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सारंगढ़ अंचल में धान की फसल पर कीट-प्रकोप का आतंक, नकली कीटनाशक से बढ़ी मुश्किल,

सारंगढ़ अंचल में धान की फसल पर कीट-प्रकोप का आतंक, नकली कीटनाशक से बढ़ी मुश्किल,

सारंगढ़ अंचल में धान की फसल पर कीट-प्रकोप का आतंक, नकली
कीटनाशक से बढ़ी मुश्किल,

कृषि विभाग नकली कीटनाशको पर कार्यवाही नही कर रहा, बिना पीसी के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले मे व्यापम पैमाने पर कीटनाशक दवाओ की हो रही बिक्री, अमानक कीटनाशक और खाद की बिक्री से किसान परेशान

सारंगढ़,
अंचल में वर्षा की आंख-मिचौली के बीच अब किसानो के सामने अपनी फसल पर कीट- ब्याधियो का खतरा मंडरा रहा है। जिले के अधिकांश जगहो पर फसलो को बिमारियो से खतरा बढ़ गया है। बाजार में बिक रही कीटनाशक दवाओ मे कई दवाएं स्तरहीन है तथा कई ऐसी दवाएं भी खुले आम बिक रही है जिनको छत्तीसगढ़ राज्य में पीसी नही मिला है। ऐसी स्तरहीन और नकली दवाओ पर कार्यवाही के स्थान पर कृषि विभाग सिर्फ आंकड़ेबाजी के खेल में लगा हुआ है। बिना जीएसटी बिल के धड़ल्ले से लाखो रूपये का प्रतिदिन कीटनाशक दवाओ की बिक्री हो रही है। दरअसल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले मे वर्षा इस बार खंड़ो मे हुई है।प्रदेश के सबसे कम
वर्षा वाले जिले मे शामिल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले मे मात्र 630 मिमी वर्षा हुई है जबकि यहा पर औसत वर्षा 1000 को पार कर जाती है यानि महज 63 प्रतिशत ही वर्षा हुई है।

किन्तु कृषि के हिसाब से ज्यादा या कम वाला मात्रा नही हुआ है इस कारण से किसानो के खेतो में फसले लहलहा रही है। लेकिन अब कीट-ब्याधियो का खतरा मंडरा रहा है। कृषि विभाग सारंगढ़ के अधकारियो ने कीट-ब्याधियो से फसलो को बचाने का उपाय तो बता दिया किन्तु जिले के बाजार मे बिक रहे नकली कीटनाशक दवाओ के बारे मे कार्यवाही करना भूल गये है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला कीटनाशक दवाओ की बिक्री के लिहाज से कीटनाशक कंपनियो के लिये बड़ा मार्केट है तथा यह एक मात्र जिला है जहा पर छत्तीसगढ़ में जिन कृषि दवाओ की पीसी स्वीकृत नही हुई रहती है वह दवा भी यहा पर धड़ल्ले से बिक जाती है। वही कुछ दुकानो मे नकली रैपर पैकिंग तथा एमआरपी से छेड़छाड़ की भी कई शिकायते हर साल आती है किन्तु कृषि विभाग ऐसी दवाओ पर कोई कार्यवाही नही करता है।

हर प्रकार के सामानो की तरह कृषि कीटनाशक दवाओ के विक्रय के लिये कई प्रकार की अनुज्ञप्ति हेतु नियम बनाया गया है किन्तु सारंगढ़ अंचल में ऐसा नही है। यहा पर किराना दुकानो मे कीटनाशक दवाओ की खुले आम बिक्री हो रही है। बिना जीएसटी बिल के चल रहे यहा पर बड़े लेबल के व्यापार मे कई लोग लाल हो जा रहे है किन्तु परेशान किसान हो रहे है जिनको कीटनाशक दवाओ का छिड़काव होने के बाद भी कीट-ब्याधियो से मुक्ति नही मिल पा रही है। अंचल के किसानों के धान फसल लहलहाने लगे है। खरीफ सीजन के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ के सभी गांवों में उन्नत किस्म की अलग अलग वेराइटी के धान की बोआई किया गया है।

अब धान की फसलों में गभोट अवस्था या फूल आने की अवस्था में आना प्रारंभ हो गई है। इस समय सर्वाधिक कृषकों के धान फसलों में लगने वाले कीट एवं बीमारियों की समस्या से जुझ रहे है, जिसकी रोकथाम हेतु कृषक कृषि विभाग के अधिकारियों को बार-बार शिकायत मिल रहे है । वही किसान इन दिनों खेती किसानी में व्यस्त हैं, वहीं दूसरी ओर बाजारों में कीटनाशक विक्रेताओं के द्वारा की जा रही अमानक कीटनाशक और खाद की बिक्री से किसान परेशान हैं। कीटनाशक दवाईयां बेचने वालों पर कार्रवाई नहीं होने का खामियाजा किसानों को अधिक कीमत में अमानक दवाईयां खरीद कर भुगतना पड़ रहा है। कभी कभार खाना पूर्ति करने के लिए कृषि विभाग के द्वारा छोटे मोटे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई कर दी जाती है। जबकि थोक और बड़े व्यापारी जो इन छोटे व्यापारियों को दवा सप्लाई करते हैं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। किसानों को नकली या एक्सपायरी डेट की दवाओं की बिक्री नकली कीटनाशक के साथ – साथ एक्सपायरी डेट दवाओं की बिक्री भी की जा रही है। इन नकली कीटनाशकों की पहचान भी भोले भाले ग्रामीण किसान नहीं कर पाते क्योंकि इनकी पैकेजिंग बिल्कुल असली कीटनाशक की तरह होती है। वहीं ज्यादातर किसानों के पढ़े लिखे नहीं होने के कारण उन्हें एक्सपायरी डेट की समझ नहीं होती है। ऐसे किसानों को नकली या एक्सपायरी डेट की दवा होने की समझ तब आती है, जब ऐसे कीटनाशकों के छिड़काव के बाद असर प्रभावहीन होता है। ऐसे में यहां के किसानों को दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तो उनकी गाढ़ी कमाई के पैसे बर्बाद हो रहे हैं वहीं फसलों का नुकसान भी हो रहा है। कीटनाशक दवाईयां खाद व कीटनाशक दवाओं का दुकान खोलने के लिए व्यापारियों को कृषि विभाग से लाइसेंस लेना पड़ता है।

इसके लिए ग्राम पंचायत व कृषि विभाग के अधिकारियों से अनुमति लेनी पड़ती है। साथ ही बीएससी डिग्रीधाारियों को विभाग द्वारा लाइसेंस जारी किया जाता है, यहां बीएससी या समकक्ष डिग्री के अभाव में दुकान संचालक को डिग्रीधारी व्यक्ति के माध्यम से ही दवाईयों की बिक्री किए जाने का प्रविधान है, मगर जिले में संचालित अधिकांश दुकाने शासन के मापदंड के अनुरूप संचालित नहीं रही है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकांश किराना दुकानों में कीटनाशक दवाईयों की बेखौफ बिक्री जा रही है। हर साल लिए जाते हैं सैंपल कृषि विभाग हर साल निजी दुकानों और सोसायटियों में जाकर खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं की जांच करता है। इस दौरान संदेह होने पर खाद, बीज और कीटनाशक दवा के नमूने लेकर जांच के लिए भेजता है। खरीफ और रबी सीजन दोनों में इस तरह के सैंपल लेकर जांच कराए जाते हैं लेकिन बडी बात यही है कि अमानक निकलने के बाद भी किसी दुकान संचालक और सोसायटियों के ऊपर बडी कार्रवाई नहीं होती। क्योंकि जांच में अमानक निकलने वाले खाद, बीज और कीटनाशक के निर्माता वे नहीं रहते। ऐसे में स्थानीय विक्रेता बच जाते हैं। बड़ी कार्रवाई नहीं हो पाती है।

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