
सारंगढ़ नगर पालिका “अध्यक्ष” पद के लिये दो भाइयों के बीच घमासान की संभावना?
कांग्रेस से घनश्याम मनहर तो भाजपा से अरविंद हरिप्रिया हो सकते है उम्मीदवार?रिश्ते में दोनो भाई लगते है,
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
नगर पालिका चुनाव में इन दिनों चर्चा का दौर गर्म है. पूर्व विधायक पद्मा मनहर के पति कांग्रेस नेता घनश्याम मनहर की दावेदारी से राजनीतिक तापमान एकाएक बढ़ गया है .अभी तक कांग्रेस को कमजोर मानने वाले राजनीतिक विश्लेषक घनश्याम की दावेदारी से कांग्रेस को अचानक मजबूत मानने लगे हैं . कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच में घनश्याम मनहर गुरु जी के नाम से लोकप्रिय हैं तथा उनकी धर्मपत्नी पद्मा मनहर कांग्रेस से विधायक भी रह चुकी हैं. वही बात करें भाजपा की तो घनश्याम गुरुजी की दावेदारी के बाद\ भारतीय जनता पार्टी में किसी मजबूत दावेदार की मांग तेज हो गई है. ऐसे में भाजपा के कद्दावर नेता पूर्व सांसद प्रतिनिधि अरविंद हरिप्रिया की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है. यहां यह उल्लेखनीय है कि अरविंद हरीप्रिया और घनश्याम मनहर दोनों रिश्ते में भाई हैं तथा सारंगढ़ के भीखमपुरा के प्रतिष्ठित गौटिया परिवार से आते हैं. इस परिवार से दो विधायक एवं दो राज्यसभा सांसद रह चुके हैं. दोनों भाइयों के बीच का घमासान क्या रंग लाएगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा. घनश्याम मनहर की मजबूत दावेदारी से मृतप्राय कांग्रेस जहां संजीवनी महसूस कर रही है वहीं अब भारतीय जनता पार्टी उनके मुकाबले में उनके स्तर के ही किसी नेता को लड़ाने के लिए गंभीरता से विचार करेगी। अरविंद हरिप्रिया भारतीय जनता पार्टी के एक मजबूत नेता माने जाते हैं तथा वर्तमान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के केंद्रीय मंत्री रहते हुए उनके सांसद प्रतिनिधि का दायित्व बखूबी निभा चुके हैं . पूर्व में जिला भाजपा के प्रवक्ता भी रहे हैं तथा रायगढ़ जिला आईटी सेल के प्रथम जिला संयोजक का दायित्व भी संभाल चुके हैं. इन्हें भारतीय जनता पार्टी में एक मजबूत और दमदार नेता के रूप में देखा जाता है .सारंगढ़ की राजनीति वैसे तो सलवा जुडूम के नाम से काफी बदनाम है लेकिन अगर दोनों भाई नगर पालिका चुनाव में आमने-सामने होते हैं तो मामला काफी रोचक हो सकता है. भारतीय जनता पार्टी जहां कांग्रेस के नगर पालिका अध्यक्ष की एंटी इनकंबेंसी के भरोसे बैठी है वही घनश्याम मनहर के सामने आने से इसका का प्रभाव कम हो जाएगा और भारतीय जनता पार्टी को फ्रंट फुट पर आक्रामक बल्लेबाजी करनी पड़ेगी . कोई भी कमजोर प्रत्याशी कांग्रेस प्रत्याशी के आगे टिक नहीं पाएगा ऐसा आम जनता के बीच में चर्चा है. देखना हैं कि आने वाले समय में ऊंट किस करवट पर बैठता है। इस बार नगर पालिका अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदान से होगा. इसके पूर्व अमित अग्रवाल सीधे मतदान से नगर पालिका अध्यक्ष बने थे तथा उसके बाद पार्षदों के द्वारा चुनकर सोनी अजय बंजारे नगर पालिका अध्यक्ष बनी थी. सोनी अजय बंजारे को पद से हटाने का मामला जहां हाईकोर्ट में लंबित है वही उनके पति अजय बंजारे के विरुद्ध अपराधिक प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं. पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को सारंगढ़ नगर पालिका से करारी हार का सामना करना पड़ा था. उनके सिर्फ तीन पार्षद जीतकर आप आए थे किंतु इस बार परिस्थिति बदली हुई है . राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है इसलिए ऐसा माना जा रहा है कि प्रारंभिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी को कुछ बढ़त मिल सकती है. नगर पालिका के चुनाव में व्यक्ति का चेहरा महत्वपूर्ण होता है. ऐसे में आने वाले समय में कांग्रेस और भाजपा दोनों के बीच ही मुख्य मुकाबला होगा और प्रत्याशी चयन पर ही परिणाम निर्भर करेगा. इस नगर पालिका चुनाव में एक और जहां राज्य शासन की परीक्षा होगी वही विधायक उत्तरी जांगड़े के लिए भी यह चुनाव चुनौती होगा।



