जिला- सारंगढ़ बिलाईगढ़

सारंगढ़ का इंडोर स्टेडियम बना ‘सरकारी विकास’ की कहानी!

सारंगढ़ का इंडोर स्टेडियम बना ‘सरकारी विकास’ की कहानी!

सारंगढ़ का इंडोर स्टेडियम बना ‘सरकारी विकास’ की कहानी!

2 करोड़ में बना, लोकार्पण तक नहीं हुआ और अब 2.5 करोड़ के जीर्णोद्धार की तैयारी?

2019 में भूमिपूजन, 2021 में निर्माण पूरा… पांच साल से खिलाड़ियों को इंतजार; बिना उपयोग के जर्जर हुआ भवन

*सारंगढ़ टाइम्स न्यूज/सारंगढ़।*

सारंगढ़ में खेल प्रतिभाओं को बेहतर सुविधाएं देने के नाम पर बनाया गया *इंडोर स्टेडियम* अब सरकारी सिस्टम की कार्यशैली और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिस इंडोर स्टेडियम का निर्माण करीब *2 करोड़ रुपये की लागत* से कराया गया, वह निर्माण पूरा होने के बाद भी खिलाड़ियों के उपयोग में नहीं आ सका। स्थिति यह है कि लोकार्पण के इंतजार में वर्षों खड़ा रहा यह स्टेडियम अब जर्जर हालत में पहुंच चुका है और इसके *जीर्णोद्धार के लिए 2.5 करोड़ रुपये* की जरूरत बताई जा रही है।
सवाल यह है कि जिस भवन को खिलाड़ियों के लिए बनाया गया था, उसमें यदि वर्षों तक खेल ही नहीं हो पाए तो वह जर्जर कैसे हो गया? और अब उसी व्यवस्था को सुधारने के लिए फिर करोड़ों रुपये क्यों खर्च किए जाएंगे?
यह पूरा मामला सिर्फ एक भवन के जर्जर होने का नहीं, बल्कि *सरकारी धन के इस्तेमाल, विभागीय जवाबदेही और निर्माण के बाद रखरखाव की व्यवस्था* पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।

2019 में भूमिपूजन, 2021 में तैयार… फिर भी लोकार्पण नहीं

सारंगढ़ जिला मुख्यालय में इंडोर स्टेडियम की घोषणा वर्ष *2016* में की गई थी। इसके लिए वर्ष 2019 में राशि स्वीकृत होने के बाद *20 अक्टूबर 2019* को तत्कालीन विधायक उत्तरी जांगड़े के करकमलों से भूमिपूजन कराया गया।
निर्माण कार्य को लगभग एक वर्ष में पूरा किया जाना था, लेकिन ठेकेदार द्वारा इसे वर्ष *2021 में तैयार* किए जाने की जानकारी सामने आती है। इसके बाद उम्मीद थी कि जल्द ही इसका लोकार्पण होगा और सारंगढ़ के खिलाड़ियों को बैडमिंटन सहित विभिन्न इनडोर खेलों के लिए आधुनिक सुविधा उपलब्ध होगी। लेकिन तस्वीर इसके बिल्कुल उलट रही।

 

*स्टेडियम तैयार हुआ, लेकिन खिलाड़ियों के लिए खुल नहीं सका।*

नतीजा यह हुआ कि वर्षों तक लोकार्पण और उपयोग के इंतजार में खड़ा भवन धीरे-धीरे जर्जर होता चला गया।

एक मैच तक नहीं… और अब 2.5 करोड़ की जरूरत!

सारंगढ़ के खेल प्रेमियों के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि जिस इंडोर स्टेडियम को खेल प्रतिभाओं को सुविधा देने के लिए बनाया गया था, वहां नियमित खेल गतिविधियां शुरू होने से पहले ही भवन मरम्मत की स्थिति में पहुंच गया।

बताया जा रहा है कि स्टेडियम में *बैडमिंटन कोर्ट सहित अन्य सुविधाएं* विकसित करने के लिए अलग-अलग मदों, जिसमें डीएमएफ जैसी योजनाओं से कार्य कराने की कवायद भी शामिल रही।

लेकिन मूल सवाल आज भी वहीं है—

*जब करोड़ों रुपये खर्च करके भवन तैयार कर दिया गया था, तो उसे समय पर खिलाड़ियों को सौंपा क्यों नहीं गया?*

अगर समय पर लोकार्पण कराकर संचालन शुरू कर दिया जाता तो क्या आज यह स्थिति आती?

## मुख्यमंत्री ने 2.5 करोड़ की घोषणा की, लेकिन जमीन पर काम कहां?

अगस्त 2025 में मुख्यमंत्री *विष्णुदेव साय* के सारंगढ़ आगमन के दौरान इंडोर स्टेडियम के जीर्णोद्धार के लिए *2.5 करोड़ रुपये की स्वीकृति की घोषणा* किए जाने की बात सामने आई थी।

लेकिन सवाल यह है कि घोषणा के बाद भी आज तक स्टेडियम की स्थिति में अपेक्षित सुधार क्यों नहीं हुआ?

क्या स्वीकृत राशि विभाग को प्राप्त हुई?

यदि राशि प्राप्त नहीं हुई तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?

यदि राशि प्राप्त हो चुकी है तो निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ?

और यदि राशि अभी तक जारी नहीं हुई है तो इसके लिए शासन और विभाग के बीच पत्राचार की वास्तविक स्थिति क्या है?

इन सवालों का जवाब सारंगढ़ की जनता जानना चाहती है।

## हर साल निरीक्षण, हर बार निर्देश… फिर भी नतीजा शून्य!

सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिला प्रशासन के आला अधिकारी समय-समय पर इस इंडोर स्टेडियम का निरीक्षण करते रहे हैं। कई बार अधिकारियों द्वारा *लोक निर्माण विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश* दिए जाने की बात भी सामने आती रही है।

लेकिन सवाल यह है कि अगर निरीक्षण और निर्देश लगातार होते रहे, तो फिर वर्षों बाद भी स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए शुरू क्यों नहीं हो पाया?

*फाइलें चलती रहीं, निरीक्षण होते रहे, निर्देश जारी होते रहे… लेकिन मैदान में खिलाड़ी नहीं उतर सके।*

यही स्थिति अब पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है।

## सरकारी भवन या ‘बार-बार खर्च’ का मॉडल?

सारंगढ़ का यह इंडोर स्टेडियम अब एक ऐसे सरकारी प्रोजेक्ट की तस्वीर पेश कर रहा है, जिसमें पहले निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च हुए और अब उसके जीर्णोद्धार के लिए उससे भी बड़ी राशि की जरूरत बताई जा रही है।

जनता का सीधा सवाल है—

*क्या सरकारी निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और जवाबदेही तय करने की कोई व्यवस्था नहीं है?*

*निर्माण पूरा होने के बाद वर्षों तक भवन का उपयोग नहीं हुआ तो उसकी निगरानी किसकी जिम्मेदारी थी?*

*यदि भवन जर्जर हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से जवाब क्यों नहीं मांगा गया?*

और सबसे बड़ा सवाल—

### *क्या जनता के पैसों से बने इस स्टेडियम के मामले में किसी की जवाबदेही तय होगी या फिर मरम्मत के नाम पर एक बार फिर करोड़ों रुपये खर्च कर दिए जाएंगे?*

## भ्रष्टाचार के आरोपों से भी उठ रहे सवाल

इंडोर स्टेडियम की वर्तमान स्थिति ने सरकारी निर्माण कार्यों में *भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण की संभावनाओं* को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, यह जांच का विषय है और इसका अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच एजेंसी द्वारा ही सामने आ सकता है।

लेकिन परिस्थितियां इतनी गंभीर हैं कि पूरे मामले की *तकनीकी जांच और वित्तीय ऑडिट* कराया जाना जरूरी दिखाई देता है। यदि निर्माण के कुछ ही वर्षों बाद भवन में बड़े पैमाने पर मरम्मत की आवश्यकता पड़ रही है, तो निर्माण के दौरान इस्तेमाल की गई सामग्री, कार्य की गुणवत्ता, माप पुस्तिका, भुगतान, पूर्णता प्रमाण पत्र और रखरखाव की जिम्मेदारी की जांच क्यों नहीं होनी चाहिए?

### *दो करोड़ का निर्माण… पांच साल तक लोकार्पण नहीं… और अब ढाई करोड़ का जीर्णोद्धार!* यह आंकड़ा ही अपने आप में पूरी व्यवस्था से सवाल पूछने के लिए काफी है।

## खिलाड़ियों की उम्मीदें कब होंगी पूरी?

सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में अनेक युवा खिलाड़ी हैं, जिन्हें बेहतर खेल सुविधाओं की जरूरत है। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इंडोर स्टेडियम का वर्षों तक उपयोग में नहीं आना खेल जगत के साथ भी अन्याय है।

जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन और लोक निर्माण विभाग इस पूरे मामले में *समयबद्ध कार्रवाई* करे। स्टेडियम की तकनीकी स्थिति की जांच कराई जाए, निर्माण की गुणवत्ता और खर्च की समीक्षा हो, जिम्मेदारी तय की जाए और यदि 2.5 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत है तो उसकी वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।

क्योंकि जनता यह जानना चाहती है कि—

*आखिर सारंगढ़ का इंडोर स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए कब खुलेगा?*

और उससे भी बड़ा सवाल—

*जिस स्टेडियम का निर्माण खिलाड़ियों के लिए हुआ था, वह खिलाड़ियों के आने से पहले ही जर्जर कैसे हो गया?*

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

https://sarangarhtimes.in/wp-content/uploads/2026/03/Screenshot-2026-03-31-180014.png
Back to top button