
सारंगढ़ के ईट भट्ठो में भारी मात्रा में रिजेक्ट कोल “बीआर” की सप्लाई? तुमसा शिवरीनारायण के नाम पर निकला कोयला की खपत सारंगढ़ में?

खनिज विभाग की सांठगांठ से हो रही है ईट भट्ठो में रिजेक्ट कोयला की आपूर्ति?
एक माह में 100 से अधिक गाड़ी कोयला की खपत सारंगढ़ में,
30 टन कोयला की कीमत लगभग एक लाख रूपये,
बिना बिल, बिना टीपी और बिना बेबिल के आ रहा है कोयला?
सारंगढ़ टाईम्स/सारंगढ़,
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला के लाल ईट भट्ठो में अन्य स्थानो के लिये निकला कोयला की आपूर्ति धड़ल्ले से जारी है। लेन्ध्रा और आसपास के ईट भट्ठो में तुसमा शिवरीनारायण के नाम से निकला हुआ रिजेक्ट कोल बीआर की व्यापक मात्रा में आपूर्ति हुआ है। खनिज विभाग के संरक्षण में स्तरहीन कोयला की आपूर्ति धड़ल्ले से किया जा रहा है। प्रति दिन सारंगढ़ में ही चार से पांच वाहन रिजेक्ट कोल की आपूर्ति हो रही है। एक वाहन में 30 टन माल आ रहा है तथा 3 हजार रूपये प्रति टन की दर से प्रति वाहन एक लाख रूपये का कोयला भट़्ठा में खप रहा है। उसके अनुसार से प्रति माह 100 वाहन कोयला सारंगढ़ में लग जा रहा है।
सारंगढ़ में लाल ईट का काला कारोबार चरम सीमा में है। लगभग 500 से अधिक
लाल ईट के भट्ठे स्थापित हुए है। शासन के योजना के अनुसार कुम्हार जाति को मिट्टी से ईट बनाये जाने की छूट मिली हुई है किन्तु इसके आड़ में बड़ी संख्या में लाल ईट बनाने का काला कारोबार चल रहा है। कुम्हार जाति को मिले छूट का लाभ रसूखदार लोग उठा रहें हैं और लाल ईंट का अवैध निर्माण कर मोटी कमाई करने में जुटे हैं। इसमें सर्वाधिक बड़ा खेल रिजेक्ट कोल का हो रहा है। बताया जा रहा है कि बिलासपुर के कोल डिपो के लिये सारंगढ़ के ईट भट्ठा बड़े ग्राहकी क्षेत्र
है तथा यहा पर प्रतिदिन 5 गाड़ी रिजेक्ट कोल बीआर की खपत है। सूत्र बताते है कि सारंगढ़ में प्रतिमाह 100 गाड़ी रिजेक्ट कोल बीआर आता है जिसका बाजार मूल्य लगभग 1 करोड़ रूपयेहै। खास बात यह है कि इन कोयला गाड़ियो का टीपी सांरगढ़-बिलाईगढ़ जिला का नही है बल्कि शिवरीनारायण और अन्य स्थानो का है। बिना वैध टीपी के सारंगढ़ में खपा रहे इन अवैध कोयला वाहनो को पकड़ने के स्थान पर खनिज विभाग उचित दर पर संरक्षण प्रदान कर रहा है।
सूत्र बताते है कि गत सप्ताह में सारंगढ़ के लेन्ध्रा गांव में स्थित ईट भट्ठो मे लगभग 10 गाड़ी रिजेक्ट कोल बीआर की आपूर्ति खुलेआम किया गया है। खनिज विभाग के अधिकारी- कर्मचारियो के साथ रिजेक्ट कोल के आपूर्तिकर्ताओ का मधुर संबंध से इन पर कोई कार्यवाही नही हो रही है। बताया जा रहा है कि सारंगढ़ आने वाला कोयला बिना बिल और बिना टीपी का है तथा बेबिल भी इसमे नही है फिर भी खनिज विभाग कार्यवाही से बचते फिर रहा है। बिना औपचारिकता पूर्ण किये ही बन रहा है लाखो की मात्रा मे लाल ईट? खनिज विभाग सूत्रो से मिली जानकारी के अनुसार जिले में गिनती के ईंट भट्ठा के संचालकों द्वारा विभागीय औपचारिकताएं पूरी की गई है, जबकि ज्यादातर भट्ठे अवैध ढंग से संचालित हैं। शहरी सहित
ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों ईंट भट्ठे का कारोबार बगैर विभागीय अनुमति व रायल्टी जमा किए धड़ल्ले से चल रहा है। इससे खनिज विभाग को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
जिले के अधिकांश ईंट भट्ठों पर न तो प्रशासनिक लगाम लग पा रहा है और न ही किसी तरह रायल्टी वसूली हो पा रही है। जिले के 60 फीसदी गांवों में अवैध ईंट भट्ठों का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। शासन-प्रशासन के नियम कायदे को ईंट भट्ठे के संचालकों ने ताक पर रख दिया है। इसके चलते वे न तो विभाग से किसी तरह अनुमति लेना जरुरी समझते न ही रायल्टी की राशि जमा करते। गांव-गांव में लोग ईंट बना रहे हैं, मगर खनिज विभाग की अनदेखी से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इससे शासन को लाखों रुपयों के खनिज रायल्टी का नुकसान हो रहा है जबकि लाल ईट बनाने वाले ईट भट्ठा संचालकों द्वारा कई जगह ईट भट्टे का निर्माण कर लाखों रूपयें की कमाई की जा रही है, वहीं पर्यावरण को दूषित किया जा रहा है, जबकि ईट भट्ठा के लिए पहले खनिज विभाग व पर्यावरण से इसकी मंजूरी लेकर ईट बनाने का कार्य किया जाता है, परन्तु इस क्षेत्र के रसूखदारों द्वारा बिना स्वीकृति लिए ही ईट भट्ठे का संचालन किया जा रहा है।



