
जिला कार्यालय में पदस्थ कर्मचारी पर “फर्जी” होने का लग रहा बड़ा आरोप

सारंगढ़ टाईम्स.सारंगढ़
जिले में बड़ा मामला सामने आया आया है, आरोप हैं कि कलेक्टर ऑफिस सारंगढ़ बिलाईगढ़ में फर्जी कागजात, फर्जी अनुभव के आधार पर एक कर्मचारी की नियुक्ति हुई है । सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त अभिलेखों और मिली जानकारी के अनुसार ई – जिला प्रबंधक गंगाधर विश्वकर्मा द्वारा फर्जी अंकसूची व फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर सांठगांठ करते हुए ई जिला प्रबंधक के पद पर नियुक्ति प्राप्त की है। कुछ वर्ष पहले छत्तीसगढ़ के नवीन 05 जिलों में ई जिला प्रबंधक के पद पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी किया गया था। जिस पर गंगाधर विश्वकर्मा ने अपनी रुचि दिखाई थी और सभी जिलों में अपना आवेदन प्रस्तुत किया था जो निम्न है –
जिला सक्ती हेतु शैक्षणिक योग्यता (MCA 64%) अनुभव (5 वर्ष 9 माह )
जिला मोहला मानपुर अम्बागढ़ चौकी हेतु शैक्षणिक योग्यता (MCA 64.95%) अनुभव (6 वर्ष 9 माह)
जिला छुई खदान गंडाई हेतु शैक्षणिक योग्यता (MCA 64%) अनुभव (6 वर्ष)
जिला मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर हेतु शैक्षणिक योग्यता (MSC IT 86.20%) अनुभव (8 वर्ष 9 माह)
जिला सारंगढ़ बिलाईगढ़ हेतु शैक्षणिक योग्यता (MSC IT 86.20%) अनुभव (9 वर्ष 16 माह)
उपरोक्त जानकारी सूचना के अधिकार के तहत सभी जिला कार्यालय से प्रमाणित रूप से प्राप्त हुआ है और ये दस्तावेजों चीख चीख कर बता रहे हैं कि आवेदन में संलग्न किए गए दस्तावेज पूरी तरह फर्जी है।
सारंगढ़ बिलाईगढ़ के जनप्रतिनिधि आ रहे सामने –
सारंगढ़ बिलाईगढ़ के जनप्रतिनिधि जिला में हो रहे इस प्रकार की धांधली और भ्रष्टाचार जिससे जिला का नाम खराब हो रहा है उसके खिलाफ अब खुलकर सामने आ रहे है इसी कड़ी में श्रीमती संतोषी देवी खटकर और उनके प्रतिनिधि अरविंद खटकर जिला कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू से मिले और विगत वर्षों से लंबित इस प्रकरण पर जल्द से जल्द निष्पक्ष जांच व कार्यवाही की मांग की है। आगे भी कई दिग्गज जनप्रतिनिधि और मंत्री इस मामले पर सामने आने वाले हैं जो इस प्रकरण को लेकर काफी नाराजगी व्यक्त कर चुके है।
सामने आने वाले हैं उनके कई कारनामे –
सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले का यह मामला सिर्फ फर्जी नियुक्ति तक सीमित नहीं है बहुत जल्द उनके कई कारनामों आपके सामने आने वाले है जिसे सुनकर-जानकर आम जनता ही नहीं बल्कि जिला प्रशासन की भी होश उड़ने वाले हैं। उनके इस 2 वर्षों के छोटे से अंतराल में उनके कई कारनामे जिला प्रशासन को सोचने पर मजबूर कर देगी कि क्या ऐसा भी हो सकता है? फर्जी नियुक्ति, फर्जी बिल, फर्जी शिकायत.
सभी को मालूम है कि गंगाधर ही शक्तिमान है फिर भी जांच व कार्यवाही शून्य क्यों –
जब से गंगाधर विश्वकर्मा की नियुक्ति हुई है तब से उनके खिलाफ कई बार लगातार तत्कालीन कलेक्टर श्री संजय कन्नौज सर के पास शिकायत किया जा चुका है लेकिन जांच व कार्यवाही आज पर्यंत तक शून्य है जो कहीं न कहीं जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवालिया निशान उठाता है। शिकायतकर्ता बिलासपुर से बार बार स्वयं उपस्थिति देकर सारा काला चिट्ठा जिला प्रशासन के सामने प्रस्तुत कर चुके है और एक निष्पक्ष जांच एवं कार्यवाही हेतु निवेदन कर चुके हैं लेकिन ऐसी क्या बात कि एक परदेशी जो दूरस्थ जिला से पहली बार इस जिला में फर्जी नियुक्ति पाने के कामयाब हुआ है उस पर जिला प्रशासन इतना मेहरबान है। अभी कुछ दिन पहले शिकायतकर्ता वर्तमान जिला कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू जी से मिलकर इस विषय पर चर्चा करते हुए जांच व कार्यवाही हेतु निवेदन किए जिस पर कलेक्टर महोदया ने कार्यवाही हेतु भरोसा दिलाया है।
कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू से उम्मीदें –
इस मामले में निष्पक्ष जांच को लेकर शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू से शिकायत आवेदन प्रेषित किया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है, गौर करने योग्य बात है कि पूर्व की शिकायतों को लेकर भी मीडिया में समाचारों का प्रकाशन होता रहा है लेकिन कर्मचारी पर मजबूत संरक्षण की वजह से उक्त कर्मचारी को एक नोटिस तक जारी नहीं किया गया , बहरहाल मामला कोर्ट भी पहुंच चुका है और तथ्यों के साथ शिकायतें भी हो रही है ऐसे के जिला प्रशासन का रुख भी देखने योग्य होगा.
अवैध उगाही के भी लगातार लग रहे आरोप –
ऐसा नहीं है कि मामला सिर्फ फर्जी दस्तावेजों के सहारे दूसरे की नौकरी हथियाने का ही है, इसके अलावा भी कुछ सीएससी सेंटर चालकों से बड़ी उगाही की शिकायतें भी सामने आ रही हैं, दबाव बनाकर आईडी बंद करवा देना तो सामान्य सी घटना हो चुकी है, बहरहाल अब पूरे मामले की सूक्ष्म जांच की अति आवश्यकता है, शिकायतकर्ताओं ने बिंदुवार जिला कलेक्टर की जानकारी प्रेषित की है और शिकायत कर्ताओं को अब कड़ी कार्यवाही की आशा है.



