
नगर पंचायत बिलाईगढ़ में गरीब स्वच्छता दीदियों को नौकरी से निकालने की घिनौनी साजिश?

न्यायपालिका से भी धोखाधड़ी का प्रयास का आरोप?
नगर पंचायत अध्यक्ष और पार्षद पति के साथियो पर फर्जीवाड़े का आरोप?
सीएमओ के सीसी टीवी साक्ष्य ने खोली पोल,
एफआईआर दर्ज करने और अध्यक्ष को बर्खास्त करने की उठी प्रबल मांग
सारंगढ़ टाईम्स / सारंगढ़. नवगठित सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की नगर पंचायत बिलाईगढ़ से सत्ता के दुरुपयोग, गरीब महिलाओं के शोषण और न्यायपालिका की आंखों में धूल झोंकने का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जो किसी भी सभ्य समाज को शर्मसार कर दे। जिस नगर पंचायत अध्यक्ष को अपनी संस्था की गरीब स्वच्छता दीदियों के हकों की रक्षा करनी चाहिए थी, वही अपने चहेतों को नौकरी पर रखने के लिए इन असहाय महिलाओं को प्रताड़ित कर काम से निकालने की खौफनाक साजिश रच रहे हैं। इस मामले में मिली जानकारी के अनुसार बीते बुधवार, 25 मार्च 2026 को जय माँ समलाई स्व-सहायता समूह की 10 पीड़ित स्वच्छता दीदियों ने पुलिस थाना बिलाईगढ़ पहुंचकर नगर पंचायत अध्यक्ष दामोदर प्रसाद दुबे, वार्ड 07 की पार्षद के पति राजेश कुमार शर्मा (उर्फ राजू) और उनके 4 अन्य गुर्गों के खिलाफ एक विस्तृत दस्तावेजी शिकायत दर्ज कराई है ।
इस शिकायत ने स्थानीय प्रशासन से लेकर न्यायपालिका तक हड़कंप मचा दिया है। नगर को स्वच्छ रखने वाली ये गरीब महिलाएं समाज के अत्यंत पिछड़े वर्ग से आती हैं। सूत्रों की मानें तो 02 सितंबर 2025 को मुख्य आरोपी राजेश शर्मा ने नगर पंचायत के आधिकारिक सभाकक्ष में बिना किसी अधिकार के इन महिलाओं को बुलाया और उन्हें अपमानित, जातिसूचक गालियां देकर जान से मारने की धमकी दी। इस कृत्य के पीछे कोई क्षणिक गुस्सा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है। पीड़ित महिलाओं ने अपनी शिकायत में साफ कहा है कि अध्यक्ष और उनके गुर्गे उन्हें गालियां देकर और डरा-धमका कर इसलिए प्रताड़ित कर रहे हैं ताकि ये महिलाएं खुद ही खौफजदा होकर काम छोड़ दें। इसके बाद, ये जनप्रतिनिधि अपने मनपसंद लोगों को इन पदों पर नियुक्त कर सकें । यह सत्ता के नशे में चूर होकर गरीबों की आजीविका छीनने की चरम सीमा है।
जब राजेश शर्मा पर अनुसूचित जाति/जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला (एफआईआर 0013/2026) दर्ज हुआ और माननीय उच्च न्यायालय ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया, तो कुछ सफेदपोश लोगो ने उसे बचाने के लिए एक बड़ा आपराधिक षड्यंत्र रचा । मिली जानकारी के अनुसार सफेदपोश के निर्देश पर चार बाहरी व्यक्तियों दीपक सिंघानिया, अरुण ग्रेवाल, दिनेश शर्मा, और रमेश जायसवाल ने उच्च न्यायालय और विशेष न्यायालय में शपथ पत्र पेश किए। उन्होंने दावा किया कि 02 सितंबर को सभाकक्ष में एक आधिकारिक बैठक चल रही थी और वहां महिलाओं के साथ कोई बदसलूकी नहीं हुई । अब आरोप लग रहे हैं कि अध्यक्ष ने खुद एक लोक सेवक होते हुए न्यायालय में इस फर्जीवाड़े को सही ठहराने का प्रयास किया।
सीएमओ की दिलेरी और सीसीटीवी फुटेज ने किया पर्दाफाश अध्यक्ष और उनके गुर्गों के इस झूठ के महल को मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ), बिलाईगढ़ ने एक ही झटके में ढहा दिया। छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 92 के तहत बैठकें बुलाने का अधिकार सीएमओ का होता है । सीएमओ ने 12 सितंबर 2025 को पुलिस को पत्र लिखकर साफ कर दिया कि उस दिन ऐसी कोई आधिकारिक बैठक बुलाई ही नहीं गई थी । सबसे बड़ा सबूत सीसीटीवी फुटेज है जिसे सीएमओ ने पुलिस को सौंपा है। इस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ने अकाट्य रूप से साबित कर दिया है कि न्यायालय में झूठी गवाही देने वाले चारों तथाकथित गवाह उस समय सभाकक्ष के आस-पास मौजूद ही नहीं थे ।
धमकियों के साये में महिलाएं मीडिया ट्रायल का खौफ?
पोल खुलती देख आरोपी अब पूरी तरह से बौखला गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार अरुण ग्रेवाल और दिनेश शर्मा अब महिलाओं पर केस वापस लेने का भारी दबाव बना रहे हैं। महिलाओं को सीधी धमकी दी जा रही है कि अगर उन्होंने केस वापस नहीं लिया तो उन्हें नौकरी से निकाल दिया जाएगा, इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब गेंद सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला प्रशासन और पुलिस के पाले में है। इस मामले में कड़े एक्शन की मांग पूरे नगर में जोर पकड़ रही है तत्काल नामजद
एफआईआर और गिरफ्तारी, पुलिस थाना बिलाईगढ़ बिना किसी दबाव के सभी 6 आरोपियों के खिलाफ एफआईआरदर्ज कर इन्हें गिरफ्तार करे। इस संबंध में नगर पंचायत अध्यक्ष का पक्ष जानने के लिये उनके संपर्क करने का प्रयास किया गया किन्तु उनसे संपर्क स्थापित नही हो पाया।



