
10 महिने बाद भी CG33 सिर्फ कागजो पर! सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला में नही खुला पाया
परिवहन कार्यालय,

19 मई 2025 को राजपत्र में प्रकाशित हुआ था
आरटीओ कोड़,
साल बीतने की ओर आज तक धरातल पर नही
पहुंच पाया आरटीओ कोड़,
जिला बनने के साढ़े तीन साल बाद भी रायगढ़
आरटीओ पर निर्भर है सारंगढ़ जिला,
अपने जिले की पहचान CG33 के लिये तरस रहा
सारंगढ़?
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला को उपेक्षित रखने का सिलसिला सरकार के द्वारा बदस्तूर जारी है। जिला निमार्ण के 42 माह बाद भी 15 सरकारी कार्यालय नही खुला है वही नये जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ को जारी किया गया आरटीओ कोड़ CG33 आज भी धरातल पर नही पहुंच पाया है। 19 मई 2025 को छत्तीसगढ राजपत्र में नये पांच जिलो को आरटीओ कोड जारी करने संबंधी आदेश प्रसारित किया गया था उस समय उम्मीद थी कि 6 माह के भीतर सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का परिवहन कार्यालय काम करना प्रारंभ कर देगा किन्तु ऐसा नही हुआ और 10 माह बीतने के बाद भी CG13 से ही सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला चल रहा है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का गठन 1 सितंबर 2022 को हुआ है तथा जिला कार्यालय के कुल 42 सरकारी विभागो का यहा पर स्थापना होना था। जिला निमार्ण के 42 माह बाद भी सिर्फ 27 सरकारी विभाग यहा पर स्थापित हो पाये है वह भी नाम मात्र के सेटअप पर प्रभारियो के भरोसे चल रहा है। वही सबसे महत्वपूर्ण पहचान को रखने वाला विभाग परिवहन विभाग के द्वारा 19 मई 2025 को
नये बने जिले सारंगढ़-बिलाईगढ़ समेत 5 जिलो को आरटीओ कोड जारी कर दिया है। सामान्यत: माना जाता है कि आरटीओ कोड़ जारी करने के 6 माह बाद नया जिला परिवहन कार्यालय काम करना शुरू कर देता है किन्तु 10 माह बीतने के बाद भी सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला का जिला परिवहन कार्यालय प्रारंभ नही हुआ है जिससे साफ प्रतीत हो रहा है
कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला को प्रदेश की सरकार लगातार उपेक्षित कर रही है। परिवहन विभाग मंत्रालय, महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर द्वारा दिनांक 19 मई 2025 को अधिसूचना क. एफ 5-01/2021/8-परि में जानकारी दिया गया कि मोटरयान अधिनियम, 1988 (1968 का सं. 59) की धारा 65 द्वारा प्रवत्त पक्तियों को प्रयोग में लाते हुए तथा भारत सरकार, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना क. का.आ. 080 (अ), दिनांक 30 नवम्बर, 2000 के अनुसरण में, राज्य सरकार द्वारा, नये बने 5 जिलो में विनिर्दिष्ट पंजीयन प्राधिकारी को वाहनों के पंजीयन चिन्ह के रूप में उपयोग करने के लिए उसके सम्मुख तत्स्थानीप्रविष्टि में विनिर्दिष्ट कोड नंबर आबंटित करती है, इस सूची के अनुसार सारंगढ़-बिलाईगढ़ को सी.जी.- 33, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिला को कोड नंबर सीजी.-32, खैरागढ़-छुईखदान-गण्डई जिला को सी.जी.-34, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला को सी.जी.-35 तथा सक्ती जिला को सीजी.-36 दिया गया है।
जानकारो की माने तो आरटीओ कोड़़ जारी होने के लगभग 6 माह के भीतर जिला परिवहन कार्यालय का स्थापना हो जाता है तथा नया जिला मे परिवहन संबंधी कार्यवाही तथा जिले मे नये वाहनो का पंजीयन नये आरटीओ कोड़ के द्वारा प्रारंभ कर दिया जाता है। किन्तु 10 माह बीतने के बाद भी इस संबंध में कोई पहल तक नही किया गया है। ना तो प्रदेश के बजट में इस संबंध में कोई आबंटन
जारी हुआ है और ना ही इस संबंध में कोई सेटअप की स्वीकृति मिली है जिससे लग रहा है कि आने वाले 1-2 साल तक सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पुराने मातृजिला रायगढ़ के आरटीओ के भरोसे ही संचालित होगा। आरटीओ कार्यालय के कार्यो के लिये आज भी सारंगढ़, बरमकेला, सरिया क्षेत्रवासी रायगढ़ की ओर रूख कर रहे है। ड्राईविंग लाईसेंस समेत कई प्रकार के कागजो के लिये अभी भी रायगढ़ की दौड़ लगानी पड़ रही है। ऐसे मे नया जिला बनाये जाने का कोई फायदा क्षेत्रवासियो को मिलता हुआ नही दिख रहा है।
आरटीओ कार्यालय में होने वाले काम
आरटीओ (क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय) मुख्य रूप से मोटर वाहनों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, वाहनों का पंजीकरण, फिटनेस प्रमाणपत्र, परमिट और कर संग्रह के लिए जिम्मेदार है। यह संस्था सड़क सुरक्षा नियमों को लागू करती है, वाहनों का रिकॉर्ड रखती है और पुराने वाहनों के स्वामित्व हस्तांतरण का काम भी करती है। नया लर्निंग या परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस जारी करना, लाइसेंस का नवीनीकरण, डुप्लीकेट लाइसेंस और अंतर्राष्ट्रीय ड्राइविंग परमिट जारी करना होता है साथ ही नई कारों/बाइकों का स्थायी पंजीकरण, पंजीकरण प्रमाण पत्र का नवीनीकरण, मालिकाना हक बदलना और एनओसी जारी करना होता है साथ ही वाणिज्यिक और निजी वाहनों के लिए फिटनेस परीक्षण और प्रमाणपत्र जारी करना और वाहनों पर रोड टैक्स और अन्य शुल्क वसूलना है। इसके] प्रदूषण प्रमाण पत्र की जांच, फैंसी नंबर प्लेट की बुकिंग और यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए जुर्माना लगाना आदि का भी काम आरटीओ कार्यालय के माध्यम से होना है। हालांकि आजकल, अधिकांश आरटीओ सेवाएं ऑनलाइन परिवहन पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध हैं किन्तु कई
ऐसे सेवाएं है जिसके लिये आरटीओ कार्यालय का चक्कर लगाना पड ही रहा है।



