
सारंगढ़ में गौवंशों पर अत्याचार की सारी हदें पार! 12-13 गौमाताओं को बांधकर नहर में फेंका, दो की मौत, कई घायल; भाजपा सरकार में गौवंशों की दुर्दशा पर जनता में भारी आक्रोश

सारंगढ़। सारंगढ़ अंचल में गौवंशों के साथ क्रूरता और अमानवीय व्यवहार की घटनाएं लगातार गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं। ताजा मामला नगर के वार्ड क्रमांक 3 में मोना मॉडर्न स्कूल जाने वाले रास्ते पर स्थित नहर का है, जहां अज्ञात लोगों द्वारा लगभग 12-13 गौवंशों को बांधकर नहर में फेंक दिया गया। सुबह घटना की सूचना मिलते ही गौसेवकों की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान चलाकर गौवंशों को बाहर निकाला। इस हृदयविदारक घटना में कई गौवंश घायल मिले, जबकि दो गौमाताओं की मृत्यु हो चुकी थी।
यह घटना केवल पशु क्रूरता नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार कर देने वाली दरिंदगी है। आखिर किसी के भीतर इतनी निर्दयता कैसे आ सकती है कि बेजुबान जीवों को बांधकर मौत के मुंह में फेंक दिया जाए? गौमाता के नाम पर राजनीति और आस्था की बातें करने वालों के लिए भी यह घटना आत्ममंथन का विषय होनी चाहिए।
सारंगढ़ में गौवंशों की दुर्दशा का मामला कोई पहली बार सामने नहीं आया है। इससे पहले भी सारंगढ़ अंचल में गौमांस की अवैध बिक्री और बड़ी मात्रा में गौमांस बरामद होने के मामले सुर्खियों में रह चुके हैं। कई-कई क्विंटल गौमांस मिलने की घटनाओं ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। लगातार सामने आ रहे गौ तस्करी, गौमांस के अवैध कारोबार और अब गौवंशों को बांधकर नहर में फेंकने जैसी घटनाओं ने गौवंशों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कुल मिलाकर आज सारंगढ़ अंचल में गौवंशों की स्थिति बेहद चिंताजनक होती जा रही है। जनता के बीच यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि भाजपा सरकार में सारंगढ़ के गौवंश आखिर कितने सुरक्षित हैं? गौमाता के नाम पर राजनीति करने वालों के शासन में यदि बेजुबान पशुओं को इस तरह मरने के लिए छोड़ दिया जाएगा, तो फिर उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
भाजपा सरकार में सारंगढ़ के गौवंशों की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो उनके लिए यह अंचल नरक बनता जा रहा है। क्षेत्र के बड़े नेताओं की प्राथमिकताओं को लेकर भी जनता में नाराजगी बढ़ रही है। आरोप लग रहे हैं कि जनप्रतिनिधि और सत्ताधारी दल के बड़े नेता जनसमस्याओं और गौवंशों की बदहाली पर ध्यान देने के बजाय सत्ता, पद और अपने राजनीतिक हितों में व्यस्त हैं। जनता यह सवाल पूछ रही है कि गौमाता के नाम पर राजनीति करने वाले नेता आखिर इन बेजुबानों की पीड़ा पर कब बोलेंगे?
एक ओर गौसेवक अपनी जान की परवाह किए बिना घायल गौवंशों को बचाने, उनका उपचार कराने और उनकी सेवा में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर लगातार सामने आ रही घटनाएं प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर कमियों को उजागर कर रही हैं। आखिर कब तक गौसेवक ही अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे? क्या गौवंशों की सुरक्षा केवल कुछ समर्पित लोगों के भरोसे छोड़ दी गई है?
गौसेवकों ने ताजा घटना को लेकर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। अब पुलिस प्रशासन से मांग है कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच हो, शहर एवं आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जाएं, आरोपियों की पहचान कर तत्काल गिरफ्तारी की जाए और दोषियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही सारंगढ़ अंचल में गौ तस्करी, गौमांस के अवैध कारोबार और गौवंशों के साथ क्रूरता के पुराने मामलों की भी गंभीरता से समीक्षा होनी चाहिए। गौशालाओं की व्यवस्था, निराश्रित गौवंशों के संरक्षण और उनकी चिकित्सा सुविधाओं को लेकर भी प्रशासन जवाबदेही तय करे।
अब सारंगढ़ की जनता का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। गौवंशों की लगातार बिगड़ती स्थिति अब लोगों से देखी नहीं जा रही है। गौमाता के नाम पर केवल भाषण, नारे और राजनीतिक लाभ लेने से काम नहीं चलेगा। यदि सरकार और स्थानीय जनप्रतिनिधि वास्तव में गौवंशों के संरक्षण के प्रति गंभीर हैं, तो उन्हें जमीन पर अपनी जवाबदेही साबित करनी होगी।
जनता के सवाल तीखे हैं—
-
-
गौमांस के अवैध कारोबार पर पूरी तरह अंकुश क्यों नहीं लग पा रहा?
-
-
-
गौ तस्करी और गौवंशों के साथ क्रूरता की घटनाओं पर प्रभावी कार्रवाई कब होगी?
-
-
-
गौवंशों को बांधकर नहर में फेंकने वाले दरिंदों की गिरफ्तारी कब होगी?
-
-
-
आखिर गौमाता के नाम पर राजनीति करने वाले बड़े नेता इन बेजुबानों की दुर्दशा पर मौन क्यों हैं?
-
गौमाता के नाम पर सत्ता और राजनीति करने वालों को अब जवाब देना होगा। सारंगढ़ के गौवंशों को भाषण नहीं, सुरक्षा चाहिए; आश्वासन नहीं, संरक्षण चाहिए और दिखावा नहीं, ठोस कार्रवाई चाहिए।
आखिर कब जागेगा शासन-प्रशासन? कब मिलेगा बेजुबानों को न्याय? और कब सारंगढ़ के गौवंश भय और क्रूरता से मुक्त होकर सुरक्षित जीवन जी सकेंगे?



