
नाबालिक को बहला-फुसला कर शाररिक शोषण करने वाले आरोपी मुकेश सारथी को मिली 20 वर्ष सश्रम
कारावास की सजा…

अतिरिक्त न्यायाधीश सारंगढ़ श्री अमित राठौर के न्यायालय ने सुनाया सजा,
शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रफुल्ल कुमार तिवारी ने पैरवी किया
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
अपर सत्र न्यायाधीश सारंगढ़ के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश सारंगढ जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ सत्र खंडरायगढ़ छ ग़ द्वारा आरोपी मुकेश सारथी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया। दिनाँक 17/02/2026 को न्यायालय माननीय अपर सत्र न्यायाधीश सारंगढ़ के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश सारंगढ़ श्री अमित राठौर के न्यायालय में थाना बरमकेला के अपराध जो कि विशेष
आपराधिक प्रकरण अंतर्गत पॉक्सो एक्ट से संबंधित है में आरोपी मुकेश सारथी पिता अजय सारथी उम्र 23वर्ष निवासी ग्राम-चांटीपाली थाना बरमकेला जिला-सारंगढ़ बिलाईगढ़ के द्वारा नाबालिक पीड़ित बालिका को व्यपहरण कर निरंतर शारीरिक संबंध बनाया था
इसके संबंध में पीड़ित बालिका के परिजन के द्वारा थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराया गया था, जिस पर थाना -बरमकेला मे अपराध पंजीबद्ध कर माननीय न्यायालय के समक्ष अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया था । पीडित बालिका की उम्र 18 वर्ष से कम होने पर प्रकरण लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 का पाये जाने से माननीय अपर सत्र न्यायाधीश सारंगढ़ के द्वितीय अतिरिक्त न्यायाधीश सारंगढ़ द्वारा मामले का त्वरित विचारण कर सभी साक्ष्यों एवं गवाहों के बयान पर विचार करने के बाद आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 137 (2) के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 87 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है
एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 4 (2) में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है।एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 5 (ठ) /6 में 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं जुर्माने से दंडित किया गया है अदालत के द्वारा मामले की सवेदनशीलता को देखते हुए पीडिता के शारीरिक एवं मानसिक क्षति एवं पुनर्वास हेतु लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत राज्य शासन को प्रतिकर भुगतान किये जाने की अनुशंसा की गई है। लैंगिक अपराधों से बालकों कासंरक्षणअधिनियम 2012,18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को सुरक्षा प्रदान करता है यह फैसला बाल सुरक्षा एवं यौन अपराध के खिलाफ राज्य शासन एवं न्याय पालिका की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता
है, साथ ही लैगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 के प्रभावी क्रियान्वयन को प्रभावित करता है, इस प्रकरण में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक प्रफुल्ल कुमार तिवारी ने अभियोजन का पक्ष रखते हुए पैरवी की।



