




गणतंत्र मेला को अनुमति देने की मांग : सुबह सारंगढ़ बंद, दोपहर को अनुमति,
एसडीएम मोनिका वर्मा नें दिया मेले की अनुमति
प्रशासन ने दिया गणतंत्र मेला और श्री विष्णु महायज्ञ की अनुमति
68 वर्षो से संचालित होते आ रहा है आयोजन
शत-प्रतिशत बंद रहा सारंगढ़,
शहरवासियो ने स्व-स्फूर्त बंद किया अपना प्रतिष्ठान,
गरीब-अमीर, सब्जी विक्रेता, फुटकर, खोमचे ठेला वालो ने भी किया बंद का सर्मथन,
अनुमति देने पर प्रशासन का आभार व्यक्त,
सारंगढ़,
सारंगढ़ में 68 वर्षो से आयोजित होते आ रहा श्री विष्णु महायज्ञ और गणतंत्र मेले के आयोजन की अनुमति नही देने के खिलाफ आज सारंगढ़ बंद शत प्रतिशत सफल रहा। सुबह से ही सारंगढ़ में एक भी दुकाने नही खुली। गरीब-अमीर सहित दैनिक रोजी रोटी वालो ने भी बंद को सर्मथन देते हुए अपना दुकान/पसरा/खोमचा सभी बंद रखा। आज के जबरदस्त बंद के बाद प्रशासन भी हरकत में आया तथा कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम श्रीमती मोनिका वर्मा ने श्री विष्णु महायज्ञ तथा गणतंत्र मेला के लिये अनुमति आदेश जारी कर दिया। इस अनुमति आदेश जारी होने के बाद सारंगढ़ शहर मे हर्ष का माहौल है।
जिला मुख्यालय सारंगढ़ में जिला बनने के बाद पहली बार प्रशासन के खिलाफ शहरवासी आंदोलन के लिये बंद जैसे आंदोलन का आगाज किया। किन्तु प्रशासन ने भी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सारंगढ़ के ऐतिहासिक मेले को अनुमति प्रदान कर दिया। दरअसल पूरा मामला सारंगढ़ में जवाहर भवन मेला प्रांगण में 68वर्षो से आयोजित होते आ रहा सारंगढ़ का प्रसिद्ध गणतंत्र मेला और श्री विष्णु महायज्ञ का आयोजन को लेकर सामने आया। 1954 से सारंगढ़ में आयोजित होते आ रहा इस मेला को लेकर गत वर्ष राजपरिवार के द्वारा आपत्ति दर्ज कराया गया था इस कारण से इसे अनुमति नही दिया गया था। वही दो वर्षो से कोरोना काल होने के कारण से श्री विष्णु महायज्ञ की अनुमति दिया गया किन्तु मेले को अनुमति नही दिया गया। किन्तु इस वर्ष 26 दिसंबर को मेला आयोजन को लेकर मेला समिति के द्वारा अनुमति हेतु आवेदन दे दिया गया था किन्तु आज तक प्रशासन इस पर निर्णय नही ले पा रहा था। इस मामले को लेकर प्रशासन की ओर से कोई पहल नही होते देख मेला समिति के द्वारा धरना का आयोजन किया गया जिसके बाद आज सारंगढ़ बंद का आव्हान किया गया। आज सारंगढ़ बंद का ही परिणाम यह रहा कि शाम होने के पहले की सारंगढ़ के प्रसिद्ध गणतंत्र मेला को अनुमति प्रदान कर दिया गया। एसडीएम मोनिका वर्मा ने श्री विष्णु महायज्ञ एवं गणतंत्र मेला समिति को अनुमति पत्र प्रदान कर दिया। प्रशासन के इस संवेदनशीलता को लेकर मेला समिति ने भी उनको साधुवाद ज्ञापित किया है।
जबरदस्त सफल रहा सारंगढ़ बंद, दिया “सारंगढ़िया” का परिचय
सारंगढ़ में मेला की अनुमति देने की मांग को लेकर आज सारंगढ़ बंद का आयोजन किया गया। अलसुबह से ही मेला आयोजन समिति के सदस्यो के साथ साथ सारंगढ़ शहरवासी सारंगढ़ बंद को लेकर सक्रिय थे। किन्तु एक भी दुकान या प्रतिष्ठान को सारंगढ़वासियो को बंद नही कराना पड़ा। सभी वर्ग के सर्मथन से आयोजित रहा सारंगढ़ बंद को लेकर हर वर्ग ने स्व-स्फूर्त बंद का आयोजन किया। इस दौरान भीड़भाड़ वाले स्थान भारतमाता चौक, नगर पालिका चौक, बिलासपुर रोड़, रायगढ़ रोड़, मेन रोड़, नंदा चौक, आजाद चौक, जयस्तंभ चौक, धर्मशाला गली, पुराना मछली पसरा सहित सब्जी बाजार आदि स्थान पर सन्नाटा पसरा था।एक भी दुकान या गुमटी नही खुली थी जिसकी चर्चा नगर मे जोरो पर है। हर वर्ग के सर्मथन से सारंगढ़ बंद काफी सफल रहा। चाय की गुमटी और पान की दुकानो तक के बंद रहने से पान के तलबदार पान तक के लिये तरस गये। वही चाय-नाश्ता के लिये आऊटर के गांवो की ओर लोगो ने रूखसत किया। वही सारंगढ़ बंद को लेकर जिस प्रकार से एकता का परिचय देते हुए “सारंगढ़िया” का बात को शहरवासियो ने सामने रखकर सारंगढ़ बंद के लिये ना सिर्फ अपील किया था बल्कि आज सफल भी बनाया जिसके कारण से प्रशासन भी शहरवासियो के साथ खड़ा हुआ और शाम तक सारंगढ़ के मेले को लेकर अनुमति प्रदान कर दिया गया।
सारंगढ़ बंद से राजधानी तक में हलचल?
इस संबंध में सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार नवीन जिला बना सारंगढ़ में शहर बंद जैसे आंदोलन की राजधानी में भी चर्चा हुई तथा बड़े स्तर पर सारंगढ़ बंद और संवेदनशील मामला को लेकर प्रशासन के लगातार संपर्क में राजधानी की बड़े अधिकारी लगे थे। वही प्रशासन से भी आंदोलन और मांग को लेकर जानकारी मांगा गया था। जिला मुख्यालय के बड़े अधिकारियो के फोन इस मामले को लेकर आज काफी बजे है। जिसके बाद शाम होने के पहले ही सारंगढ़ मेला को अनुमति देने का आदेश टाईप होने की जानकारी छनकर सामने आई। बताया जा रहा है कि सारंगढ़ बंद के बाद प्रशासन संवेदनशील होकर मेला की अनुमति प्रदान कर प्रशासन और शहरवासियो के बीच के सौहर्दपूर्ण माहौल को बरकरार रखने में कामयाब हुई है।
मेला अनुमति के सहयोगियों को कोटि कोटि नमन – मयूरेश केशरवानी
बरसों की सांस्कृतिक विरासत को संजोकर रखने में जिन्होंने सहयोग किया उनका कोटि कोटि नमन है, उक्त बातें प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से भाजपा नेता व पार्षद मयूरेश केशरवानी ने कही। मयूरेश ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कहा कि सारंगढ अंचल के स्थानीय एकमात्र मेला सिर्फ एक आयोजन नही है जहां लोग महज आनंद लेने आते हों। यह एक ऐसा सांस्कृतिक विरासत है जिसे संजोकर रखना अत्यावश्यक है। इस मेले में अमर शहीदों की याद है। पूरे देश में एकमात्र मेला है जो 1956 से अमर शहीदों के सम्मान में आयोजित होता रहा है। इस गणतंत्र मेले में अपना बचपना गुजार कर वृद्धावस्था तक सफर करने वाले लोगों की भावनाओं यह मेला है। श्री विष्णु महायज्ञ यज्ञ स्थल में प्रतिदिन पूजा पाठ करने जाती माताओं बहनों के श्रद्धा का एहसास करवाता यह सारंगढ़ीहा मेला।
विगत कुछ वर्षों से लगातार मेला को गिद्ध दृष्टि लगी हुई है लेकिन कहते हैं सत्य परेशान हो सकता है किंतु पराजित नही। विगत कुछ वर्षों से जहां मेला भूमि पर गिद्ध दृष्टि लगाए चंद भूमाफिया कुत्सिक मानसिकता के साथ मेला आयोजन की अनुमति में अड़चन लगाए हुए थे तो वहीं मेला आयोजन को लेकर सारंगढ की आम जनता भी कमर कस कर आर पार की लड़ाई करने से गुरेज नही कर रही थी। अन्य वर्षों के अपेक्षाकृत इस वर्ष दोनो पक्षों के बीच सबसे बड़ी किसी की भूमिका थी तो वह थी जिला प्रशासन की। चूंकि जिला निर्माण 1 वर्ष भी नही हुआ है ऐसे में जिला प्रशासन को विषयवस्तु की ज्यादा जानकारी नही थी लेकिन जब जानकारी हुई तो जिला प्रशासन में विशेष कर कलेक्टर डॉक्टर फरिहा आलम सिद्दीकी पुलिस अधीक्षक श्री राजेश कुकरेजा का विशेष संवेदनशीलता विषय के प्रति देखने को मिला। वहीं जिला प्रशासन के आदेशों का पालन करते हुए जहां एसडीओपी स्नेहिल साहू ने भी जन भावना को समझते हुए सारंगढ बंद के दौरान सकारात्मक रवैया रखा था तो एसडीएम मोनिका वर्मा ने भी मेला के विषय मे संवेदनशीलता का परिचय देते हुए सत्य व तथ्य की परख के साथ जन भावना का सम्मान किया। मेला आयोजन पर ग्रहण लगा तो जरूर लेकिन मेला आयोजन की अड़चनों को दूर करने के लिए भी अंचल के राजनीतिक / गैर राजनीतिक समेत प्रशासनिक चेहरों ने प्रत्यक्ष / अप्रत्यक्ष रूप से “जन भावना” का साथ दिया। आंदोलन का शंखनाद भले ही मेला समिति ने किया लेकिन व्यापारी वर्ग के सहयोग बिना, छोटे गुमटी ठेलों के सहयोग बिना, आम जन मानस के सहयोग बिना आंदोलन निष्फल हो जाता। मेला समिति का एक सदस्य होने के नाते मेला आयोजन समिति को बहुत बहुत बधाइयाँ व विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए जनहित में दिए निर्णय हेतु जिला प्रशासन का कोटि कोटि धन्यवाद।
सारंगढ़ में हर्ष का माहौल
सारंगढ़ बंद को लेकर जिस प्रकार से सारंगढ़वासियो ने एकता दिखाई और हर वर्ग ने सारंगढ़ बंद मे अपना योगदान दिया उससे तय था कि प्रशासन मेला की अनुमति जारी कर देगा। शाम तक सारंगढ़ मेला की अनुमति की खबर मिलने के बाद सारंगढ़ में हर्ष का माहौल है। पान, पानी और पालगी की नगरी सारंगढ़ के रहवासी आमतौर पर शांत माने जाते है किन्तु 68 वर्षो से आयोजित होते आ रहा सारंगढ़ मेला को लेकर अनुमति नही दिये जाने से सड़क पर संघर्ष करने के लिये सारंगढ़वासी आज सारंगढ़ बंद में अपना एकता का एहसास करा दिये। शाम को सारंगढ़ मेला की अनुमति देने के बाद स्थानीय प्रशासन के प्रति सारंगढ़ के निवासियो ने आभार व्यक्त किया है तथा मिलजुल कर सारंगढ़ मेला को गरिमापूर्ण आयोजित कराने के लिये शहरवासियो से अपील करते हुए आंदोलन को सफल बनाने के लिये आभार व्यक्त किया है। मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष अजय गोपाल ने शहरवासियो को इस सहयोग के लिये आभार व्यक्त किया है तथा मेला की अनुमति देने के लिये प्रशासन को साधुवाद प्रदान किया है।
