
नक्सलवाद के बाद धर्मांतरण देश और छत्तीसगढ़ के लिए सबसे बड़ा खतरा – वेदराम जांगड़े, प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी (छत्तीसगढ़)

”धर्मांतरण सिर्फ पूजा पद्धति का बदलना नहीं, राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता पर सीधा प्रहार है” साजिश के खिलाफ हर समाज और संस्कृति को एकजुट होना जरूरी, भाजपा प्रवक्ता ने रेखांकित किए धर्मांतरण के कारण और निदान
सारंगढ़ बिलाईगढ़।
आज छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश में नक्सलवाद के बाद अगर कोई सबसे बड़ी चुनौती और आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा बनकर उभरा है, तो वह ‘धर्मांतरण’ है। धर्मांतरण का यह काला जाल किसी एक जाति या क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह देश के हर समाज, हर जाति और हर वर्ग के अस्तित्व के लिए एक गंभीर संकट बन चुका है। कुछ राष्ट्रविरोधी और विदेशी ताकतें सोची-समझी साजिश के तहत हमारे भोले-भाले लोगों को निशाना बना रही हैं। आज समाज का कोई भी वर्ग इससे अछूता नहीं है। हमारे आदिवासी भाइयों की पारंपरिक पहचान, दलितों का स्वाभिमान और पिछड़े, अति पिछड़े वर्ग, सामान्य वर्ग की सामाजिक एकजुटता, सब पर चौतरफा हमला हो रहा है। इतिहास गवाह है कि जब-जब देश में जनसांख्यिकी (Demography) बदली है, तब-तब देश की अखंडता और सामाजिक समरसता को भारी चोट पहुंची है।
**आखिर क्यों बढ़ रहा है धर्मांतरण का जाल? (मुख्य कारण)!!
!! धर्मांतरण के पीछे गहरी साजिश काम कर रही है!!
*लालच, भ्रम और भय का घालमेल! विदेशी फंडिंग के दम पर भोले-भाले ग्रामीणों, आदिवासियों और पिछड़े वर्ग के लोगों को धन, मुफ्त इलाज और चमत्कारों का झूठा भ्रम दिखाकर जाल में फंसाया जाता है।
*सेवा की आड़ में षड्यंत्र! शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों की आड़ में सेवा का ढोंग रचा जाता है, जिसका असली मकसद सेवा नहीं बल्कि जनसांख्यिकी (Demography) बदलना है।
*सांस्कृतिक जड़ों से काटना! सुनियोजित तरीके से लोगों को भ्रमित कर उनकी प्राचीन परंपराओं, पूर्वजों और सनातनी जड़ों के प्रति हीन भावना पैदा की जाती है, ताकि वे अपनी मूल संस्कृति से कट जाएं।
*मौन युद्ध (Silent War)! नक्सलवाद तो सामने से गोली चलाता है जिसका मुकाबला हमारे सुरक्षाबल डटकर कर रहे हैं, लेकिन धर्मांतरण एक ऐसा ‘मौन युद्ध’ है जो समाज को अंदर ही अंदर खोखला कर रहा है। यह भाई को भाई से लड़ाने और गांवों की शांति व्यवस्था को भंग करने का जरिया बन चुका है।
**धर्मांतरण के इस काले खेल का क्या है निदान? (समाधान)!!
मुझे लगता है इस राष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए एक मजबूत कार्ययोजना और निदान की आवश्यकता है।
*सख्त कानून और उसका कड़ा क्रियान्वयन! लालच, भय या धोखे से होने वाले अवैध धर्मांतरण के खिलाफ देश और राज्य में बेहद कड़े कानून का पालन सुनिश्चित हो और दोषियों को गैर-जमानती धाराओं में जेल भेजा जाए।
*सामाजिक चेतना और जड़ों की ओर वापसी! हर समाज, जाति और संगठन को अपने स्तर पर सांस्कृतिक गौरव जगाना होगा। हमें अपने वंचित भाइयों को गले लगाना होगा, स्वास्थ्य शिक्षा, के साथ ही स्वरोजगार से जोड़ना होगा, ताकि कोई बाहरी ताकत हमारी कमजोरी का फायदा न उठा सके।
*विदेशी ताकतों और फंडिंग पर कड़ा प्रहार! सेवा के नाम पर आने वाली विदेशी फंडिंग और एनजीओ (NGOs) के खातों की बारीकी से जांच हो, जो इस मौन युद्ध के लिए ईंधन का काम करते हैं।
*सर्वसमाज की राष्ट्रव्यापी एकजुटता! इस संकट से निपटने के लिए केवल कानून ही काफी नहीं है, बल्कि हर नागरिक को सजग होना होगा। समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा, स्वास्थ्य , स्वरोजगार और स्वाभिमान की पहुंच बढ़ानी होगी।
उपसंहार के रूप में के रूप में मैं स्पष्ट रूप से यही कहूंगा कि मेरे छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जो अपनी शांति और समरसता के लिए जानी जाती है, वहां इस प्रकार के षड्यंत्रों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। भारतीय जनता पार्टी, छत्तीसगढ़ के प्रत्येक नागरिक के साथ खड़ी है और हमारी प्राचीन धरोहर, जनजातीय, अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग, सामान्य वर्ग के परंपराओं तथा सामाजिक ताने-बाने को किसी भी कीमत पर नष्ट नहीं होने देगी। अब समय आ गया है कि हम सब मिलकर इस चुनौती का डटकर सामना करें और धर्मांतरण की दुकान चलाने वाली ताकतों को जड़ से उखाड़ फेंकें।
(वेदराम जांगड़े)
प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय जनता पार्टी
छत्तीसगढ़



