
“सामुदायिक भवन पर ‘जाति का कब्जा’! निजी जमीन, शासकीय निर्माण और बंद दरवाजे, मानिकपुर का विवाद हाईकोर्ट पहुंचा, प्रशासन पर उठे बड़े सवाल?

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के जनपद पंचायत बरमकेला अंतर्गत ग्राम पंचायत पिक्रिमाल के आश्रित ग्राम मानिकपुर में घटी एक घटना ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। यह मामला अब सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक न्याय और व्यवस्था पर बड़ा सवाल बन गया है। मानिकपुर गांव में सरकारी राशि से बना सामुदायिक भवन, जिसका उद्देश्य सभी वर्गों के लोगों के लिए समान उपयोग सुनिश्चित करना था, आज विवादों के घेरे में है। इस भवन के बाहर “माली समाज भवन” लिख दिया गया है और उस पर ताला जड़ दिया गया है। इस कदम ने गांव के अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। पीड़ितों का आरोप है कि

उन्हें इस भवन में प्रवेश करने से रोक दिया गया है। उनका कहना है कि यह केवल एक इमारत पर कब्जा नहीं, बल्कि उनके मौलिक अधिकारों और सम्मान का खुला उल्लंघन है। ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर मामले को लेकर उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को लिखित शिकायत दी। ग्राम स्तर से लेकर जिला स्तर तक गुहार लगाई गई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होने से लोगों में निराशा और गुस्सा दोनों बढ़ते चले गए। जब स्थानीय स्तर पर न्याय नहीं मिला, तो पीड़ितों ने आखिरकार उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच चुका है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि ग्रामीण अब अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं।

इस पूरे मामले की संवेदनशीलता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यह छत्तीसगढ़
के वित्त मंत्री ओपी चौधरी के विधानसभा क्षेत्र का है। ऐसे में प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब मंत्री के क्षेत्र में ही इस तरह का भेदभाव सामने आ रहा है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। गांव में इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। अजा और अजजा समुदाय के लोग इसे अपने अधिकारों पर सीधा हमला मान रहे हैं और लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द ही उचित कार्रवाई नहीं की गई,
तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। पीड़ितों की मुख्य मांग है कि सामुदायिक भवन से “माली समाज भवन” का बोर्ड हटाया जाए, भवन को सभी वर्गों के लिए खोला जाए और इस मामले में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। अब पूरा मामला प्रशासन और न्यायालय के सामने है। यह देखना बेहद महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में न्याय कितनी जल्दी और किस रूप में मिलता है। इस संबंध मे शासन का पक्ष जानने के लिये जनपद पंचायत के सीईओ से संपर्क करने का प्रयास किया गया किन्तु उनसे संपर्क नही हो पाया।



