
तुर्की तालाब : गहरीकरण करने के नाम पर निकाला गया मिट्टी को किया जा रहा है विक्रय?

कलेक्टारेट के पास पानी भराव में किया जाना चाहिये उपयोग,
पुष्पवाटिका गार्डन में किया जाना चाहिये उपयोग,
लेकिन निजी व्यक्तियो को बेचा जा रहा है मिट्टी,
300 रूपये प्रति ट्रेक्टर बेचा जा रहा है मिट्टी को?
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़ नगर पालिका के अंधेर नगरी चौपट अधिकारी वाली कहावत सही बैठती है। यहा पर साफ-सफाई के लिये सूखाया गया तुर्की तालाब में पोकलैंड़ लगाकर मिट्टी को निजी व्यक्तियो को बेचा जा रहा है जबकि कलेक्टोरेट परिसर और पुष्पवाटिका समेत कई ऐसे सरकारी जगह है जहा पर वर्षाकाल में पानी भराव होता है। किन्तु तालाब की मिट्टी को निजी व्यक्तियो को देकर मोटा कमाई किया जा रहा है। दरअसल माह भर पहले सारंगढ़ के तुर्की तालाब को इस नाम से सूखाया गया कि यहा पर 15 लाख रूपये के सौदर्यीकरण का कार्य तथा तालाब का साफ-सफाई किया जाना है। पानी फेकने के बाद पखवाड़ा भर तक यह तुर्की तालाब यू ही पड़ा रहा है।
जिसके बाद गत तीन दिनो से तुर्की तालाब का गहरीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया जिसके बारे में जानकारी लेने पर नगर पालिका के जिम्मेदारो ने बताया कि फंड़ की कमी के कारण से जनसहयोग से मिट्टी निकाला जा रहा है। वही मौके पर अवलोकन करने पर ज्ञात हुआ कि यहा पर निजी व्यक्तियो के द्वारा मिट्टी की खुदाई करके उसको अपना उपयोग किया जा रहा है। नियमत: कही पर
खोदाई करके मिट्टी का परिवहन किये जाने पर लाखो रूपये का रायल्टी लगता किन्तु जनसहयोग के नाम पर तुर्की तालाब का गहरीकरण के नाम पर मिट्टी को अपने निजी प्लाटो पर डालकर लाखो रूपये का वारा-न्यारा किया जा रहा है। इस संबंध में नगर पालिका के सूत्रो ने बताया कि तुर्की तालाब का गहरीकरण तथा सौदर्यीकरण के लिये निकाय के पास कोई बजट नही है इस कारण से निजी व्यक्तियो को मिट्टी ले जाने का मौखिक निर्देश दिया गया है।
इसके लिये किसी भी प्रकार का ना तो दर स्वीकृत किया गया है और ना ही टेंड़र किया गया है। सबकुछ स्थानीय व्यवस्था के अनुसार किया जा रहा है। वही जानकारो ने बताया कि यहा पर एक व्यक्ति के द्वारा पोकलैंड़ लगाया गया है तथा प्रति ट्रेक्टर 300 रूपये के दर पर मिट्टी का विक्रय किया जा रहा है। इस मामले में लगभग 1 हजार ट्रिप मिट्टी एक निमार्णधीन निजी कालोनी में विक्रय किया जा चुका है। दूसरे शब्दो मे कहा जाये तो तुर्की तालाब की सरकारी मि़ट्टी को बेचने का खेल खेला जा रहा है। वही पूरे मामले मे सरकारी तालाब की खुदाई की मिट्टी का उपयोग में सरकारी स्थानो पर मिट्टी की आवश्यकता पर बल नही दिया जा रहा है। कलेक्टर के पास कई स्थान ऐसे है जहा पर पानी भराव हो जाता है वही जवाहरभवन मेला मैदान, पुष्प वाटिका गार्डन ऐसे स्थान है जहा पर वर्षाकाल में पानी का भराव और ठहराव हो जाता है वहा पर मिट्टी का उपयोग करने से इन स्थानो का आने वाले समय में उपयोग किया जा सकता है।

वही इंड़ोर स्टेडियम और खुद नगर पालिका के परिसर के मैदान मे मिट्टी का
भराव की आवश्यकता है। ऐसे मे तुर्की तालाब से निकाला जा रहा मिट्टी को निकाय के द्वारा की उपयोग किया जाये तो बेहतर होगा। जिस प्रकार से तुर्की तालाब के जीर्णोद्धार के नाम पर तालाब का मिट्टी का व्यावसायीकरण करते हुए उसको विक्रय किया जा रहा है उससे साफ प्रतीत हो रहा है कि तुर्की तालाब की मिट्टी का उपयोग को लेकर बड़े स्तर पर लेन-देन हुआ है।
बिना अनुमति कैसे हो रहा है गहरीकरण?
इस संबंध में नगर पालिका के जवाबदार अधिकारियो से चर्चा करने पर उन्होने साफ तौर पर बताया कि तुर्की तालाब के साफ-सफाई करने के लिये तालाब को सुखाया गया है किन्तु तालाब को गहरीकरण करने के लिये उनके पास फंड़ की कोई व्यवस्था नही है। ऐसे में तुर्की तालाब का जीर्णोद्धार करने के लिये तुर्की तालाब का गहरीकरण करके उसकी मिट्टी को ले जाने के लिये निजी व्यक्तियो को मौखिक में अनुमति दिया गया है। पोकलैंड़ लगाकर आनन-फानन मे किया
जा रहा खुदाई तथा मिट्टी के विक्रय के संबंध में जानकारी के बारे मे पूछने पर सरकारी अधिकारियो ने किसी भी प्रकार से जवाब देना उचित नही समझा। जिससे स्पष्ट हो रहा है कि जब फंड़ नही था तो भरी गर्मी में तालाब को सूखाया क्यों गया और अब निजी व्यक्तियो को इस तालाब को मिट़्टी देकर क्यो इसको व्यावसायिककरण किया गया है? इस मिट़्टी के परिवहन के कारण से गायत्री मंदिर रोड़ धूल-धूसरित हो गया तथा ओपन ट्रेक्टर ट्राली में मिट्टी को रोड़ पर गिराकर परिवहन किया जा रहा है।

मुड़ा तालाब में भी चल रहा है मिट्टी का खेल?
सारंगढ़ के मुड़ा तालाब में भी दर्जन भर से अधिक ट्रेक्टर लगे हुए है तथा तालाब के सूखे स्थल पर जेसीबी लगाकर मिट्टी की खोदाई किया जा रहा है तथा प्रति ट्रेक्टर 300 रूपये मे मिट्टी को विक्रय किया जा रहा है। इसके लिये भी किसी भी प्रकार से कोई अनुमति नही लिया गया है। बताया जा रहा है कि नये निर्मित होने वाले मकानो और प्लाटो को समतल करने के लिये मिट्टी की अभी भारी डिमांड़ है। ऐसे मे सरकारी मुड़ा तालाब का मिट्टी लगभग मुरूम के समान है तथा इसकी मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे मे सरकारी तालाब मुड़ा में जेसीबी लगाकर लाखो रूपये के मुरूम-मिट्टी की खोदाई किया जा रहा है तथा उसको विक्रय किया जा रहा है।
सरकारी जमीन पर किया जा रहा इस खोदाई में ना तो रायल्टी का झंझट है और ना ही कही पर सरकारी अनुमति की आवश्यकता है।



