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खाद के लिए भटकने की मजबूरी होगी खत्म! टोकन कटा तो देना होगा खाद, ज्यादा वसूली पर दुकान होगी सील

सारंगढ़-बिलाईगढ़ के किसानों के लिए अहम व्यवस्था; मोबाइल ऐप से मिलेगा डिजिटल टोकन, दलहन-तिलहन खरीदी केंद्रों की संख्या बढ़ाने की तैयारी से स्थानीय किसानों को भी मिल सकती है राहत

सारंगढ़। खेती-किसानी के सीजन में खाद के लिए समितियों और दुकानों के चक्कर काटने वाले किसानों के लिए नई व्यवस्था राहत लेकर आ सकती है। यूरिया और डीएपी खाद की उपलब्धता, वितरण में पारदर्शिता और निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश में डिजिटल टोकन व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत जिस किसान का टोकन जारी होगा, उसे निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध पात्रता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था रहेगी। खाद होने के बावजूद किसान को मना करने, निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूलने या कालाबाजारी करने जैसी शिकायतों पर संबंधित विक्रेता के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी। गंभीर अनियमितता मिलने पर दुकान सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

इस व्यवस्था का लाभ सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के किसानों को भी मिल सकता है। जिले में खेती-किसानी के दौरान खाद की मांग बढ़ने पर किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराना हमेशा महत्वपूर्ण रहता है। ऐसे में डिजिटल टोकन और ऑनलाइन स्टॉक निगरानी की व्यवस्था किसानों को अनावश्यक परेशानी से बचाने में मददगार हो सकती है। हालांकि, व्यवस्था की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि किसानों को समय पर टोकन मिले, समितियों में पर्याप्त खाद उपलब्ध रहे और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई हो।

मोबाइल ऐप से टोकन, पीओएस मशीन से मिलेगा खाद

नई व्यवस्था के तहत किसान मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी भूमि के रकबे और बोई गई फसल की जानकारी दर्ज कर खाद के लिए टोकन बुक कर सकेंगे। बुकिंग की प्रक्रिया पूरी होने पर मोबाइल पर क्यूआर कोड वाला डिजिटल टोकन जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित दुकान या सहकारी समिति में पहुंचकर किसान को निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी पहचान का सत्यापन कराना होगा। पीओएस मशीन पर बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद पात्रता के अनुसार खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था रहेगी।

इस प्रणाली का उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक खाद पहुंचाना है। आईएफएमएस जैसी ऑनलाइन निगरानी प्रणाली के माध्यम से संबंधित अधिकारी दुकानों और समितियों में खाद के स्टॉक की जानकारी भी देख सकेंगे।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के किसानों के लिए यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाद की कमी या वितरण में अनियमितता होने पर खेती का काम प्रभावित होता है। समय पर खाद नहीं मिलने से फसल की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में डिजिटल व्यवस्था तभी प्रभावी साबित होगी, जब तकनीकी प्रक्रिया से अनजान ग्रामीण किसानों को भी टोकन बनाने और खाद प्राप्त करने में सहयोग मिले।

टोकन मिलने के बाद भी खाद के लिए भटकना पड़ा तो उठेंगे सवाल

नई व्यवस्था में किसानों को राहत देने के साथ खाद विक्रेताओं की जवाबदेही भी बढ़ाने का प्रावधान है। यदि किसी किसान का टोकन जारी होने के बावजूद संबंधित दुकान या समिति में खाद उपलब्ध होने पर भी उसे खाद देने से मना किया जाता है, निर्धारित दर से अधिक राशि वसूली जाती है या खाद की कालाबाजारी की जाती है, तो संबंधित विभाग कार्रवाई कर सकता है। गंभीर मामलों में दुकान सील करने जैसी कार्रवाई भी संभव है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में भी इस व्यवस्था की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। किसानों को केवल डिजिटल टोकन देकर जिम्मेदारी पूरी नहीं मानी जा सकती। प्रशासन और कृषि विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि टोकनधारी किसानों को समय पर खाद मिले, दुकानों में स्टॉक की सही जानकारी उपलब्ध हो और अनियमितता की शिकायतों पर कार्रवाई दिखाई दे।

दलहन-तिलहन की खरीदी के लिए केंद्र बढ़ाने की तैयारी

खाद वितरण के साथ किसानों के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा उनकी उपज का उचित मूल्य है। अरहर, चना, मसूर और सरसों जैसी दलहन-तिलहन फसलों की सरकारी खरीदी के लिए खरीदी केंद्रों की उपलब्धता महत्वपूर्ण होती है। यदि किसानों को अपने गांव या नजदीकी क्षेत्र में खरीदी केंद्र मिलते हैं, तो परिवहन खर्च कम हो सकता है और उपज को कम कीमत पर बेचने की मजबूरी भी घट सकती है।

बलौदाबाजार जिले से दलहन-तिलहन के 26 अतिरिक्त खरीदी केंद्र खोलने का प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, यह प्रस्ताव बलौदाबाजार जिले से संबंधित है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में कितने नए केंद्र प्रस्तावित हैं और किन समितियों को इसके लिए चुना गया है, इसकी अलग से आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के किसानों के हित में भी सरकार को दलहन-तिलहन खरीदी केंद्रों की उपलब्धता बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, ताकि स्थानीय स्तर पर इन फसलों की खेती को प्रोत्साहन मिले और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर न जाना पड़े।

किसानों के हित में व्यवस्था लागू करना ही असली चुनौती

प्रदेश में डिजिटल टोकन व्यवस्था का उद्देश्य खाद वितरण को पारदर्शी बनाना और किसानों की परेशानी कम करना है। लेकिन सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में इसका वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब किसानों को खाद के लिए बार-बार समितियों के चक्कर नहीं काटने पड़ें, निर्धारित दर से अधिक वसूली पर प्रभावी कार्रवाई हो और खाद की उपलब्धता की निगरानी नियमित रूप से की जाए।

जिले के किसानों को उम्मीद रहेगी कि नई व्यवस्था कागजों और मोबाइल ऐप तक सीमित न रहकर खेतों तक पहुंचे। साथ ही, दलहन-तिलहन की सरकारी खरीदी के लिए स्थानीय स्तर पर पर्याप्त केंद्र उपलब्ध कराने की दिशा में भी ठोस पहल हो।

किसानों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या इस बार खाद समय पर, सही कीमत पर और बिना अनावश्यक भागदौड़ के मिलेगी? डिजिटल टोकन व्यवस्था की असली परीक्षा इसी सवाल के जवाब में होगी।

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