निरस्त हो चुके वसीयतनामा के आधार पर कृषि भूमि को नाम चढ़ाकर कर दिया गया विक्रय?
सारंगढ़ में राजस्व विभाग के इस बहुचर्चित मामले मे कार्यवाही शून्य?
3 सितंबर 2024 को दिया गया था वसीयतनामा?
13 अक्टूबर 2025 को वसीयतनामा कराया गया निरस्त?
फिर भी पुराने वसीयत के आधार पर नामांतरण और भूमि विक्रय का हो गया खेला?
खुलासे के बाद भी राजस्व विभाग में नही हुई कोई कार्यवाही,
कुटेला के कौशल्या महंत, मनबोध दास का है मामला,
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़ तहसील में वसीयतनामा के आधार पर कृषि भूमि को चढ़ाकर उसको विक्रय करने का मामला प्रकाश में आया है। जिस वसीयत के आधार पर राजस्व रिकार्ड को अपड़ेट किया गया था उस वसीयतनामा निरस्त हो गया है। फिर भी पुराने वसीयतनामा के आधार पर रिकार्ड ना सिर्फ अपड़ेट किया गया बल्कि उसको विक्रय भी कर दिया गया। मामले का खुलासा होने के बाद भी तहसीलदार कार्यवाही करने के स्थान पर मामले को दबाने में सफल साबित हुए।
जिससे फर्जीवाड़ा गिरोह का हौंसलें बुलंद है।
सारंगढ़ के राजस्व विभाग मे एक कहावत अभी काफी प्रसिद्ध हो चुका है कि फर्जीवाड़ा का केक कटता है और सबको बंटता है। इस कहावत को ही चरितार्थ करता हुआ तहसील सारंगढ़ के ग्राम कुटेला का मामला प्रशासन के चुस्ती को कटघरे मे खड़े कर रहा है। यहा पर एक महिला कौशल्या महंत पति स्वं.लक्ष्मणदास महंत, उम्र-68 वर्ष निवासी-कुटेला, सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छ.ग.) के द्वारा 3 सितंबर 2024 को एक वसीयतनामा निष्पादित किया गया था जिसमें अपनी पावर आफ एटार्नी मनबोध दास महंत पिता मोहनदास महंत, निवासी कुटेला को प्रदान किया गया था। इस वसीयतनामा का पंजीयन भी उपपंजीयन कार्यालय में कराया गया था। वही 13 अक्टूबर 2025 को
कौशल्या महंत पति स्वं.लक्ष्मणदास महंत के द्वारा उपपंजीयन कार्यालय सारंगढ़ में पुन: इस आशय का निष्पादन किया गया कि 3 सितंबर 2024 को एक वसीयतनामा निष्पादित किया गया था
जिसमें अपनी पावर आफ एटार्नी मनबोध दास महंत पिता मोहनदास महंत, निवासी कुटेला को प्रदान किया गया था उसको निरस्त किया जा रहा है अर्थात पुराना वसीयत रद्दीकरण किया जा रहा है। अब खेल यही से शुरू होता है कि मनबोध दास महंत के द्वारा 3 सितंबर 2024 को निष्पादित वसीयत के आधार पर कौशल्या महंत के ग्राम-कुटेला में स्थित कृषि भूमि खसरा नंबर 296/13, 298/3 में 0.202 हेक्टेयर एवं खसरा नंबर 296/14, 296/4 में स्थित रकबा 0.008 हेक्टेयर भूमि को अपने नाम पर अपडेट करा लिया। तथा इसको श्रीमती मीना तिवारी पति संजय तिवारी सारंगढ़ के नाम पर विक्रय कर दिया गया। जिसकी जानकारी कौशल्या महंत तथा उसके परिजनो को होने पर उन्होने इसकी शिकायत के लिये राजस्व अधिकारियो के पास बार-बार चक्कर काटे किन्तु उसकी कोई सुनवाई नही हुई और थक-हारकर और धमकी चमकी देकर मामले को दबा दिया गया।
12 मई 2026 को इस मामले कौशल्या महंत के नाम पर कृषि भूमि को मनबोध दास महंत के नाम पर दर्ज करते हुए इसकी रजिस्ट्री करा दिया गया जिसमे मनबोध दास महंत को पूरा रकम प्राप्त हो गया किन्तु मूल भूमि स्वामी कौशल्या महंत को ना तो अधिकार मिला और ना ही भूमि विक्रय का कोई राशी प्राप्त हुआ। जब उपपंजीयक कार्यालय सारंगढ़ में 3 सितंबर 2024 को निष्पादित वसीयतनामा कराया गया था और 13 अक्टूबर 2025 को उक्त वसीयतनामा को निरस्त करने का विलेख भी निष्पादित किया है तब कैसे राजस्व रिकार्ड पुराने वसीयतनामा के आधार पर अपडेट हो गया? इसमें साफ तौर पर राजस्व विभाग के अधिकारी और पटवारी संलग्न है।
मामले का खुलासा होने के बाद मई 2026 में ही नामांतरण की कार्यवाही संपन्न हो गई। और वर्तमान मे भूमि श्रीमती मीना तिवारी के नाम पर दर्ज हो गई है। अब पूरे मामलें राजस्व विभाग की भूमिका सवालो के घेरें में दिख रही है। संबंधित पर कार्यवाही औरअन्य जानकारी के लिये तहसीलदार एस.के.सिन्हा से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश किया गया किन्तु उनमें संपर्क नही हो पाया।
बहरहाल आने वाले दिनो मे अब यह मामला फिर से गर्म होकर सारंगढ़ के राजस्व विभाग के
कार्यशैली पर सवाल खड़े करत रहा है।



