जिला- सारंगढ़ बिलाईगढ़

 सारंगढ़ में घर-घुसकर मारपीट करने वाले ने एफआईआर वापस नही लिया तो पीएम आवास को तुड़वाने की कयावद?

 सारंगढ़ में घर-घुसकर मारपीट करने वाले ने एफआईआर वापस नही लिया तो पीएम आवास को तुड़वाने की कयावद?

 सारंगढ़ में घर-घुसकर मारपीट करने वाले ने एफआईआर वापस नही लिया तो पीएम आवास को तुड़वाने की कयावद?

दबंगई दिखाते हुए पीएम आवास को तोड़वाने का प्रयास,
जिले में कानून की उड़ रही है धज्जिया?

मुड़वाभाठा में गरीब महिला के निमार्णधीन पीएम आवास को तोड़ने की कयावद?
बात नही मानने पर पहले किया गया मारपीट और गुड़ागर्दी?
अब झूठी शिकायत कर पीएम आवास को तुड़वाने का कयावद,

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के मुड़वाभाठा गांव में गरीब महिला के स्वीकृत पीएम आवास के निमार्णधीन कार्य को रोकते हुए इसको ढहाने की कयावद की स्टोरी को मूर्त रूप देने का प्रयास का मामला प्रकाश में आया है। पिड़ित महिला ने बताया कि उसके निमार्णधीन घर के बगल में रास्ता छोड़ने के लिये दबाव डाला गया तथा उसके साथ मारपीट किया गया। एफआईआर होने पर मामला में समझौता करने को कहा गया और अब पीएम आवास पर स्टे लगाकर उसको गिराने का कयावद किया जा रहा है।

इस संबंध मे मिली जानकारी के अनुसार विद्या जांगड़े पति फिरत को शासन के
द्वारा पीएम आवास स्वीकृत किया था। तथा जिस भूमि पर पीएम आवास स्वीकृत किया गया है वह उसी भूमि पर निमार्ण कार्य करा रही है। विद्या जांगड़े पति फिरत को वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त प्राप्त हुई थी तथा अधिकारियों द्वारा नियमित निरीक्षण के उपरांत ही उसे अब तक तीन किस्तें प्रदान की जा चुकी हैं। बताया जा रहा है कि गांव का ही रामप्रसाद रामप्रसाद बंजारे निवासी मुड़वाभांठा के द्वारा उक्त महिला विद्या जांगड़े से उसकी मकान के लिये
दूसरे छोर से भी रास्ता छोड़ने की मांग किया। जिस पर महिला से इंकार कर दिया जिससे गुस्साकर दिनांक 26 जनवरी 2025 को रामप्रसाद बंजारे द्वारा शासकीय भूमि पर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया। जिससे पीड़िता विद्या जांगड़े के घर आने-जाने का रास्ता अवरुद्ध हो रहा था। विरोध करने पर पीड़िता एवं उसकी बेटी के साथ घर में घुसकर मारपीट किया गया। जिसकी शिकायत पीड़िता द्वारा थाना में शिकायत दर्ज करने पर प्रारंभ में एफआईआर दर्ज करने में टालमटोल की गई। बाद में एफआईआर दर्ज की गई, किंतु पीड़िता का आरोप है

कि उसमें गंभीर धाराएं शामिल नहीं की गईं एवं उसके बयान में भी परिवर्तन किया गया। एफआईआर दर्ज होने बाद रामप्रसाद के द्वारा गांव के सरपंच के साथ मिलकर पीड़िता पर समझौते का दबाव बनाया गया। समझौते से इनकार करने पर पीड़िता के प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत निर्मित हो रहे घर पर को गिराने का धमकी दिया गया तथा प्रधानमंत्री आवास के निमार्ण को लेकर तहसीलदार कोसीर में समक्ष शिकायत प्रस्तुत किया गया। रामप्रसाद बंजारे पर आरोप है कि पुलिस थाना कोसीर में दर्ज प्रकरण का समझौता नही करने के कारण से उनके पीएम आवास के खिलाफ फर्जी शिकायत किया गया है कि उक्त पीएम आवास बेजा कब्जा मे बनाया जा रहा है तथा सार्वजनिक रोड़ को कब्जा कर दिया गया है। प्रकरण की सुनवाई के दौरान पिड़ित महिला ने तहसीलदार के समक्ष अपना जवाब रखते हुए बताया कि उनके विरुद्ध लगाया गया बेजा कब्जा का आरोप पूर्णरूप से गलत है इसलिए अत्त्वीकार है। यह कि अनावेदिका द्वारा अपने स्वामित्व की भूमि पर ही मकान निर्माण कार्य कर रही है। किसी

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बेजा कब्जा उसके द्वारा नहीं किया गया है अनावेदिका इसी भू-खण्ड मकान पर वर्षों से अबाद्ध होकर निवासरत है मात्र राजनैतिक द्वेषवश कथित राम प्रसाद बंजारे निवासी मुडवामांठा द्वारा अनावेदिका के विरुद्ध बिना किसी वैध आधार के झूठे एवं मनगढ़त तथ्य पर झूठा आरोप लगाकर शिकायत माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। वस्तुतः कथित रामप्रसाद बजारे/शिकायतकर्ता के विरूद्ध अनावेदिका द्वारा थाना कोसीर में शिकायत कर एफआईआर दिनांक 26.01.2025 को दर्ज करायी गई थी। जिसके आधार पर रामप्रसाद के पिताजी जयराम के विक्रुद्ध अपराध कायम कर दाण्डिक न्यायालय सारंगढ़ में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया है जो विचाराधीन है इसी समय
से उक्त व्यक्ति द्वारा अनादेदिका के प्रति रंजिश रखी जा रही है। किन्तु मामले मे तहसीलदार ने पीएमआवास के निर्माणाधीन मकान के दिवाल एवं बाधित रास्ता को कब्जा मुक्त करने बेदखल आदेश पारित किया जाता है। जिसकी अपील पर सुनवाई न्यायालय अनुविभागीय दंड़ाधिकारी सारंगढ़ में अभी गतिमान है।

बहरहाल देखना यह है कि पहले घर घुसकर मारपीट और गाली-गलौच
करना और एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले का वापस लेने के लिये दबाव डालना तथा समझौता नही करने पर झूठी शिकायत कर पीएम आवास को तोड़वाने की कोशिश करने वाले पर क्या प्रशासन एक्शन लेता है। पूरी घटना यह बताती है कि कानून मे आज भी दबंगो का ही बोलाबाला है।

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