
सारंगढ़ के लालाधुर्वा गांव में स्थित है महात्मा गांधी का मंदिर
होती है रोज पूजा-अर्चना
पिछले 78 सालों से हो रही है महात्मा गांधी की पूजा,
छत्तीसगढ़ का एकमात्र गांधी जी का मंदिर,
स्वं.बोर्रा चौहान ने लिया था आजादी की लडाई में हिस्सा,
बेटी स्वं.नान्हूदाई दो बार थी सारंगढ़ की विधायक
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
पूरा विश्व आज महात्मा गांधी जी की 157वी जयंती मना रहा है किन्तु सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के सारंगढ़ विकासखंड़ के ग्राम लालघुर्वा में चौहान परिवार की सुध लेने वाला कोई नही है जिन्होने गत 78 वर्षो से अपने घर पर मिट्टी से महात्मा गांधी की प्रतिमा स्थापित कर हर दिन उसकी पूजा अर्चना करते है और अंचल का देशभक्ति से ओतप्रोत करते है। लालघुर्वा के चौहान परिवार की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है किन्तु आज भी महात्मा गांधी के इस मंदिर की पूजा-अर्चना बंद नही किया गया है। आजादी के अमृत
महोत्सव पर भी प्रशासन ने इस प्रसिद्ध चौहान परिवार को भुला दिया जिन्होने आजादी के लड़ाई मे भाग भी लिया और घर पर महात्मा गांधी और लालबहादुर शास्त्री का मूर्ति बनाकर उसकी पूजा अर्चना निरंतर
आज तक जारी रखा। नवीन जिला बना सारंगढ़-बिलाईगढ़ के संवेदनशील जिला प्रशासन को इस परिवार की स्थिति का सुध लेना ही महात्मा गांधी का वास्तवित श्रद्धांजति अर्पित करने के समान होगा। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के प्रसिद्ध खनिज ग्राम गुड़ेली से लगे हुए गांव लालघुर्वा में 2 अक्टूबर पर हर साल विशेष चहल-पहल रहती है. वैसे तो 2 अक्टूबर के दिन पूरे देश में गांधी जी का जन्म दिन मनाता है, लेकिन सारंगढ़ अंचल का लालधुर्वा छत्तीसगढ़ का इकलौता गांव है, जहां महात्मा गांधी की याद में एक देशभक्त ने अपने मिट्टी के घर में गांधी का मंदिर बनाया है और हर रोज गांधी जी की पूजा
अचर्ना की जाती है. देश में जब आजादी की जंग छिड़ी हुई थी, तभी सारंगढ़ अंचल के लालाधुर्वा निवासी देशभक्त क्रांतिकारी सैनिक बोर्रा चौहान ने भी हिस्सा लिया था. बोरा चौहान देशप्रेम से इस कदर ओतप्रोत थे कि भारत को आजादी दिलाने वाले राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को उन्होंने घर मे मन्दिर बनाकर स्थापित कर लिया.
करीब 78 सालों से नियमित रूप से गांधी जी को पूजने का सिलसिला चल रहा है. आज भी हर रोज सुबह शाम चौहान परिवार में गांधी जी भगवान की तरह पूजे जाते हैं. इसके अलावा 2 अक्टूबर को गांधी जी की विशेष पूजा-अचर्ना की जाती है. बोर्रा चौहान की मृत्यु के बाद से लगातार उनके
परिवार के सदस्यों द्वारा इस परंपरा को जीवित रखा गया है. परिजन बताते हैं कि वे अपने पूवर्जों से विरासत में मिली हुई इस परंपरा को कभी खत्म होने नहीं देंगे और हर रोज गांधी मंदिर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा को पूजते रहेंगे.
प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है परिवाऱ?
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बोर्रा चौहान का परिवार आज प्रशासनिक अनदेखी का शिकार है. स्वतंत्रता सेनानी के परिवारों को शासन की ओर से मिलने वाली योजनाओं से परिवार आज भी उपेक्षित और अनजान है. स्वतंत्रता सेनानी का परिवार आज बेरोजगारी की समस्या से भी जूझ रहा है. दूसरों के घर मजदूरी करके चौहान परिवार का गुजारा चल रहा है. आजादी के पथ प्रदर्शक महात्मा गांधी को भगवान मानकर पूजने वाले इस चौहान परिवार की सुध जिला प्रशासन ने आज तक नहीं ली.
समाज के लिए भी समर्पित है चौहान परिवार
महात्मा गांधी की अनन्य भक्त बोर्रा चौहान की बहन कुमारी नान्हूदाई चौहान सारंगढ की विधायक भी रह चुकी हैं. उन्होंने महज 13 साल की उम्र में अपना राजनैतिक जीवन शुरू किया था. इसकी बदौलत उन्हें 60
के दशक में सारंगढ विधानसभा सीट से कांग्रेस की टिकट मिली. बताया गया कि कुमारी नान्हूबाई चौहान समाज सेवा के लिए समर्पित रहीं और उन्होंने विवाह भी नहीं किया था. अपने राजनैतिक जीवन में उन्हें दो
बार विधायक बनने का मौका मिला था। 1951 में मध्यभारत प्रदेश के सारंगढ़ विधानसभा सीट से नान्हूदाई पहली विधायक बनी थी वही 1957 मे मध्यप्रदेश राज्य के सारंगढ़ विधानसभा सीट से नान्हूदाई
विधायक बनी थी।




