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निजी जमीन शासकीय में दर्ज, त्रुटि सुधार न होने पर मांगी सपरिवार आत्मदाह की अनुमति राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को परिवार ने लिखी चिट्‌ठी,

निजी जमीन शासकीय में दर्ज, त्रुटि सुधार न होने पर मांगी सपरिवार आत्मदाह की अनुमति राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को परिवार ने लिखी चिट्‌ठी,

निजी जमीन शासकीय में दर्ज, त्रुटि सुधार न होने पर मांगी सपरिवार आत्मदाह की अनुमति
राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा को परिवार ने लिखी चिट्‌ठी,

भटगांव,
त्रुटि सुधार न होने से परेशान एक ग्रामीण ने आत्मदाह के लिए कलेक्टर से अनुमति मांगी है। ग्राम चिचोली निवासी दीनदयाल सोनी ने बताया कि विगत 7 वर्षों से उनकी पुस्तैनी जमीन त्रुटिवश शासकीय चढ़ गई है। तत्कालीन कलेक्टर ने सक्षम अनुविभागीय अधिकारी को त्रुटि सुधार के लिए निर्देशित किया था, पर अब तक आधा दर्जन कलेक्टर और एसडीएम बदल गए बावजूद आज तक भूमि का त्रुटि सुधार नहीं हो पाया, जिससे हमारे परिवार को अनेक शासकीय कार्यों को निपटाने में परेशानी हो रही है। न्यायिक प्रक्रिया 7 वर्ष पूर्व ही पूर्ण हो चुकी है। इसके बाद भी वर्षों से त्रुटि सुधार आदेश पर विधिवत कोई कार्रवाई नहीं हुई। उक्त मामले के कारण लगातार पूरा परिवार शोषित-प्रताड़ित है। हमें अपनी ही वैध भूमि से वंचित किया जा रहा है। अतः सपरिवार आत्मदाह की अनुमति दी जाए, जिससे हम अपनी वैध भूमि की लड़ाई से बच सकें।

दीनदयाल सोनी ने बताया कि प.ह. नंबर-27 के खसरा नंबर 139/1, 141 कुल रकबा क्रमश 1.189 और 0.959 काबिज कृषि भूमि बिना किसी राजस्व प्रक्रिया और वैध भू-स्वामी परिवार के वैध जानकारी बगैर असंवैधानिक तरीके से वर्ष 1987-88 में अवैध नामांतरण कर शासकीय भूमि दर्ज कर दी गई है। पैतृक भूमि लगभग 100 वर्षों से उनके परिवार के नाम समस्त राजस्व अभिलेखों में दर्ज चला आ रहा है। सभी राजस्व अभिलेखों के आधार पर अवैध नामांतरण को सक्षम न्यायिक दंडाधिकारी राजस्व बिलाईगढ़ के समक्ष अपील कर सुधार करने न्यायालयीन कार्यवाही की गई है।

जिस पर उक्त सक्षम अनुविभागीय न्यायिक अधिकारी ने सभी राजस्व प्रक्रियाओं का पालन कर न्यायिक कार्रवाई की और उक्त अवैध नामांतरित भूमि को उनके परिवार की पैतृक भूमि होने पर शासकीय भूमि को त्रुटि सुधार कर पुनः उनके भू-स्वामी के रूप में दर्ज किया जाना उचित बताते हुए 5 मार्च 2018 को आदेश पारित किया और कलेक्टर बलौदाबाजार को आगे न्यायिक कार्यवाही के लिए संप्रेषित कर दिया। लेकिन, 7 वर्षों के बाद भी भूमि और सक्षम न्यायिक आदेश का परिपालन आधे दर्जन से अधिक कलेक्टर-एसडीएम बदलने के बाद भी नहीं हो पाया।

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