
50 फीट गहरी खदान को पटवारी ने बताया 'साफ जमीन'; प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर डोलोमाइट तस्करों को क्लीन चिट
कलेक्टर व खनिज विभाग को गलत रिपोर्ट देने का आरोप; धड़ल्ले से चल रहा माफिया को बचाने का खेल

सुशासन शिविर में समाधान नहीं होने पर ग्रामीण पहुंचे कलेक्टर के पास, अवैध खदान की
शिकायत लेकर
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/साल्हेओना,
छत्तीसगढ़ में सुशासन का दावा करने वाले सरकारी दावों की पोल खुद ग्रामीण इलाकों में लग
रहे शिविर खोल रहे हैं। जिला स्तरीय 'सुशासन तिहार' का आयोजन ग्राम भीखमपुरा (जनपद
पंचायत बरमकेला) में बड़े जोर-शोर से किया गया था, ताकि जनता की समस्याओं का तुरंत निपटारा हो सके। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। सरकारी जमीन पर डोलोमाइट का अवैध साम्राज्य चलाने वाले माफियाओं के खिलाफ जब ग्रामीणों ने सुशासन तिहार में गुहार लगाई, तो उन्हें न्याय मिलने के बजाय रद्दी का टुकड़ा थमा दिया गया। शिविर में समाधान न होने से नाराज और आक्रोशित ग्रामीणों ने
अब सीधे कलेक्टर जनदर्शन का दरवाजा खटखटाया है। इस घटना ने साफ कर दिया है कि सुशासन तिहार के नाम पर सिर्फ कोरी वाह-वाही लूटी जा रही है और फाइलों में आवेदनों का
फर्जी निस्तारण किया जा रहा है।
सरकारी जंगल की जमीन पर बरसों से डकैती, पटवारी ने दी क्लीन चिट पूरा मामला तहसील सरिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत बिलाईगढ-अ का है। यहां खसरा नंबर 316, रकबा 2.016 हेक्टेयर पर 'छोटे झाड़ का जंगल' दर्ज है। इस सुरक्षित सरकारी वन्य भूमि पर छुहीपाली निवासी घड़ी लाल पटेल (पिता गोवर्धन) और उसके बेटे जनक राम पटेल ने बरसों से डोलोमाइट की अवैध खदान बना रखी है। यहां से रोज धड़ल्ले से कीमती खनिजों का उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। ग्रामीणों ने इसकी लिखित शिकायत बीते 26 मई 2026 को भीखमपुरा के सुशासन तिहार शिविर में की थी। लेकिन भ्रष्टाचार का खेल देखिए, मामले की जांच करने पहुंचे राजस्व हल्का पटवारी उपेंद्र कुमार मेहर ने दफ्तर में बैठकर एक झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार कर दी। पटवारी ने अपनी रिपोर्ट में सीधे लिख दिया कि मौके पर कोई अवैध खनन नहीं हो रहा है। ग्रामीणों का खुला आरोप है कि डोलोमाइट माफिया से मोटी रकम डकार कर राजस्व विभाग की टीम ने उन्हें पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है और प्रशासन के आला अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकी है।
40 से 50 फीट गहरी खदान को बताया 'पानी का गड्ढा' राजस्व अमले की इस अंधेरगर्दी का सबसे बड़ा सबूत खुद उनका बनाया गया पंचनामा है। एक तरफ मौके पर 40 से 50 फीट गहरी खदान साफ दिखाई दे रही है, जिसमें अवैध रूप से डोलोमाइट निकाला जा चुका है। दूसरी तरफ, जांच प्रतिवेदन में चालाकी दिखाते हुए यह लिख दिया गया कि जमीन पर कोई खनन नहीं है, बल्कि वहां सिर्फ पानी भरा एक गड्ढा है। ग्रामीणों ने तीखा सवाल उठाया है कि अगर वहां कोई अवैध उत्खनन नहीं हुआ, तो सरकारी जंगल के बीचो-बीच 50 फीट गहरा पाताल जैसा गड्ढा अपने आप कैसे बन गया? राजस्व विभाग ने अपनी घोर लापरवाही और मिलीभगत को छुपाने के लिए यह हास्यास्पद दलील पेश की है। हद तो तब हो गई जब शिकायत के बाद आनन-फानन में जांच
करने पहुंची टीम ने खदान की कोई नाप-जोख तक नहीं की। इतना ही नहीं, खदान चलाने वाले
रसूखदारों को बचाने के लिए पंचनामे में आरोपियों की जगह 'अज्ञात' लिख दिया गया। इस पूरे
मामले में खनिज विभाग की चुप्पी भी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रही है। माफिया राज के खिलाफ ग्रामीणों ने खोला मोर्चा सुशासन तिहार में हुए इस भद्दे मजाक से असंतुष्ट होकर अब ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। बिलाईगढ-अ और आसपास के ग्रामीणों ने एकजुट होकर कलेक्टर
जनदर्शन में दोबारा मोर्चा खोला है और भ्रष्ट पटवारी समेत अवैध खदान संचालकों के खिलाफ
सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
क्या कहते है शिकायतकर्ता
सुशासन तिहार शिविर भीखमपुरा में मैंने खुद अवैध खदान चलाने वाले दो सगे नामजद आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूतों के साथ शिकायत दर्ज कराई थी। लेकिन प्रशासन के नुमाइंदों ने पैसे के दम पर पूरी रिपोर्ट ही बदल दी और गलत प्रतिवेदन पेश कर दिया। जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो ग्रामीण कहां जाएं? इसीलिए हमें दोबारा कलेक्टर के पास आना पड़ा। हम इस अवैध धंधे को बंद कराकर ही दम लेंगे।
दुर्गेश पटेल, पीड़ित ग्रामीण,
बिलाईगढ़-अ,


