राज्य

एडवर्ड पार्क में उड़ीं आदेशों की धज्जियां! नोटिस पर नोटिस, टीम भी बनी… फिर भी निर्माण जारी, कार्रवाई के बाद भी नहीं थमा काम….

एडवर्ड पार्क में उड़ीं आदेशों की धज्जियां! नोटिस पर नोटिस, टीम भी बनी… फिर भी निर्माण जारी, कार्रवाई के बाद भी नहीं थमा काम....

एडवर्ड पार्क में उड़ीं आदेशों की धज्जियां! नोटिस पर नोटिस, टीम भी बनी… फिर भी निर्माण जारी, कार्रवाई के बाद भी नहीं थमा काम….

खैरागढ़। जिले में प्रशासन ने सरकारी आदेश कागज पर निकाला, नगर पालिका ने नोटिस चस्पा किया, यथास्थिति बनाए रखने के लिए पांच कर्मचारियों की टीम भी बना दी गई और फिर दोबारा नोटिस भी जारी हो गया। बावजूद इसके एडवर्ड पार्क की विवादित जमीन पर निर्माण आगे बढ़ने की शिकायत सामने आ रही है। अब राजस्व और नगर पालिका की टीम मौके पर पहुंची, काम बंद कराया और कुछ निर्माण सामग्री जब्त की, लेकिन आरोप है कि टीम के लौटते ही काम फिर शुरू हो गया। ऐसे में सवाल सिर्फ निर्माण करने वालों पर नहीं, बल्कि उस सरकारी मशीनरी पर भी उठ रहा है, जो आदेश लागू कराने के बजाय आदेशों की फाइल बढ़ाती दिखाई दे रही है।

मामला राजनांदगांव-कवर्धा रोड पर सिविल कोर्ट के सामने स्थित जमीन का है। विवाद खसरा नंबर 167, 169 और 170 तथा नजूल भूखंड क्रमांक 114 और 115 से जुड़ा है। जमीन के स्वरूप और कथित अवैध प्लाटिंग को लेकर शिकायतों के बाद जिला प्रशासन ने 8 जून 2026 को अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की। जांच पूरी होने तक मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

12 जून को जारी हुआ था पहला नोटिस

इसके बाद नगर पालिका ने 12 जून को निर्माणाधीन भवन को लेकर नोटिस जारी किया। नोटिस मौके पर चस्पा किया गया और साफ कहा गया कि जांच समिति का निर्णय आने तक निर्माण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया जाए।

यानी प्रशासन को सब पता था, जमीन विवादित है, जांच चल रही है और निर्माण रोककर यथास्थिति बनाए रखनी है। लेकिन इसके बाद भी निर्माण धड़ल्ले से जारी रहा।

निगरानी के लिए बनाई गई पांच सदस्यीय टीम

13 अगस्त को नगर पालिका ने यथास्थिति की निगरानी के लिए बाकायदा पांच सदस्यीय टीम बना दी। आरआई मनोज शुक्ला, एआरआई राजेश तिवारी, एआरआई पीयूष चंद्र यदु, पंप चालक टोडर सिंह और प्लेसमेंट कर्मचारी अंकुर सिंह को इसमें शामिल किया गया।

टीम का काम था जांच समिति की रिपोर्ट आने तक मौके पर किसी भी तरह का नया निर्माण नहीं होने देना।

18 अगस्त को नगर पालिका ने एक और नोटिस जारी कर निर्माण को वर्तमान स्थिति में ही बनाए रखने के निर्देश दिए।

यानी मामला ऐसा था कि नोटिस भी था, निगरानी टीम भी थी और आदेश भी था। फिर भी निर्माण आगे बढ़ने की शिकायत सामने आती रही। यहीं से नगर पालिका की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर निर्माण रोकना ही था तो निगरानी टीम की जरूरत क्यों पड़ी? और अगर टीम बनाई गई थी तो उसके रहते निर्माण की स्थिति कैसे बदली? क्या मौके का नियमित निरीक्षण हुआ? क्या निर्माण शुरू होने की सूचना अधिकारियों को दी गई? अगर दी गई तो तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

कार्रवाई के बाद भी काम शुरू होने का आरोप

ताजा घटनाक्रम में कल राजस्व और नगर पालिका की टीम आखिर मौके पर पहुंची। निर्माण बंद कराया गया और कुछ सामान की जब्ती भी बनाई गई। लेकिन आरोप है कि टीम के वापस लौटते ही निर्माण दोबारा शुरू हो गया। अगर ऐसा हुआ है तो यह कार्रवाई नहीं, बल्कि कार्रवाई की खानापूर्ति पर सवाल खड़ा करता है। जून में जहां निर्माण की शुरुआती स्थिति में कॉलम खड़े थे, वहां अब डीपीसी लेवल के बाद छज्जे की ढलाई के लिए कॉलम खड़े किए जाने की बात सामने आई है। यानी यथास्थिति बनाए रखने के आदेश के बीच निर्माण का स्तर आगे बढ़ने का आरोप है।

एनओसी की शर्तें भी सवालों के घेरे में

मामले में नगर पालिका की एनओसी की शर्तें भी सवालों में हैं। एनओसी की कंडिका 8 में प्रमाणपत्र की वैधता एक साल रहने और निर्धारित समय में निर्माण नहीं होने पर नवीनीकरण के बाद काम शुरू करने की शर्त बताई गई है।

वहीं, कंडिका 15 में अवैध प्लाटिंग का हिस्सा पाए जाने पर एनओसी तत्काल प्रभाव से निरस्त किए जाने का उल्लेख है।

बताया जा रहा है कि एडवर्ड पार्क में चल रहे कुछ निर्माणों के लिए वर्ष 2023-24 में एनओसी ली गई थी। ऐसे में सवाल है कि क्या इन एनओसी की वैधता समाप्त होने के बाद नियमानुसार नवीनीकरण कराया गया? अगर नहीं कराया गया तो निर्माण कैसे आगे बढ़ा? और अगर कराया गया तो नगर पालिका ने उसकी शर्तों की जांच कैसे की?

दस्तावेजों में खसरा नंबर को लेकर भी सवाल

इस पूरे मामले में दस्तावेजों की एक और गलती सवालों में है। 13 अगस्त के नगर पालिका आदेश में विवादित खसरा नंबर 167 की जगह 187 लिखा दिखाई देता है, जबकि 12 जून और 18 अगस्त के दस्तावेजों में 167 दर्ज है। यह टंकण की गलती है या रिकॉर्ड में कोई अलग संदर्भ है, इसे नगर पालिका और राजस्व विभाग को स्पष्ट करना चाहिए। जमीन विवाद में खसरा नंबर की गलती कोई सामान्य बात नहीं है।

ठेले-गुमटियों पर कार्रवाई से भी उठे सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल नगर पालिका की कार्रवाई के कथित दोहरे पैमाने को लेकर है। कुछ समय पहले एडवर्ड पार्क के सामने छोटे-बड़े ठेले और गुमटियों को आवाजाही में परेशानी का हवाला देकर जेसीबी से हटाया गया था। गरीब दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई में मशीनरी मौके पर पहुंच गई, लेकिन उसी इलाके में जांचाधीन जमीन पर निर्माण रोकने के लिए आदेश जारी हुए, नोटिस लगे, पांच सदस्यीय टीम बनी और फिर भी निर्माण आगे बढ़ने की शिकायत है।

यही वजह है कि शहर में चर्चा है कि क्या नियम सिर्फ गरीब की गुमटी तक ही पहुंचते हैं? क्या सरकारी आदेशों की सख्ती रसूखदारों के निर्माण के सामने कमजोर पड़ जाती है? यह सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का नहीं है। सवाल नगर पालिका से है कि अगर उसके अपने आदेश का उल्लंघन हो रहा है तो वह उसे रोकने के लिए तत्काल और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रही?

सीएमओ बोले- निर्माण जारी मिला तो होगी एफआईआर

नगर पालिका सीएमओ पुनीतराम वर्मा का कहना है कि यथास्थिति बनाए रखने के लिए आरआई, एआरआई सहित पांच लोगों की टीम बनाई गई है। लगातार नोटिस के बाद भी काम चालू मिलने पर सामान जब्त किया गया है। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी निर्माण जारी मिला तो संबंधित लोगों के खिलाफ थाने में नामजद एफआईआर कराई जाएगी। अब देखना यह है कि अगली कार्रवाई फिर एक नोटिस तक सीमित रहती है या निर्माण वास्तव में रुकता है।

जांच पूरी होने तक यथास्थिति बनाए रखना चुनौती

एडवर्ड पार्क की जमीन किसकी है, सरकारी रिकॉर्ड क्या कहते हैं और जमीन की प्लाटिंग या पुराने लेन-देन की वैधता क्या है, इसका फैसला जांच समिति और सक्षम प्राधिकारी करेंगे। लेकिन जांच का फैसला आने तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश लागू कराना प्रशासन की तत्काल जिम्मेदारी है। क्योंकि इस मामले में अब सवाल सिर्फ जमीन का नहीं है। सवाल यह है कि नगर पालिका के आदेश की ताकत आखिर कागज से बाहर कब निकलेगी? नोटिस पर नोटिस जारी होते रहे, टीम बनती रही, अधिकारी मौके पर जाते रहे और अगर टीम के लौटते ही निर्माण फिर शुरू हो जाए, तो जनता का सवाल जायज है- क्या एडवर्ड पार्क में सरकारी आदेश लागू हो रहे हैं या सिर्फ सरकारी कागजों का वजन बढ़ाया जा रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://sarangarhtimes.in/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-31-180014.png
Back to top button