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बरमकेला के सरकारी छात्रावासों में अव्यवस्थाओं का आरोप, विधायक उत्तरी जांगड़े के निरीक्षण में खुली पोल!

बरमकेला के सरकारी छात्रावासों में अव्यवस्थाओं का आरोप, विधायक उत्तरी जांगड़े के निरीक्षण में खुली पोल!

बरमकेला के सरकारी छात्रावासों में अव्यवस्थाओं का आरोप, विधायक उत्तरी जांगड़े के निरीक्षण में खुली पोल!

झाल कन्या आश्रम में 90 में से 44 बच्चे मिले उपस्थित, बिरनीपाली के 50 सीटर छात्रावास में महज 7 बच्चे मिले; अधीक्षक के पति के रात में रुकने से छात्राओं की सुरक्षा पर उठे सवाल

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/बरमकेला। सुदूर वनांचल क्षेत्र में संचालित सरकारी आश्रम और छात्रावासों की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विधायक उत्तरी जांगड़े के औचक निरीक्षण में अनुसूचित जनजाति कन्या आश्रम शाला झाल और प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास बिरनीपाली में विद्यार्थियों की कम उपस्थिति, साफ-सफाई, पेयजल, अभिलेख संधारण और निगरानी व्यवस्था से जुड़ी कई खामियां सामने आने का दावा किया गया है। निरीक्षण के बाद विधायक ने संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सहायक आयुक्त बद्रीश प्रसाद सुखदेवे के खिलाफ भी गंभीर आरोप लगाए।

विधायक ने इस पूरे मामले को ‘गोरखधंधा पार्ट-2’ करार देते हुए कहा कि पूर्व में भी आश्रमों और छात्रावासों के निरीक्षण के दौरान अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्थाओं में सुधार नहीं हुआ। हालांकि, निरीक्षण के दौरान सामने आए आरोपों की स्वतंत्र जांच और संबंधित विभाग का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

झाल कन्या आश्रम में अधीक्षक के पति के रुकने का आरोप, सुरक्षा पर सवाल

निरीक्षण के दौरान सबसे गंभीर मुद्दा झाल स्थित कन्या आश्रम शाला से जुड़ा रहा। विधायक उत्तरी जांगड़े के अनुसार, आश्रम की अधीक्षक श्रीमती खिलेश्वरी नायक के पति मनोज नायक रात में आश्रम परिसर में ठहरते हैं और पहरा देते हैं।

कन्या आश्रम में छात्राओं की सुरक्षा, निजता और निर्धारित नियमों के पालन को लेकर इस स्थिति पर सवाल उठाए गए हैं। विधायक ने मामले की विभागीय जांच की मांग करते हुए कहा कि छात्राओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस आरोप की जांच कर क्या तथ्य सामने लाता है।

90 बच्चों की दर्ज संख्या, मौके पर केवल 44 उपस्थित

झाल आश्रम शाला में कुल 90 बच्चों के दर्ज होने की जानकारी दी गई, लेकिन विधायक के निरीक्षण के दौरान केवल 44 बच्चे उपस्थित मिले। इस तरह दर्ज संख्या और मौके पर मौजूद विद्यार्थियों की संख्या में बड़ा अंतर सामने आया।

विधायक ने बच्चों के आवक-जावक का समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि शेष बच्चे कहां हैं और उनकी अनुपस्थिति का कारण क्या है? उन्होंने विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति और संबंधित अभिलेखों की जांच की मांग की है।

50 सीटर बिरनीपाली छात्रावास में महज 7 बच्चे

बिरनीपाली स्थित प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे। 50 सीटों वाले इस छात्रावास में 19 बच्चों की दर्ज संख्या बताई गई, लेकिन निरीक्षण के समय केवल 7 बच्चे उपस्थित मिले।

विधायक के मुताबिक, वहां मौजूद बच्चों ने बताया कि दर्ज 19 विद्यार्थियों में से करीब 10 स्थानीय हैं और छात्रावास में रहकर पढ़ाई नहीं करते। इस जानकारी के बाद प्रवेश प्रक्रिया, वास्तविक निवास और उपस्थिति पंजी की सत्यता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। मामले की जांच से ही स्पष्ट हो सकेगा कि कम उपस्थिति के पीछे क्या कारण हैं और रिकॉर्ड में दर्ज विद्यार्थियों की वास्तविक स्थिति क्या है।

अधीक्षक की गैरमौजूदगी और रजिस्टर को लेकर भी सवाल

विधायक ने आरोप लगाया कि बिरनीपाली छात्रावास के अधीक्षक रात में छात्रावास में नहीं रहते। निरीक्षण के दौरान उपस्थिति दर्ज करने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए। आरोप है कि बच्चों की उपस्थिति और अनुपस्थिति अलग-अलग पेन से दर्ज की गई थी। वहीं, स्टाफ पंजी मांगे जाने पर निरीक्षण के दौरान प्रस्तुत नहीं किए जाने की बात भी कही गई।

यदि छात्रावास में अधीक्षक की नियमित उपस्थिति और अभिलेखों के संधारण में अनियमितता पाई जाती है, तो यह विद्यार्थियों की सुरक्षा और व्यवस्था की निगरानी से जुड़ा गंभीर विषय है। ऐसे में संबंधित रजिस्टरों और ड्यूटी रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

गंदे शौचालय और पानी की टंकी, मच्छरदानी का उपयोग नहीं

निरीक्षण में स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्थाओं पर भी आपत्ति जताई गई। विधायक के अनुसार, छात्रावास के शौचालय और पानी की टंकी में गंदगी मिली। बच्चों द्वारा मच्छरदानी का उपयोग नहीं किए जाने की बात भी सामने आई।

सरकारी आश्रम और छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई और मच्छरों से बचाव जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। ऐसे में इन व्यवस्थाओं में कमी के आरोप सामने आने के बाद विभाग से अपेक्षा है कि वह तत्काल स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक सुधार सुनिश्चित करे।

सहायक आयुक्त के मौखिक आदेश पर तीन दैनिक मजदूर रखने का आरोप

विधायक उत्तरी जांगड़े ने आरोप लगाया कि सहायक आयुक्त बद्रीश प्रसाद सुखदेवे के मौखिक आदेश पर झाल आश्रम में बिलासपुर जिले के तीन दैनिक मजदूरों को रखा गया है। उन्होंने इस व्यवस्था की आवश्यकता, नियुक्ति प्रक्रिया और नियमों के पालन की जांच की मांग की।

विधायक ने यह भी दावा किया कि सहायक आयुक्त और विकासखंड प्रभारी शिखर नायक द्वारा करीब एक वर्ष से झाल आश्रम का निरीक्षण नहीं किया गया। बिरनीपाली छात्रावास का भी जुलाई सत्र से निरीक्षण नहीं होने की बात कही गई। इन आरोपों की पुष्टि संबंधित निरीक्षण रजिस्टर और विभागीय रिकॉर्ड से की जानी चाहिए।

विधायक ने सरकार और विभागीय व्यवस्था पर उठाए सवाल

निरीक्षण के बाद विधायक उत्तरी जांगड़े ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने के कारण वनांचल के आश्रम और छात्रावासों की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि शासन बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और आवासीय सुविधाओं के लिए बजट उपलब्ध कराता है, लेकिन यदि जमीनी स्तर पर व्यवस्थाओं में कमी है तो जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

विधायक ने सहायक आयुक्त सहित संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ जांच और कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

अब विभागीय जांच और जवाबदेही का इंतजार

बरमकेला अंचल के झाल और बिरनीपाली आश्रम-छात्रावासों को लेकर सामने आए आरोपों ने सरकारी आवासीय संस्थानों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। विशेष रूप से कन्या आश्रम में सुरक्षा संबंधी आरोप, दर्ज विद्यार्थियों और वास्तविक उपस्थिति के बीच अंतर तथा स्वच्छता की शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या विभाग इन आरोपों की गंभीरता से जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा? क्या विद्यार्थियों की उपस्थिति, अधीक्षकों की रात्रिकालीन मौजूदगी, नियुक्तियों और निरीक्षण रिकॉर्ड की जांच होगी? साथ ही, यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो क्या जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी?

फिलहाल विधायक के निरीक्षण में सामने आने का दावा की गई इन कमियों पर विभागीय कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है। बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में पारदर्शी जांच ही स्थिति स्पष्ट कर सकेगी।

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