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सारंगढ़ में जिला प्रशासन के नाक के नीचे बिक गया आधा दर्जन अवैध प्लाट!
अपनी जमीन को टुकडो में बांटकर कर दिया गया बिक्री?
सुनियोजित तरीके से पहले अपनी जमीन को टुकड़ो में काटा फिर सभी का डायवर्सन किया फिर कर दिया राजिस्ट्री,
इस प्लाट को खरीदने वालो में पंकज देवांगन, अविनाश जायसवाल, बलराम देवांगन, तोषन केशरवानी और मेसर्स सालासर प्रोसेसर के पार्टनर शामिल

सारंगढ़ में जिला प्रशासन के नाक के नीचे बिक गया आधा दर्जन अवैध प्लाट!
अपनी जमीन को टुकडो में बांटकर कर दिया गया बिक्री?
सुनियोजित तरीके से पहले अपनी जमीन को टुकड़ो में काटा फिर सभी का डायवर्सन किया फिर कर दिया राजिस्ट्री,
करोड़ो रूपये के इस खेल मे प्रशासन मूक-दर्शक बना रहा,
अवैध प्लाट पर कार्यवाही के स्थान पर सारंगढ़ में संरक्षण,
संबंधित पटवारी को नही है कुछ भी जानकारी?
सारंगढ़,
सारंगढ़ के बहुचर्चित आर्दश पेट्रोल पंप के बाजू में अवैध रूप से प्लाट काटकर बेचने के मामले मे जिला प्रशासन के नाक के नीचे ही कई भागो मे जमीन बंट गया और इसकी बिक्री भी हो गई। गत दो वर्षो से इन भूमि को बिना रेरा मे पंजीयन कराये ही अवैध रूप से प्लाट काटकर बेचने का प्रयास करने की जानकारी प्रशासन को दिया गया था तथा नगर पालिका सारंगढ़ के द्वारा नोटिस भी जारी किया गया था किन्तु सुनियोजित षड़यंत्र के साथ अपने भूमि का कई टुकड़ो में बंटवारा कराया गया और हर टुकड़ा को डायवर्सन करा दिया गया और गत सप्ताह इसको विभिन्न लोगो को मोटा मुनाफा के साथ विक्रय कर दिया गया। इस पूरे खेल मे प्रशासन मूकदर्शक बना रहा। वर्तमान मे राजिस्ट्री के बाद नामांतरण के लिये प्रकरण तहसीलदार के न्यायालय मे पहुंचा है जहा पर 9 जून को इसकी सुनवाई होगी।
सारंगढ़ में अवैध प्लाट को बेचने वाले गिरोह सक्रिय है तथा पुश्तैनी भूमि जिससे सौदा किया गया उसके नाम पर की भूमि को डायरेक्ट क्रय करने वाले के नाम पर राजिस्ट्री कराकर बीच मे तगड़ा मुनाफा बटोरकर कालाधन का मोटा बैग बनाने वाले बिना एक रूपये का भी टैक्स दिये करोड़ो रूपये की कमाई कर गये और गरीबो को नोटिस देकर नगर पालिका अपना कर्तव्य की इतिश्री कर रहा है। ताजा मामला सारंगढ़ के पटवारी हल्का नंबर 28 में स्थित खसरा नंबर 969 का है। इस खसरा नंबर के भू-स्वामी उड़ीसा के है। इस संबंध में सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार उड़ीसा के सुमन कुमारी पति आत्रंत्रण दास एवं अन्य थानापाड़ा सुन्दरगढ़ उडीसा के निवासी है। इनके नाम पर संयुक्त नाम पर सारंगढ़ के पटवारी हल्का नंबर 969 में लगभग पौने दो एकड़ से अधिक कृषि भूमि मुख्य मार्ग पर प्रतापगंत बिलासपुर रोड़ मे स्थित है। इस भूमि को टुकड़ो मे बांटकर प्लाट के रूप मे विक्रय करने के लिये भू-स्वामी ने अपने भूमि का विभिन्न साईजो मे टुकड़ा करने का आवेदन तहसीलदार तथा संबंधित राजस्व अधिकारी के पास प्रस्तुत किया तथा खसरा नंबर 969 के कृषि भूमि को लगभग 20 टुकड़ो मे विभिन्न साईजो मे बटांकन कराया। बताया जा रहा है कि लगभग 4 डिसमिल से लेकर 6 डिसमिल तक का विभिन्न साईजो मे प्लाट विक्रय करने के लिये ही इन कृषि भूमि का टुकड़ो मे खाता विभाजन कराया गया। जिसके बाद भू-स्वामी ने अपने टुकड़ो वाली भूमि को आवासीय प्रयोजन के लिये डायवर्सन करा लिया। जिसके बाद उन्होन टुकड़ो मे अपनी पुश्तैनी भूमि लगभग आधा दर्जन लोगो को बेच दिया। प्रशासन के नाम के नीचे कृषि भूमि को 20 से अधिक टुकड़ो में बांटकर तथा बिना रेरा और कालोनाईजर एक्ट का राजिस्ट्रेशन किये बिना ही इस भूमि का विभिन्न टुकड़ो मे बटांकन कराकर इसको तगड़े दर पर अवैध प्लाटिंग करके बेच दिया गया। इस पूरी कहानी मे या तो प्रशासन को बाईपास करके अवैध प्लाटिंग को अमलीजामा पहना दिया गया अथवा प्रशासन के राजस्व अधिकारी के संरक्षण मे अवैध प्लाट विक्रय कर दिया गया। अब पूरे मामले का खुलासा होने के बाद पूरे मामले की शिकायत मुख्यमंत्री तथा उच्चाधिकारियो के पास किया जा रहा है वही पूरे मामले मे रेरा के चेयरमैन को भी अवगत कराया जा रहा है कि जो भूमि कृषि भूमि थी उसे अवैध प्लाटिंग करने के लिये किस प्रकार से 20 टुकड़ो मे विभाजित कराया गया तथा हर टुकड़ा का अलग-अलग डायवर्सन कराया गया तथा उसके बाद इसमे से आधा दर्जन से अधिक प्लाट बेच दिया गया। अभी आने वाले माह मे बचे शेष प्लाट का भी राजिस्ट्री कराया जा रहा है। जिससे साफ प्रतीत हो रहा है कि भू-माफिया ने रेरा के पंजीयन से बचते हुए तगड़ा मुनाफाखोरी करते हुए करोड़ो रूपये का मुनाफा किया। हैरत वाली बात यह है कि राजस्व अधिकारियो के संरक्षण मे यह अवैध प्लाटिंग का कार्य पूर्ण हुआ है और बार-बार मिडिया मे यह खबर प्रकाशित होने के बाद भी प्रशासनीक अधिकारी इस बड़े अवैध प्लाट को रोकने की कार्यवाही करने के बजाए कृषि भूमि के टुकड़ो मे विक्रय होने तथा डायवर्सन होने तथा उसके बाद विक्रय होने मे संरक्षण प्रदान करने मे लगे रहे। जिससे साफ प्रतीत हो रहा है कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मे अवैध प्लाट को लेकर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा दिया गया निर्देश का खुले आम धज्जिया उड़ाया जा रहा है।
किन-किन लोगो ने खरीदा है प्लाट
सारंगढ़ के पटवारी हल्का नंबर 28 आर्दश पेट्रोल पंप के पास स्थित बेशकीमती कृषि भूमि जिसे पहले तो 20 टुकड़ो मे बांटा गया और बाद में 4 डिसमिल से लेकर 6 डिसमिल तक की भूमि का आवासीय प्रयोजन मे डायवर्सन करा दिया गया और अब आधा दर्जन से अधिक लोगो के नाम पर राजिस्ट्री करा दिया गया। इस प्लाट को लेने वालो मे सारंगढ़ के कई व्यावसायी शामिल है। जिनके नाम और पता नीचे दिया गया है:-
क्र. खरीददार का नाम खसरा नं.
पंकज कुमार देवांगन पिता अंबिकेश्वर देवांगन पुराना हटरी सारंगढ़ – 969/17
मेसर्स सालासर प्रोससर सिटी कोतवाली रायगढ़ – 969/7, 969/13, 969/14,
(पार्टनर आशीष अग्रवाल, पंकज गुप्ता, और गोपाल शर्मा)
बलराम देवांगन पिता भीम देवांगन कुशलनगर सारंगढ़ – 969/18,
अविनाश जायसवाल पिता प्रतापसिंह जायसवाल चिंगरीपाली सारंगढ़ – 969/19,
तोषन केशरवानी पिता जुगलकिशोर केशरवानी बिलासपुर रोड़ सारंगढ़ – 969/20,

सुमनकुमारी का कृषि भूमि का कितने टुकड़ा हुआ?
इस पूरे खेल मे सबसे बड़ी बात यह है कि सुमनकुमारी पिता आत्रंत्रण दास थानापाड़ा जिला सुन्दरगढ़ उड़ीसा के नाम पर एक ही खसरा नंबर 969 दर्ज था। यह भूमि कृषि भूमि के रूप मे दर्ज था। एक सुनियोजित प्लान के तहत इस कृषि भूमि को भू-माफियाओ ने 20 टुकड़ा में बटांकन कराया है। जबकि भू-राजस्व संहिता के तहत किसी भी भूमि का अधिकतम 5 टुकड़ा मे विभाजन हो सकता है। किन्तु भू-स्वामी सुमनकुमारी के नाम पर दर्ज इस भूमि को लगभग 20 टुकड़ा मे विभाजन किया गया और और हर टुकड़ा को अलग-अलग आवासीय प्रयोजन के नाम पर डायवर्सन करा लिया गया। सभी भूमि को अलग-अलग भू-पुस्तिका बन गया। फिर गत सप्ताह इनसे से 7 टुकड़ा भूमि जिसमें हर टुकड़ा डायर्वटेड प्लाट है उसका विभिन्न व्यक्तियो के नाम पर राजिस्ट्री करा दिया गया। यानि अपने कृषि भूमि को टुकड़ो में बंटाकन कराना और फिर डायवर्सन कराकर जिला प्रशासन के आंखो मे धूल झोंक कर अवैध प्लाट को वैध बनाकर राजिस्ट्री कर दिया गया। जबकि लगभग पौने दो एकड़ से अधिक कृषि भूमि को नियमानुसार रेरा मे पंजीयन कराना था उसके बाद उसको अनुमोदित कराकर प्लाट विक्रय करना था किन्तु यहा पर भू-माफिया बड़ी प्लानिंग के साथ कृषि भूमि को डायवर्सन कराकर टुकड़ो मे अवैध प्लाट का विक्रय कर लिया।
केन्द्र सरकार और राज्य सरकार का रेरा कानून यहा प्रभावी नही?
करोड़ो रूपये के इस जमीन के बडे खेल मे सबसे बड़ी बात यह है कि जिला बने सारंगढ़ को अभी मात्र 9 माह ही हुए है और बिना रेरा मे पंजीयन के करोड़ो रूपये के कृषि भूमि को आवासीय भूमि के रूप मे डायवर्सन कराकर डार्यवर्टेट प्लाट के नाम से खुलेआम विक्रय कर दिया गया। केन्द्र सरकार के द्वारा बनाया गया रेरा कानून छत्तीसगढ़ मे 12 जून 2016 से प्रभावी है किन्तु जिस प्रकार से सुनियोजित प्लानिंग के साथ राजस्व अधिकारियो से सांठगांठ करके यहा पर कृषि भूमि को टुकड़ो में बांटकर अवैध प्लाट को वैध प्लाट बनाकर विक्रय किया गया उससे साफ जाहिर है कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मे बिना रेरा मे पंजीयन कराये इस प्रकार से अवैध प्लाट की बिक्री बदस्तूर जारी रहेगी। शायद सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला मे रेरा कानून लागू नही है? ऐसा प्रतीत हो रहा है।
हींग लगे ना फिटकरी और 1000 टका मुनाफा?
सारंगढ़ में हुए इस बडे स्तर के अवैध प्लाटिंग में सूत्र चौकाने वाले आंकड़े दे रहे है। सूत्रो की माने तो इस भूमि को लगभग 7 करोड़ रूपये मे सौदा किया गया था तथा भू-स्वामी के नाम पर ही दर्ज भूमि को बटांकर कराकर टुकड़ो में बांटा गया फिर हर टुकड़ा का डायवर्सन किया गया। जिसके बाद इसे विक्रय कर दिया गया है। सूत्रो की माने तो यहा पर तीन डिसमिल का एक प्लाट को 1 करोड़ रूपये मे बेचा गया है। हालांकि राजिस्ट्री बाजार दर पर किया गया है किन्तु मूल भू-स्वामी और क्रय करने वालो के बीच तगड़ा मुनाफा बीच में सौदा करने वाले भू-स्वामी उठा लिये है।इस खेल मे तगड़ा मुनाफाखोरी होने के बाद अवैध प्लाट को विक्रय करने वालो के हौंसले बुलंद चल रहे है।
बहरहाल बिना रेरा के पंजीयन के किया गया अवैध प्लाट के बड़े खेल का खुलासा होने के बाद अब देखना है कि प्रशासन इन पर क्या कार्यवाही करती है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के अवैध प्लाट पर रोकने के निर्देश और कार्यवाही करने के आदेश के अनुसार क्या जमीन विक्रय करने वाले और क्रय करने वालो के खिलाफ एफआईआर किया जायेगा? या पूरा मामला ठंड़े बस्ते में जायेगा? यह देखने वाली बात होगी।

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