
सरिया के बोंदा में विरोध और समर्थन के बीच 4 नई डोलोमाइट खदानों के लिए जनसुनवाई, हंगामे के बाद प्रशासन ने खत्म की प्रक्रिया….

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/साल्हेओना/सरिया,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला के तहसील मुख्यालय सरिया के अंतर्गत ग्राम पंचायत बोंदा में सोमवार को प्रस्तावित 4 नई डोलोमाइट पत्थर खदानों के लिए आयोजित जनसुनवाई भारी हंगामे और विरोधाभासों के बीच संपन्न हुई। एक ओर जहां कुछ ग्रामीणों ने इसे रोजगार का अवसर बताकर समर्थन किया, वहीं दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ताओं और किसानों ने पर्यावरण और स्वास्थ्य का हवाला देते हुए इसका कड़ा विरोध किया। स्थिति को देखते हुए पूरे आयोजन स्थल को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया था।

जनसुनवाई स्थल पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। आने-जाने वाले हर
व्यक्ति की मशीन से जांच की जा रही थी। प्रशासनिक टीम में एसडीएम वर्षा बसंल, पर्यावरण अधिकारी अंकुर साहू, सरिया तहसीलदार कोमल साहू, एडिशनल एसपी निमीषा पाण्डेय और एसडीओपी संतोषी ग्रेसी मुख्य रूप से मौजूद रहे। समर्थन और विरोध की खींचतान सुनवाई की शुरुआत में बोंदा, छेलफोरा और नौघटा के कुछ प्रतिनिधियों ने खदानों का समर्थन करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र में रोजगार के साधन बढ़ेंगे। हालांकि, जल्द ही विरोध के स्वर मुखर हो गए। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने आरोप लगाया कि प्रभावित पंचायतों को पर्यावरण प्रभाव आकलन रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से नहीं दिखाई गई और कई गंभीर तथ्यों को छिपाया
गया है। जैसे ही जनसुनवाई निरस्त करने की मांग उठी, प्रायोजित भीड़ ने हंगामा शुरू कर दिया,

जिससे दोनों पक्षों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। विरोध कर रहे नितिन पाणिग्राही, मुकेश कुमार डनसेना, देव कुमार चौहान व अन्य ने कहा कि इन खदानों से प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे उपजाऊ जमीन और भूजल स्रोत पूरी तरह नष्ट हो जाएंगे।
अधिकारियों का मौन और ग्रामीणों का आक्रोश
दोपहर 1 बजे के करीब एसडीएम वर्षा बसंल ने बिना किसी अंतिम फैसले के जनसुनवाई समाप्त करने की घोषणा कर दी। जब एसडीएम व जनसुनवाई के पीठासीन अधिकारी वर्षा बसंल से इस संबंध में जानकारी चाही, तो उन्होंने "ऑफिस आकर जानकारी लें" कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। दूसरी ओर, ग्रामीणों ने कंसल्ट अधिकारी को घेर लिया। ग्रामीणों का आरोप था कि
रिपोर्ट में गोमर्डा अभ्यारण्य से खदान की दूरी गलत दिखाई गई है। साथ ही स्कूल, छात्रावास और कृषि भूमि को नुकसान न होने का दावा भी झूठा है। विरोध बढ़ता देख कंसल्ट अधिकारी बिना जवाब दिए वहां से निकल गए।

खास बातें
महिलाओं की कम उपस्थिति जनसुनवाई में महिलाओं की संख्या नगण्य रही। बोकरामुडा की 55 वर्षीय बुदकून यादव ने भावुक होकर अपनी खेतिहर जमीन बचाने की गुहार लगाई। ग्राम सभा बनाम जनसुनवाई जहां एक तरफ जनसुनवाई चल रही थी, वहीं अधिकांश पंचायतों के पदाधिकारी अपने-अपने गांवों में विशेष ग्राम सभा की बैठक ले रहे थे। फिलहाल हंगामे के बीच बिना किसी स्पष्ट निर्णय के सुनवाई खत्म करने से ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।



