
नौ राईस मिलों के बिजली खपत की जांच के आदेश
रायगढ़, राईस मिलों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब रैंडमली कुछ मिलों के बिजली बिलों का सत्यापन करने का आदेश दिया है। खाद्य विभाग में ऋचा शर्मा की वापसी से अब तकनीकी लूपहोल्स को बंद किया जाएगा। सबसे पहले मिलों में माहवार बिजली खपत की जानकारी मांगी गई है। धड़ाधड़ स्थापित होते नए राइस मिलों के बावजूद समय पर चावल जमा न होना कई संदेहों को जन्म दे रहा है। खाद्य विभाग ने समीक्षा के दौरान पाया कि कुछ मिलों के चावल जमा करने में निरंतरता नहीं है। पिछले दिनों राइस मिलों को बीजी इनकैश करने की चेतावनी देने के बाद कुछ मिलर्स ने चावल जमा करने की रफ्तार बढ़ाई है।
इसके बावजूद चावल जमा की गति धीमी है। संदेह है कि मिल पूरी क्षमता से नहीं चलाई जा रही है। कुछ मिलों में एक ही परिसर में तीन यूनिट भी लगाने की जानकारी दी गई है। चावल आवक की रफ्तार भी उसी हिसाब से होनी चाहिए लेकिन आंकड़ों में कुछ और दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक खाद्य विभाग ने कुछ मिलों के बिजली खपत की जांच के आदेश दिए हैं। मिल अगर चली होगी तो बिजली खपत से समझ आ जाएगा। इसलिए अब नौ मिलों के बिजली बिल जांचने का आदेश दिया गया है। खाद्य अधिकारी ने मां दुर्गा फूड प्रोडक्ट, कंसल उद्योग, शुभम राइस मिल, सावित्री राइस मिल, तरनजीत सिंह टुटेजा एंड ब्रदर्स, जोहार राईस मिल, शारदा राईस मिल, बिरमी राईस मिल और सूरज एग्रो की जांच करने का आदेश दिया है।
एक ही कनेक्शन पर ज्यादा यूनिट
रायगढ़ जिले में कई राइस मिलर्स ऐसे भी हैं जिन्होंने झूठी जानकारी देकर ज्यादा धान मात्रा का एग्रीमेंट कर लिया। एक ही परिसर में एक से अधिक यूनिट का संचालन हो रहा है। विद्युत कनेक्शन एक ही है और बॉयलर लाइसेंस भी एक। लेकिन कई सालों सच छिपाकर पंजीयन हो रहा है। जिले के मिलर्स की जितनी क्षमता है, उससे तो चार महीनों में ही पूरा चावल जमा हो सकता है। अभी भी जिले में 32 हजार एमटी चावल जमा करना बाकी है।