
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना : कमीशनखोरी के लिये नवविवाहित जोड़ो को दिया गया स्तरहीन श्रृंगार साम्रगी?

आयोजन खर्च में भी किया गया जमकर कमीशनखोरी?
महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारी भ्रष्टाचार की खीर-खाने मे लगे,
एक ओर जहा रायगढ़ में दूल्हे को शेरवानी दिया गया वही सारंगढ़ में पजामा-कुर्ता,
दुल्हन को भी दिया गया स्तहरीन साड़ी,
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम के बाद अब महिला एवं बाल विकास विभाग की सामग्री खरीदी प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है। योजना के तहत नवविवाहित जोड़ों को प्रदान किए जाने वाले साज-सज्जा एवं गृहस्थी सामग्री में कथित असमानता को लेकर हितग्राहियों एवं सामाजिक संगठनों ने नाराजगी जताई है।आरोप है कि पड़ोसी रायगढ़ जिले में दूल्हों को आकर्षक शेरवानी एवं बेहतर गुणवत्ता के वस्त्र उपलब्ध कराए
गए, जबकि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में अधिकांश दूल्हों को केवल साधारण पजामा-कुर्ता देकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। इसे लेकर लोगों ने सवाल उठाया है कि जब शासन की योजना, बजट और प्रावधान समान हैं, तो फिर सामग्री वितरण में इतना बड़ा अंतर कैसे दिखाई दिया। दुल्हे को दिया गया जूता फटा हुआ था और दिया गया अधिकांश साम्रगी स्तरहीन है।
सोशल मिडिया में भी लोगो ने साम्रगी के स्तर और खरीदी की जांच की मांग नवपदस्थ कलेक्टर से किया है। जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को लगभग 35 हजार रुपये तक की सहायता, साज-सज्जा सामग्री एवं गृहस्थी उपयोग की वस्तुएं प्रदान की जाती हैं। इसमें दुल्हन के लिए साड़ी, मंगलसूत्र, श्रृंगार सामग्री, पायल, चूड़ी सहित अन्य वस्तुएं तथा दूल्हे के लिए कुर्ता-पायजामा अथवा शेरवानी, साफा एवं अन्य सामग्री शामिल होती है।


अब सवाल यह उठ रहा है कि सारंगढ़ जिले में दूल्हों को निम्नस्तरीय वस्त्र क्यों दिए गए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सामग्री खरीदी में पारदर्शिता नहीं बरती गई तथा कोटेशन प्रक्रिया तथा जैम पोर्टल से किया गया खरीदी में गड़बड़ी की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। कार्यक्रम में शामिल कई परिजनों ने आरोप लगाया कि 96 बेटियों के विवाह कार्यक्रम में दूल्हों के साथ भेदभाव किया गया। लोगों का कहना है कि यदि अन्य जिलों में बेहतर गुणवत्ता की सामग्री उपलब्ध कराई जा सकती है, तो सारंगढ़-बिलाईगढ़ में ऐसा क्यों नहीं हुआ। सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर खरीदी प्रक्रिया, कोटेशन स्वीकृति एवं सामग्री आपूर्ति की समीक्षा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री
कन्या विवाह योजना जैसी जनकल्याणकारी योजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही या भ्रष्टाचार सीधे गरीब परिवारों की भावनाओं से जुड़ा विषय है। अब देखना होगा कि महिला एवं बाल विकास विभाग इन आरोपों पर क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाती है।

रायगढ़ मे बेहतर साम्रगी, सारंगढ़ में कमीशनखोरी से स्तरहीन सामग्री?
बताया जा रहा है कि मातृजिला रायगढ़ मे उसी दिन आयोजित इसी योजना के सामूहिक विवाह समारोह में उच्च स्तर के शेरवानी और गुणवत्तायुक्त दुल्हन का सेट दिया गया है वही सारंगढ़ में शेरवानी के स्थान पर कुर्ता पजामा और फटा जूता सहित दुल्हन के लिये सस्ता वाला साड़ी देकर नवविवाहित दंपति के लिये शासन के द्वारा दिया जाने वाला 7 हजार रूपये के सामान मे भी महिला और बाल विकास विभाग के अधिकारियो नें डंडी मार दिया है।

7.68 लाख रूपये का आयोजन खर्च और 6.72 लाख रूपये की साम्रगी?
सूत्रो ने बताया कि मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत शासन ने 50 हजार रूपये स्वीकृत किया गया है जिसमें नवदंपति को 35 हजार रूपये का चेक प्रदान किया जाता है और 7 हजार रूपये श्रृंगार साम्रगी दिया जाता है वही प्रति दंपत्ति 8 हजार रूपये का आयोजन खर्च किया जाता है। ऐसे मे यहा पर कुल 96 जोड़ी विवाह संपन्न हुआ है जिसके अनुसार श्रृंगार साम्रगी में 6.72 लाख रूपये खर्च बताया गया है जबकि 7.68 लाख रूपये का आयोजन खर्च बताया गया है। इसमे टेंट और अन्य व्यवस्था को दर्शाया गया है।
सूत्रो की माने तो इसमे महिला और बाल विकास विभाग के द्वारा पचास फीसदी कमीशनखोरी किया गया है स्तरहीन साम्रगी लिया गया है और बढ़े दामो पर बिल व्हाऊचर बनवाया जा रहा है। उसी प्रकार से आयोजन के नाम पर किया गया खर्च मे भी बड़े स्तर पर गड़बड़ी किया गया है तथा फर्जी व्हाऊचरो के सहारे मे पूरा राशी को खर्च दिखाया जा रहा है। महिला और बाल विकास विभाग के इस काले कारनामो को देखते हुए पूरे खरीदी प्रक्रिया और टेंडर प्रक्रिया की जांच तथा नवदंपत्ति को दिया गया श्रृंगार साम्रगी की जांच की मांग विभिन्न सोशल मिडिया प्लेटफार्म में आम जनता के द्वारा किया जा रहा है।



