
बहुचर्चित डॉल्फिन स्कूल घोटाला प्रकरण में राजेश शर्मा और उमा शर्मा दोषमुक्त
सारंगढ़ न्यायालय का फैसला,
420 समेत 467, 468 और 471 भादंवि के आरोपों से मिली राहत;
बचाव पक्ष की ओर से चार अधिवक्ताओं ने की पैरवी
सारंगढ़ टाईम्स न्यूज/सारंगढ़,
छत्तीसगढ़ में लंबे समय तक चर्चित रहे डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल प्रकरण का एक महत्वपूर्ण कानूनी अध्याय सारंगढ़ में सामने आया है। डॉल्फिन स्कूल से जुड़े चर्चित आर्थिक धोखाधड़ी प्रकरण में आरोपी राजेश शर्मा एवं उसकी पत्नी उमा शर्मा को न्यायिक दंडाधिकारी सारंगढ़ के न्यायालय द्वारा लगाए गए आरोपों एवं धाराओं में
दोषमुक्त कर दिया गया है। यह फैसला उस मामले में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिसमें सारंगढ़ और सरिया थाना क्षेत्र में भी अपराध पंजीबद्ध किया गया था। इस संबंध में अधिवक्ता दीपक तिवारी ने बताया कि राजेश शर्मा ने वर्ष 2005 में डॉल्फिन इंटरनेशनल स्कूल की शुरुआत की थी। बाद में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न हिस्सों में स्कूल की शाखाएं संचालित किए जाने की बात सामने आई। स्कूल के प्रचार-प्रसार के लिए चर्चित टीवी कलाकारों को ब्रांड एंबेसडर बनाए जाने का भी उल्लेख इस मामले से जुड़ी रिपोर्टों में मिलता है। अभिभावकों को आकर्षित करने के लिए ऐसी योजना प्रस्तुत किए जाने का आरोप था, जिसके तहत एकमुश्त 50 हजार से एक लाख रुपये तक जमा करने पर बच्चों को 12वीं कक्षा तक निःशुल्क शिक्षा देने की बात कही गई थी। पुलिस जांच एवं विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि
इस योजना के माध्यम से बड़ी संख्या में अभिभावकों से राशि प्राप्त की गई और बाद में स्कूल संचालन को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। रिपोर्टों के अनुसार इस पूरे मामले में 20 हजार से अधिक अभिभावकों से करीब 60 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप सामने आए थे। वर्ष 2011 में राजेश शर्मा के फरार होने के बाद मामला और अधिक चर्चित हो गया था।
कई स्थानों पर संपत्तियों का भी हुआ था उल्लेख
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों से संबंधित विभिन्न स्थानों पर संपत्तियों और दस्तावेजों की जानकारी जुटाई थी। मीडिया रिपोर्टों में अभनपुर, पटेवा, भाटापारा सहित सारंगढ़ में लगभग 3,600 वर्गफीट की संपत्ति का भी उल्लेख किया गया था। उक्त संपत्ति के संबंध में जांच के दौरान थर्ड पार्टी पजेशन की बात भी सामने आने की
जानकारी प्रकाशित हुई थी। इसी संपत्ति और कथित आर्थिक लेन-देन से जुड़े पहलुओं के कारण डॉल्फिन स्कूल प्रकरण की जांच का एक हिस्सा सारंगढ़ तक पहुंचा था।
सारंगढ़ और सरिया थाने में भी दर्ज हुए थे अपराध
डॉल्फिन स्कूल प्रकरण के सिलसिले में सारंगढ़ और सरिया पुलिस थाना में भी आपराधिक प्रकरण दर्ज हुआ था। पुलिस थाना सारंगढ़ में राजेश शर्मा के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध किया गया था। वहीं पुलिस थाना सरिया में राजेश शर्मा, उमा शर्मा सहित अन्य तीन आरोपियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468, 471 एवं 420 के तहत अपराध दर्ज किया गया था। मामले की विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आरोपियों को लेकर अलग-अलग कानूनी कार्रवाई हुई। प्रकरण में राजेश शर्मा एवं उमा शर्मा न्यायिक अभिरक्षा में केंद्रीय जेल रायपुर में
निरुद्ध रहे, जबकि अन्य तीन आरोपियों के फरार रहने की जानकारी भी सामने आई थी। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष अभियोजन के आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा। न्यायालय द्वारा सुनवाई पूर्ण किए जाने के बाद दोनों आरोपियों को सभी संबंधित धाराओं में दोषमुक्त किए जाने का आदेश पारित किया गया।
छह वर्ष बाद हैदराबाद से हुई थी गिरफ्तारी
डॉल्फिन स्कूल प्रकरण के मुख्य आरोपी बताए गए राजेश शर्मा को पुलिस ने लंबे समय तक तलाशने के बाद वर्ष 2017 में हैदराबाद से गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार वह करीब छह वर्षों से फरार था और कथित रूप से पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी के बाद डॉल्फिन स्कूल से जुड़े
पुराने प्रकरणों की जांच एवं न्यायिक कार्रवाई को आगे बढ़ाया गया। छत्तीसगढ़ के विभिन्न थानों में दर्ज मामलों के चलते यह प्रकरण लंबे समय तक कानूनी प्रक्रिया में रहा। राजेश शर्मा एवं उमा शर्मा की ओर से न्यायालय में अधिवक्ता विजय कुमार तिवारी, अधिवक्ता दीपक तिवारी, अधिवक्ता देव प्रसाद कहार एवं अधिवक्ता देवेंद्र नाथ
नंदे ने पैरवी की।



