
जनदर्शन से ज्ञापन तक, पर समाधान नहीं, बम्हनपुरी को कब मिलेगा उप स्वास्थ्य केंद्र?

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
स्वास्थ्य सुविधा किसी भी समाज की बुनियादी आवश्यकता मानी जाती है, लेकिन ग्राम पंचायत बम्हनपुरी में यह आवश्यकता आज भी अधूरी है। लगभग पांच किलोमीटर की परिधि में कोई भी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र न होने से ग्रामीणों को प्राथमिक उपचार के लिए भी लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। यही कारण है कि उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ रही है -और यह मांग नई नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी है। ग्रामीणों के अनुसार, इस विषय में पूर्व में कई बार आवेदन, ज्ञापन और जनदर्शन कार्यक्रमों में निवेदन प्रस्तुत किया जा चुका है। लोकसभा क्षेत्र जांजगीर-चांपा की सांसद कमलेश जांगड़े तथा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को भी सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों के अनुशंसा के साथ विस्तृत ज्ञापन सौंपी जा चुकी है ।
मातृ-शिशु स्वास्थ्य पर सबसे अधिक असर-
बम्हनपुरी ही नहीं, बल्कि आसपास के जोगेसरा, चोरभट्टी, तिलाईपाली, पिकरिपाली, तेंदुभाटा और जोगीडीपा जैसे गांव भी स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। इन गांवों की दूरी लगभग दो किलोमीटर है, जिससे कुल मिलाकर एक बड़ा ग्रामीण समूह प्रभावित हो रहा है। जहाँ सबसे अधिक समस्या गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को झेलनी पड़ती है। प्रसव के समय आपातकालीन स्थिति में समय पर चिकित्सा सुविधा मिलना चुनौती बन जाता है। नियमित टीकाकरण और स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम भी दूरी और संसाधनों की कमी के कारण बाधित होते हैं।

विकास के दावों के बीच बुनियादी जरूरत-
ग्रामीणों का कहना है कि जब सड़कों, बिजली और अन्य विकास कार्यों की बात होती है, तो स्वास्थ्य सुविधा को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनका तर्क है कि उप स्वास्थ्य केंद्र की स्थापना से न केवल प्राथमिक उपचार सुलभ होगा, बल्कि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने में भी मदद मिलेगी। जहाँ बार-बार की गई मांग और जनदर्शन में उठाए गए मुद्दे के बावजूद अब तक स्वीकृति न मिलना ग्रामीणों में निराशा भी पैदा कर रहा है। हालांकि इस बार ग्रामीणों ने एकजुट होकर स्पष्ट संदेश दिया है कि स्वास्थ्य सुविधा कोई अतिरिक्त मांग नहीं, बल्कि उनका अधिकार है।
अब नजर शासन-प्रशासन के निर्णय पर टिकी है। यदि शीघ्र स्वीकृति मिलती है, तो
बम्हनपुरी सहित आसपास के दर्जनों गांवों के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकता है-और वर्षों से लंबित मांग को आखिरकार न्याय मिल सकता है।



