जिला- सारंगढ़ बिलाईगढ़

ज्योति पटेल की टीम में हो सकता है सामाजिक संतुलन का फार्मुला ?

ज्योति पटेल की टीम में हो सकता है सामाजिक संतुलन का फार्मुला ?

ज्योति पटेल की टीम में हो सकता है सामाजिक संतुलन का फार्मुला ?

सारंगढ़ टाईम्स.
त्रिस्तरीय चुनाव और नगरीय निकाय चुनाव के बाद संगठन विस्तार को लेकर कार्य प्रारंभ हो चुका है, मंडल, जिला और प्रदेश सभी पदों में विस्तार इस महीने भर के भीतर संपादित होने हैं। ऐसे में सारंगढ़ बिलाईगढ़ के सभी भाजपा कार्यकताओं की नजर अब जिला संगठन के दायित्वों पर है। आम तौर पर सामाजिक समीकरणों के आधार पर कार्य करने वाली भाजपा में इस बार भी सामाजिक समीकरणों के आधार पर दायित्वों का बंटवारा हो सकता है। पिछली बार जिलाध्यक्ष सामान्य वर्ग से बनने के कारण दोनो ही महामंत्रियों को पिछ़डा वर्ग से लिया गया था और इसके अलावा दोनो जिला महामंत्री में एक बरमकेला लेन्ध्रा मंडल तो दुसरा सारंगढ़ मंडल से लिया गया था। इस बार जिलाध्यक्ष चुंकि पिछड़ा वर्ग से बना है तो ऐसे मे सामान्य वर्ग से महामंत्री बनाए जा सकते हैं। जिलाध्यक्ष सारंगढ़ के बाहर मंडल का होने के कारण जिला मुख्यालय में सामान्य वर्ग के लिए जिला महामंत्री का पद आ सकता है। ऐसे में निखिल बानी, अमित रिंकु तिवारी, मनोज मि़श्रा, भुवन लाल मिश्रा, दुर्गा प्रताप सिंह ठाकुर, मजबुत नामों के रूप में सामने आ रहे हैं। देखना यह है कि सामान्य वर्ग में कौन से चेहरे पर ज्योति पटेल मुहर लगाते हैं।

महामंत्री की दौड़ में मनोज जायसवाल सबसे आगे

अगर सामान्य वर्ग से महामंत्री नही लिया जाता है तो मनोज जायसवाल की सबसे ज्यादा संभावना है कि उन्हे महामंत्री का दायित्व मिल सकता है। दो बार के पार्षद, मनोज जायसवाल वर्तमान शहर मंडल अध्यक्ष, जिला कार्यालय मंत्री, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष, जीवन दीप समिति सदस्य समेत और भी कई पदों पर सेवा दे रहे हैं ऐसे में पार्टी उनके अनुभवों का लाभ उठा सकती है। ज्योति पटेल के साथ साथ सुभाष जालान व पुर्व विधायक श्रीमती केराबाई मनहर के खास सिपहसलार में शामिल मनोज जायसवाल के नाम पर मुहर लगती है तो ऐसे में सारंगढ़ से महामंत्री के तौर पर मनोज जायसवाल सबसे मजबुत चेहरे के रूप में स्थान बनाते हैं। पिछड़ा वर्ग में सत्येन्द्र बरगाह का नाम भी एक मजबुत चेहरे के रूप में सामने आ रहा है। पूर्व नगर पालिका उपाध्यक्ष व चार बार के पार्षद के रूप में सत्येन्द्र बरगाह ने पार्टी का ऐसे समय में भी विजयी झंडा लहराया था जब कांग्रेस की लहर चल रही थी और भाजपा के बडे चेहरे भी बुरी तरह से चुनाव हार गए थे। ऐसे में यदि सत्येन्द्र बरगाह के नाम पर संगठन विचार करता है तो पिछड़ा वर्ग से वह मजबुत चेहरे के रूप में दिखाई पड़ते हैं। जिलाध्यक्ष सारंगढ़ मुख्यालय से बाहर का बनने के कारण निर्वतमान जिला महामंत्री अजय गोपाल के नाम पर भी पुनः विचार हो जाए तो कोई बड़ी बात नही होगी। इतना तो तय है कि सुभाष जालान और जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल के पसंद के आधार पर ही सारंगढ़ में जिला महामंत्री बनाया जाएगा। सारंगढ़ मे कार्यकर्ताओं की मानें तो ऐसे चेहरे को दायित्व देने की आवश्यकता है जो ना सिर्फ कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चले बल्कि शासकिय विभागों में कार्यकर्ताओं के कार्यों को भी संपन्न करवा सके और सबसे बड़ी बात की पुरा समय दे सके। बहरहाल आने वाले 15 दिनों मे जिला महामंत्री को लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी।

जनपद चुनाव की हार का असर होगा संगठन विस्तार में

जिस प्रकार से बिलाईगढ़, बरमकेला और सारंगढ़ के जनपद चुनावों में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है उसकी चर्चा पुरे राजधानी तक है। लगातार शिकवा शिकायतें हुई हैं जिसमें सबसे ज्यादा शिकायत वर्तमान जिला कोषाध्यक्ष अमित अग्रवाल और उनके ईष्ट मित्रों के नाम से हुई है। इसी प्रकार के हालात बिलाईगढ़ और बरमकेला में भी हैं उन जगहों में भी कार्यकर्ताओं की बीच कई चेहरों के कार्यकलापों को लेकर खासा रोष देखने को मिल रहा है। जनपद चुनाव के दागी चेहरों को ज्योति पटेल की टीम में यदि स्थान मिलता नजर आया तो स्पष्ट हो जाएगा की सभी स्थानों पर पार्टी अधिकृत प्रत्याशियों के हार में कई प्रभावशाली चेहरों का सीधा सीधा हांथ रहा है। सुत्र बताते हैं कि जनपद चुनाव में दोस्ती यारी के कारण अधिकृत प्रत्याशी को हरवाने में सहयोग करने वाले कुछ दागदार चेहरों को जिला संगठन में मौका मिल सकता है । जिस प्रकार से जनपद चुनाव में पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है उससे सबक लेते हुए नए चेहरों को जिला संगठन में स्थान देने की आवश्यकता है। जिलाध्यक्ष ज्योति पटेल वैसे तो सुलझे हुए व्यक्तित्व के हैं ऐसे में देखना यह होगा कि जनपद चुनाव के दागदार चेहरों को वह संगठन कौन से स्थान पर काबिज करते हैं।

क्या डबल पदों पर चलेगा कैंची

संगठन विस्तार के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच इस बात को लेकर भी चर्चा र्ह कि कई लोगों को कुछ समितियो में भी अध्यक्ष के तौर पर रखा गया है और साथ ही साथ मंडलों में भी प्रमुख पदों पर दायित्व सौंपा गया है ऐसे में संतुलन का अभाव स्पष्ट तौर पर दिख रहा है पुर्व जिलाध्यक्ष अपने हितों को ध्यान में रखते हुए डबल डबल पदों पर अपने पसंद के लोगों को पदस्थ किये हुए थे ऐसे में अब ज्योति पटेल के आने के बाद किस प्रकार से परिवर्तन देखने को मिलेगा यह तो समय ही बताएगा लेकिन सैकड़ों ऐसे कार्यकर्ता हैं जिन लोगों ने विपक्ष मे रहते हुए पुलिस का डंडा खाया है लेकिन आज उन्हे दर किनार किया जा रहा है। डबल पदों पर बैठे हुए लोगों पर क्या संगठन विस्तार के दौरान कैंची चल सकती है यह भी देखने योग्य बात होगी।

सारंगढ़ और बरमकेला मंडल में अध्यक्ष घोषणा हो सकती है जल्द
जिले के सभी मंडलों में अध्यक्षों की घोषणा हो चुकी है लेकिन सांरगढ़ और बरमकेला को लेकर अभी भी सस्पेंश बाकी है। इन दोनो स्थानों पर अभी तक किसी नाम में मुंहर नही लगी है। विशेष तौर पर 45 की उम्र के कारण कई दमदार चेहरे रेस से बाहर हो गए। सारंगढ़ में जिला कोषाध्यक्ष अमित अग्रवाल के भाई प्रकाश अग्रवाल और भाजपा के कद्वावर नेता रहे स्व. नित्यानंद बानी के पुत्र जय प्रकाश बानी के साथ साथ युवा मोर्चा जिला महामंत्री राजा गुप्ता व युवाओं के चहेते प्रहलाद आदित्य भी अध्यक्ष की रेस में हैं। इसी तरह से बरमकेला में मनीष नायक, अरविंद पटेल, लक्ष्मी पटेल और राजकिशोर पटेल ने भी दावेदारी की थी, आने वाले दिनों में इनमे से किसी एक चेहरे पर मुंहर लग सकती है।

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