जिला- सारंगढ़ बिलाईगढ़राज्य

अमित जोगी का निराला अंदाज। ‘जागो रे बघुआ…’ अमित जोगी का ‘कौआ सॉन्ग’ रिलीज, सोशल मीडिया पर मचाई धूम

अमित जोगी का निराला अंदाज। ‘जागो रे बघुआ…’ अमित जोगी का ‘कौआ सॉन्ग’ रिलीज, सोशल मीडिया पर मचाई धूम

इसे समाचार शैली में इस तरह तैयार किया जा सकता है:

अमित जोगी का ‘कौआ सॉन्ग’ रिलीज, सोशल मीडिया पर छत्तीसगढ़ी अंदाज में छेड़ा सियासी संवाद

रायपुर। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी का नया छत्तीसगढ़ी गीत ‘जागो रे बघुआ छत्तीसगढ़ के, कोलिहा मन ललकारत हे’ रिलीज हो गया है। गाने के सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। गीत के जरिए छत्तीसगढ़ की अस्मिता, माटी और स्थानीय भावनाओं को केंद्र में रखते हुए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की गई है।

अमित जोगी ने इस गीत को अपने फेसबुक अकाउंट पर साझा किया है। गीत साझा करते हुए उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखा कि “हमर मंदिर, हमर देवता, हमर माटी” और आगे मंदिर की छत पर कौआ बैठने के प्रतीक के जरिए अपनी बात रखी। पोस्ट के अंत में उन्होंने “जय छत्तीसगढ़ महतारी” लिखा है।

छत्तीसगढ़ी प्रतीकों के जरिए राजनीतिक संदेश

‘कौआ सॉन्ग’ के बोलों में मंदिर, देवता और छत्तीसगढ़ की माटी जैसे स्थानीय सांस्कृतिक प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है। गीत में कौए और बघुआ (बाघ) के प्रतीक के माध्यम से लोगों को जागरूक होने और कथित तौर पर चुनौती देने वालों का सामना करने का संदेश दिया गया है।

गीत की शुरुआती पंक्तियां हैं—

“मंदिर छत म कौवा बैठे,
देवता ले बड़े बाजत हे।
जागो रे बघुआ छत्तीसगढ़ के,
कोलिहा मन ललकारत हे।”

इसके बाद गीत में इसी संदेश को दोहराते हुए छत्तीसगढ़ की माटी और स्थानीय स्वाभिमान का संदर्भ दिया गया है।

सोशल मीडिया पर चर्चा

गीत के रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अमित जोगी के समर्थक इसे छत्तीसगढ़ी अस्मिता और स्वाभिमान से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि राजनीतिक नजरिए से इसे प्रदेश की मौजूदा राजनीति पर टिप्पणी के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालांकि, गीत में जिन प्रतीकों और संदर्भों के जरिए संदेश दिया गया है, उनका राजनीतिक अर्थ क्या है, इसे लेकर अलग-अलग व्याख्याएं सामने आ सकती हैं। अमित जोगी ने अपने पोस्ट में किसी व्यक्ति या दल का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया है।

‘जागो रे बघुआ’ के जरिए ललकार

गीत का केंद्रीय संदेश “जागो रे बघुआ” है। बघुआ को ताकत और छत्तीसगढ़ी पहचान के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करते हुए गीत के माध्यम से जागरूकता और प्रतिरोध का भाव सामने रखा गया है।

अमित जोगी की ओर से गीत को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह गीत राजनीतिक चर्चा में किस तरह जगह बनाता है और छत्तीसगढ़ की राजनीति में इसे लेकर किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://sarangarhtimes.in/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-31-180014.png
Back to top button