायत कर रहे हैं। शिकायतों में प्रमुख रूप से घटिया टंकी निर्माण, स्तर विहीन पाइप लाइन ब घटिया पुराने पीवीसी पाइपों का इस्तेमाल, सालों से तोड़ी गई रोड़ों की अब तक रिपेयरिंग नहीं साथ ही घरों में बने चैंबर्स में कम सीमेंट का उपयोग कर स्तरहीन चैंबर्स का निर्माण किया गया है। कई गांव के सरपंच एवं क्षेत्रीय नेताओं ने आरोप लगाया है कि पीएचई विभाग को अंधेरे में रखकर किए गए कार्य से दोगुना बिल निकाल लिया गया है। जैसे पाइप लाइन, चैंबर्स एवं सीसी रोड रिपेयर आदि। पीएचई विभाग में एक ही जूनियर इंजीनियर काशीराम सूर्यवंशी के द्वारा दो ब्लाकों का काम देखा जा रहा है। काम की अधिकता के कारण एसडीओ के द्वारा थोड़ी बहुत सहयोग किया जाता है

लेकिन जमीनी स्तर पर जांच के बिना ही बिलिंग की गई है। पूर्व में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के द्वारा बरमकेला ब्लाक के ग्राम कर्राकोट एवं ग्राम बुदबुदा में हुए टंकी निर्माण कार्य में अनियमितता के लिए जे ई काशीराम सूर्यवंशी को नोटिस भी दिया गया था। छत्तीसगढ़ में सुनील कुमार अग्रवाल कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी प्रतिष्ठित फर्म हैं लेकिन फर्म के मालिक सुनील कुमार अग्रवाल को भी पेटी ठेकेदार सौरभ गर्ग शक्ति के द्वारा अंधेरे में रखकर भारी भ्रष्टाचार किया गया है । 19 फरवरी को सारंगढ़ कलेक्टर ने जलजीवन मिशन की समीक्षा बैठक में मामले का संज्ञान लिया गया है और कुछ गांवों में 4 ठेकदारों को पेनाल्टी के साथ कारण बताओ नोटिस भी दिया गया है साथ ही एक ठेकदार को ब्लैक लिस्ट किया है। ग्राम पंचायत पिपरडुला एवं ठरकपुर में कार्य अधूरा छोड़ने पर ठेकेदार रामनारायण देवांगन (कटगी) को ब्लैक लिस्टेड किया गया है।वही पेनाल्टी के साथ नोटिस में साईं ट्रेडर्स, सौमित्र कंस्ट्रक्शन, शिवम कुमार सहित अन्य ठेकेदार शामिल हैं।

आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी को कारण बताओ नोटिस?

आर्या कंस्ट्रक्शन कंपनी की लगातार प्राप्त हो रही शिकायतों का संज्ञान लेते हुए सारंगढ़ कलेक्टर ने 19 फरवरी को समीक्षा बैठक में पीएचई विभाग को प्रथम चरण में ग्राम बगलोटा, बेलटिकरी एवं सरगुली आदि ग्रामों में कार्य की लापरवाही व शीघ्र हैंडओवर को लेकर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य ठेकेदार सुनील अग्रवाल के पास भी पेटी ठेकेदार सौरभ गर्ग शक्ति के द्वारा पेटी कॉन्ट्रैक्ट में लिए गए कार्य में भारी भ्रष्टाचार की व पैसे न देने की शिकायत कुछ टंकी निर्माण करने वाले मजदूरों ने की है यह अलग बात है कि ठेकदार ने अब तक क्या किया इसकी जानकारी किसी को नहीं है।

अनियमितता का दूसरा नाम जल-जीवन मिशन?

* घर – घर में बने चैंबर्स का साइज छोटा कर सीमेंट गिट्टी रेती बचाई गई (एफ एच टी सी) मानक साइज 5 फिट बाई 5 फिट का है।

* मुख्य पाइप लाइन को 1 मीटर से नीचे डालना चाहिए लेकिन कम गहराई में डालकर खुदाई का पैसा बचाया गया। दुष्परिणाम यह है कि भारी वाहनों के दबाव से पाइप लाइन फट गई है और लगातार लीकेज हो रहा है।

* घटिया व पुराने पीवीसी पाइपों का उपयोग किया गया है और अभी भी किया जा रहा है।

* कंपोजिट पाइप लाइन को मुख्य पाइप लाइन से जोड़कर घर में बने चैंबर तक जोड़ना है जिसकी गहराई डेढ़ फिट से नीचे होनी चाहिए लेकिन अधिकांशतः तो कंपोजिट पाइप को दबाया ही नहीं जा रहा है और जहां दबाया गया है वह भी आधा फिट से कम। यहां भी खुदाई का पैसा बचाया गया है।

* कम चैंबर बनाए गए और ज्यादा की बिलिंग की गई है। सरकार के द्वारा एक चैंबर का 8 हजार रुपए दिया गया है लेकिन बिना चैंबर बनाए ही यह राशि डकार ली गई है।

* सीसी रिपेयर का कार्य किए बिना ही पैसा निकाल लिया गया है एवं जिन ग्रामों में सीसी रिपेयर हुआ है उसका स्तर एकदम घटिया एक माह में ही उखड़ गया है । भारी भ्रष्टाचार हुआ है।

* टंकी निर्माण में बिना इंजीनियर की देखरेख के कार्य हुए जिसमें कम सरिया कम सीमेंट का उपयोग हुआ है परिणाम विध्वंसकारी होगा अधिकांश टंकियां लीकेज हैं। अधिकांश कि टेस्टिंग नहीं हुई। सभी टंकियों की टेस्टिंग अच्छे लैब में होगी तभी दूध का दूध एवं पानी का पानी होगा।

* कई गांवों वगैर कार्य के ही 90 प्रतिशत से ऊपर की राशि निकाली गई इसकी भी जांच होनी चाहिए।

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