
CG हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : गर्भपात के बाद दोबारा प्रेग्नेंसी पर भी मिलेगा पूरा अवकाश, FCI रायपुर की महिला कर्मचारी को बड़ी राहत….

बिलासपुर. कामकाजी महिलाओं के मातृत्व अधिकारों को लेकर हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने कहा कि यदि किसी महिला कर्मचारी का गर्भपात हो जाता है, और वह उसके बाद दोबारा गर्भवती होती है, तो पिछला अवकाश उसके नए मातृत्व अवकाश के रास्ते में बाधा नहीं बनेगा. महिला अपने दूसरे गर्भधारण के लिए कानूनन पूरी मातृत्व छुट्टी पाने की हकदार है. इसके साथ ही हाई कोर्ट ने महिला के वेतन से काटे गए 80,254 रुपए की रिकवरी को रद्द कर दिया है. मामले में जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने यह फैसला सुनाया.
बता दें, कि भारतीय खाद्य निगम रायपुर में असिस्टेंट ग्रेड-2 के पद पर पदस्थ महिला कर्मचारी वर्ष 2019 में गर्भवती हुई थीं. उनके जुड़वां बच्चे होने थे, लेकिन गंभीर चिकित्सीय जटिलताओं के चलते 25 अप्रैल 2019 को अस्पताल में उनका एक भ्रूण मिसकैरेज हो गया. डॉक्टरों की निगरानी और बेड रेस्ट के बाद उन्होंने 3 सितंबर 2019 को एक प्री-मैच्योर बेटी को जन्म दिया. इसके बाद उन्होंने मातृत्व अवकाश और नियमों के अनुसार मेडिकल बिलों के भुगतान के लिए आवेदन किया. विभाग ने उन्हें केवल 68 दिनों का असाधारण अवकाश बिना वेतन के मंजूर किया, और लीव बैलेंस नहीं होने का हवाला देकर उनके वेतन से 80,254 रुपए की कटौती भी कर ली गई. इस पर महिला ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई.
90 दिनों की छुट्टी का हक
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मातृत्व अवकाश और गर्भपात के नियमों के तहत कुल 90 दिनों की छुट्टी की हकदार है, जिसे विभाग कम नहीं कर सकता. कोर्ट ने लीव बैलेंस न होने के नाम पर महिला के वेतन से काटे गए 80,254 रुपए की रिकवरी को निरस्त कर दिया और रकम वापस करने के आदेश दिए. इसके अलावा महिला कर्मचारी के बाकी बचे 3 लाख 76 हजार 773 रुपए के मेडिकल बिलों के भुगतान पर निर्देश दिया है कि वे सभी दस्तावेजों की दोबारा से जांच कर तय उचित आदेश जारी करें. हाई कोर्ट ने मैटरनिटी बेनीफिट एक्ट, 1961 का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व अवकाश का अधिकार एक महिला का वैधानिक और संवैधानिक अधिकार है, यह उसके सम्मान, स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ा है.



