
निर्माण सामग्री महंगी होने से 4 हजार करोड़ के भवन निर्माण कार्य भी प्रभावित, ठेकेदारों ने सरकार से मांगी राहत
रायपुर। छत्तीसगढ़ में डामर की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सड़क निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। मानसून के बाद भी डामर के दाम पुराने स्तर पर नहीं लौटने से प्रदेश में करीब 10 हजार करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाएं प्रभावित हैं। वहीं, निर्माण सामग्री महंगी होने के कारण लगभग 4 हजार करोड़ रुपये के भवन निर्माण कार्य भी अटक गए हैं।
डामर की कीमत इस समय जीएसटी सहित करीब 95 हजार रुपये प्रति टन बताई जा रही है, जबकि साल की शुरुआत में यह 45 से 50 हजार रुपये प्रति टन के आसपास थी। कीमतों में भारी उछाल के कारण ठेकेदारों का कहना है कि पुराने टेंडर की दरों पर निर्माण कार्य करना मुश्किल हो गया है। उन्होंने प्रदेश सरकार से मार्च 2027 तक बढ़ी कीमतों की क्षतिपूर्ति देने की मांग की है।
सड़क निर्माण पर सबसे ज्यादा असर
प्रदेश में सेंट्रल रोड फंड, लोक निर्माण विभाग, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और अन्य योजनाओं के तहत हजारों करोड़ रुपये के सड़क निर्माण कार्य चल रहे हैं। डामर की बढ़ी कीमतों के कारण इनमें से बड़ी संख्या में काम प्रभावित हुए हैं।
ठेकेदारों के मुताबिक, बढ़ी लागत की भरपाई के बिना पुराने अनुबंधों पर काम जारी रखना आर्थिक रूप से कठिन है। केंद्र सरकार ने अपनी योजनाओं के तहत आने वाली सड़कों के लिए दिसंबर 2026 तक क्षतिपूर्ति की मंजूरी दी है। इससे संबंधित सड़क परियोजनाओं का काम दीपावली के बाद शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है।
चार हजार करोड़ के भवन निर्माण कार्य भी प्रभावित
सड़क परियोजनाओं के साथ भवन निर्माण क्षेत्र भी महंगाई की मार झेल रहा है। प्रदेश में करीब 4 हजार करोड़ रुपये के भवन निर्माण कार्य प्रभावित बताए जा रहे हैं। इनमें चार बड़े मेडिकल कॉलेजों के लगभग 1,600 करोड़ रुपये के काम भी शामिल हैं।
इसके अलावा रायपुर में माध्यमिक शिक्षा मंडल के नए भवन का निर्माण भी लागत बढ़ने से प्रभावित हुआ है। इस भवन की निर्माण लागत करीब 36 करोड़ रुपये बताई गई है। निर्माण सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी ने ठेकेदारों की परेशानी बढ़ा दी है। सीमेंट, सरिया और अन्य जरूरी सामग्री महंगी होने से निर्धारित बजट में काम पूरा करना चुनौती बन गया है।
सरकार से क्षतिपूर्ति और मूल्य वृद्धि की मांग
बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रतिनिधि रूपेश कुमार के अनुसार, डामर की बढ़ी कीमतों के लिए मार्च 2027 तक क्षतिपूर्ति देने और जिन भवन निर्माण अनुबंधों में मूल्य वृद्धि का प्रावधान नहीं है, उनमें भी राहत देने की मांग सरकार के सामने रखी गई है।
अब निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों की नजर राज्य सरकार के फैसले पर है। यदि बढ़ी लागत को लेकर राहत मिलती है, तो अटकी सड़क और भवन परियोजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है। वहीं, काम में देरी का असर प्रदेश के विकास कार्यों पर भी पड़ सकता है।



