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सारंगढ़ के सेवा सेतु शिविर से महिला एवं बाल विकास विभाग का स्टॉल गायब! आखिर किसकी लापरवाही?

सारंगढ़ के सेवा सेतु शिविर से महिला एवं बाल विकास विभाग का स्टॉल गायब! आखिर किसकी लापरवाही?

सारंगढ़ के सेवा सेतु शिविर से महिला एवं बाल विकास विभाग का स्टॉल गायब! आखिर किसकी लापरवाही?

कई विभागों ने हाथों-हाथ दी शासकीय सेवाएं, लाभार्थियों के खिले चेहरे; लेकिन शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी देने वाला विभाग ही नदारद, क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई?

सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़।

सारंगढ़ नगर पालिका परिषद द्वारा गुरुवार को कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित सेवा सेतु शिविर में जहां कई विभागों ने अपने स्टॉल लगाकर नागरिकों को विभिन्न शासकीय योजनाओं और सेवाओं का लाभ पहुंचाया, वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग का स्टॉल ही नजर नहीं आया। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर शासन के महत्वपूर्ण सेवा अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग की यह अनुपस्थिति महज लापरवाही थी या फिर जिम्मेदार अधिकारियों ने इसे गंभीरता से ही नहीं लिया?

सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस शिविर का उद्देश्य नागरिकों को एक ही स्थान पर विभिन्न शासकीय सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराना था। शिविर में जाति, आय, निवास एवं विवाह प्रमाणपत्र सहित आधार कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, जन्म-मृत्यु पंजीयन, पीएम स्वनिधि योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड और पेंशन योजना से संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। कई आवेदकों को हाथों-हाथ सेवाओं का लाभ मिला, जिससे उनके चेहरों पर खुशी देखने को मिली।

नगर पालिका परिषद द्वारा शिविर का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए नगरवासियों से आवश्यक दस्तावेजों के साथ पहुंचकर योजनाओं का लाभ लेने की अपील भी की गई थी। वहीं, निर्धारित कार्यक्रम के तहत विभिन्न विभागों को अपने-अपने विभाग से संबंधित योजनाओं की जानकारी देने के लिए स्टॉल लगाने के निर्देश दिए गए थे।

आदेश के बावजूद स्टॉल नहीं, आखिर जिम्मेदार कौन?

जानकारी के अनुसार, शिविर में राजस्व, स्वास्थ्य, कृषि, खाद्य, वन, लोक सेवा केंद्र, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, लोक निर्माण और स्कूल शिक्षा सहित कई विभागों ने अपने स्टॉल लगाए। इन विभागों के माध्यम से नागरिकों को योजनाओं की जानकारी देने और सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया। लेकिन महिला एवं बाल विकास विभाग का स्टॉल नहीं लगने से आयोजन की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए।

यदि संबंधित विभाग को शिविर में स्टॉल लगाने के निर्देश दिए गए थे, तो फिर उनका पालन क्यों नहीं हुआ? क्या विभाग के अधिकारियों को शिविर की जानकारी नहीं थी, या फिर जानकारी होने के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया गया? सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जिला मुख्यालय में ही शासकीय निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है, तो दूरस्थ क्षेत्रों में विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति कैसी होगी?

महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी से कौन हुआ वंचित?

महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं, बच्चों और किशोरियों के कल्याण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन करता है। इनमें महतारी वंदन योजना, नोनी सुरक्षा योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, छत्तीसगढ़ महिला कोष ऋण योजना, सक्षम योजना, नवाबिहान योजना, पोषण अभियान, पूरक पोषण आहार कार्यक्रम और मिशन वात्सल्य जैसी योजनाएं शामिल हैं।

ऐसे में सेवा सेतु शिविर में विभाग का स्टॉल नहीं लगने से इन योजनाओं की जानकारी लेने पहुंचे संभावित हितग्राहियों को परेशानी का सामना करना पड़ा होगा। हालांकि, कितने हितग्राही सीधे तौर पर प्रभावित हुए, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। फिर भी, महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित ऐसे शिविरों में संबंधित विभाग की अनुपस्थिति निश्चित रूप से व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

संवेदनशील कलेक्टर के निर्देशों का क्या हुआ?

जिला मुख्यालय में आयोजित इस शिविर में महिला एवं बाल विकास विभाग की अनुपस्थिति को लेकर अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू द्वारा इस मामले को संज्ञान में लिया जाता है या नहीं, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

क्या विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा? क्या यह पता लगाया जाएगा कि स्टॉल नहीं लगाने के पीछे वास्तविक कारण क्या था? या फिर अन्य विभागों की मौजूदगी और शिविर की सफलता के बीच इस लापरवाही को नजरअंदाज कर दिया जाएगा?

बहरहाल, सेवा सेतु शिविर का उद्देश्य आम नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ सरलता से उपलब्ध कराना था। ऐसे में एक महत्वपूर्ण विभाग का स्टॉल गायब रहना केवल एक स्टॉल नहीं लगने का मामला नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं को जनता तक पहुंचाने की व्यवस्था से जुड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या रुख अपनाता है और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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