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छोटे झाड़ के जंगल मद की सरकारी भूमि पर सार्वजनिक उपयोग के लिए हो रहा था निर्माण कार्य

हाईकोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र और राज्य शासन से मांगा जवाब

छोटे झाड़ के जंगल मद की सरकारी भूमि पर सार्वजनिक उपयोग के लिए हो रहा था निर्माण कार्य,
हाईकोर्ट ने लगाई रोक, केंद्र और राज्य शासन से मांगा जवाब
सारंगढ़ के सिंघनपुर गांव का है मामला,

सारंगढ़,
हाईकोर्ट ने वन भूमि पर कराए जा रहे गैर वानिकी निर्माण पर रोक लगा दिया है और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने केंद्र और राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि पर किया जा रहा निमार्ण ग्राम पंचायत की ओर से किया जा रहा है। हाईकोर्ट के द्वारा स्टे दिये जाने के बाद सारंगढ़ अंचल में छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि पर किया गया शासकीय और गैरशासकीय निमार्ण का जिन्न फिर से बोतल से बाहर आ सकता है। शहरी पटवारी हल्का नंबर 28 में अग्रसेन राईस मिल के लिये जाने वाले रास्ता भी छोटे झाड़ के जंगल मद की शासकीय भूमि पर बनाया गया है और इसके लिये केन्द्र सरकार की ओर से कोई अनुमति भी नही है फिर भी आज भी इस रास्ता का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है। यह मामला भी आने वाले दिनो में प्रशासन के संज्ञान में आ सकता है।  दरअसल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम पंचायत सिंघानपुर में सरपंच के माध्यम से वन भूमि पर राज्य शासन की ओर से सार्वजनिक उपयोग के लिए निर्माण कार्य कराया जा रहा था। यह भूमि अभिलेख में छोटे झाड़ के जंगल के रूप में दर्ज है। गांव की निवासी जानकी निराला ने इस निर्माण केविरुद्ध तहसीलदार के समक्ष शिक़ायत करते हुए बताया कि इस निर्माण से वन भूमि को परिवर्तित किया जा रहा है। साथ ही उनकी स्वयं की भूमि पर आवागमन का रास्ता अवरूद्ध हो रहा है। तहसीलदार ने
मौका जांच कराने के बाद पाया कि निर्माण कार्य वन भूमि पर किया जा रहा है। इसके बाद भी इस पर रोक के लिए प्रस्तुत आवेदन तहसीलदार और अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने खारिज कर दिया। इसके खिलाफ जानकी निराला ने अधिवक्ता सुशोभित सिंह के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की।  याचिका में बताया गया कि वन संरक्षण अधिनियम 1980 के अनुसार केवल केंद्रीय सरकार की अनुमति से ही वन भूमि पर गैर वानिकी निर्माण कार्य किया जा सकता है। वन संरक्षण अधिनियम के अनुसार प्रत्येक शासकीय प्राधिकारी का यह कर्तव्य है कि केंद्र सरकार की अनुमति के बगैर गैर वानिकी निर्माण न होने दे। वन भूमि का गैर वानिकी परिवर्तन दंडनीय अपराध है। हाईकोर्ट ने याचिका पर संज्ञान लेते हुए केंद्र एवं राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब प्रस्तुत करने का आदेश दिया। साथ ही निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए सभी पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। अग्रसेन राईस मिल का रास्ता भी छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि में? वही सिंघनपुर ग्राम पंचायत के सार्वजनिक निमार्ण के मामले में हाईकोर्ट के द्वारा छोटे झाड़ के
जंगल मद की भूमि का उपयोग को लेकर जो स्टे दिया गया और केन्द्र सरकार और राज्य सरकार को नोटिस दिया गया उससे सारंगढ़ में छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज भूमि पर अवैध रूप से निर्मित रास्ता को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे है। पटवारी हल्का नंबर 28 के खसरा नंबर 51 रकबा 0.906 हे. को अग्रसेन राईस मिल के आवागमन के लिये सारंगढ़ के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व के द्वारा आम रास्ता घोषित करने का आदेश जारी किया गया है। जबकि यह भूमि शासकीय भूमि है तथा छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज है। ऐसे मे यह
व्यावसायिक रास्ता के लिये भी केन्द्र सरकार की ओर से कोई अनुमति आदि नही मिला है। अग्रसेन राईस मिल आवागमन के लिये बनाया गया रास्ता के साथ-साथ किसान राईस मिल और उसके आस-पास का 6.90 एकड़ की भूमि भी शासकीय रिकार्ड मे छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज है। ऐसे में सिंघनपुर के मामले में हाईकोर्ट के अंतिम आदेश के बाद सारंगढ़ अंचल में छोटे झाड़ के जंगल मद में  भूमि के बारे मे बड़ा एक्शन हो सकता है।

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