
भटगांव : जूनवानी हत्याकांड की जांच पर उठे गंभीर सवाल, पीड़ित परिवार ने एसपी से की पुनः जांच की मांग, लेन-देन कर आरोपियों को बचाने का आरोप, सीबीआई व नार्को टेस्ट की उठी मांग

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/भटगांव,
ग्राम जूनवानी में हुए बहुचर्चित तुलसीराम टंडन हत्याकांड की जांच अब नए विवादों में घिरती नजर आ रही है। पुलिस द्वारा 48 घंटे के भीतर हत्या की गुत्थी सुलझाकर एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजने के बावजूद मृतक के परिजनों ने पूरी कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि मामले की जांच अधूरी है और वास्तविक दोषियों को कथित रूप से बचाया गया है। इस संबंध में जिला पुलिस अधीक्षक को लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष पुनः जांच, सीबीआई जांच तथा संदिग्धों के नार्को टेस्ट की मांग की गई है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार, भटगांव थाना क्षेत्र के ग्राम जूनवानी में 10 जुलाई 2026 को तुलसीराम टंडन की हत्या का मामला दर्ज हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निमिषा पांडे तथा अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) विजय ठाकुर के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी शिवकुमार धारी के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने जांच करते हुए 13 जुलाई को सकराम उर्फ बजरंग कुर्रे (67 वर्ष) निवासी जूनवानी को आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया।हालांकि पुलिस की इस कार्रवाई से मृतक के परिजन संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि इतनी गंभीर घटना को अकेला व्यक्ति अंजाम नहीं दे सकता और हत्या में अन्य लोगों की भी संलिप्तता की आशंका है। परिजनों का आरोप है कि मामले में कथित लेन-देन कर कुछ संदिग्धों को कार्रवाई से बचाया गया है।मृतक के पुत्र बलेश्वर दास टंडन ने पहले 13 जुलाई को भटगांव थाना में शिकायत दर्ज कर मुख्य संदिग्ध पवन कुर्रे के
खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आरोप है
कि शिकायत के बाद अपेक्षित कार्यवाही नहीं हुई। इसके बाद 22 जुलाई को 2026 को उन्होंने जिला पुलिस अधीक्षक सारंगढ़ बिलाईगढ को को विस्तृत लिखित शिकायत देकर पूरे मामले की पुनः जांच कराने की मांग की। शिकायत में पवन कुर्रे,गौतम कुर्रे, प्रदीप कुर्रे,की भूमिका पर संदेह जताते हुए उनके खिलाफ भी जांच किए जाने की मांग की गई। पीड़ित परिवार का कहना है जब तक सभी संदिग्धों से वैज्ञानिक एवं निष्पक्ष तरीके से पूछताछ नहीं होगी तब तक वास्तविक सच्चाई सामने नहीं आएगी। इसी आधार पर उन्होंने सीबीआई जांच और नार्को टेस्ट कराने की मांग उठाई है।इस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक ने पीड़ित परिवार को निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच का निर्णय जिला स्तर पर नहीं लिया जा सकता। जबकि नार्को टेस्ट जैसी प्रक्रिया सक्षम न्यायालय अथवा विधिक आदेश के बाद ही कराई जा सकती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं की विधिसम्मत एवं निष्पक्ष जांच कराई जाएगी अब पूरे मामले पर सबकी निगाहें पुलिस अधीक्षक कार्यालय की आगामी कार्यवाही टिकी है। क्या शिकायत के बाद जांच का दायरा बढ़ेगा?



